भारत के प्रमुख क्षेत्रीय मेले एवं त्योहार (हिंदी)by आलोक वर्मा

        भारत के प्रमुख क्षेत्रीय मेले एवं त्योहार 
       ( Important Regional Fair and Festivals in India ) 
असम 
बिहू : बिहू असम का मुख्य त्योहार है । यह त्योहार वर्ष में तीन बार मनाया जाता है । बोहाग बिहू या रोंगाली बिहू अप्रैल में मनाया जाता है । असम का नया वर्ष इसी के साथ प्रारंभ होता है । माघ बिहू या भोगाली बिहू जनवरी में तथा काती बिहू या कोंगाली बिहू अक्टूबर / नवम्बर में मनाया जाता है । इस त्योहार में असम का प्रसिद्ध बिहू नृत्य भी किया जाता है ।

मेघालय 
का पावलांग - नागकेम ' यह पाँच दिन तक सगास जाने वाला जाती जनजाति का प्रमुख भानिया रथोर है जो हर सात शिलांग से लामा किमी दूर स्मित नाम के गाँव में मनाया जाता है । यह भीगकम नत्य के नाम से भी प्रसिद्ध है । 

ओडिशा 
जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव : यह दस दिवसीय महोत्सव आषाढ शुक्ला द्वितीय से आषाढ शुक्ला एकादशी तक ऑडिशा का पुरी राहत में मनाया जाता है । इसमें आपाद शुक्ला द्वितीया को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर ( पुरी ) से प्रारम्भ होती है । यह रथ यात्रा गुडीचा माता मंदिर पहुंचकर सम्पन्न होती है । आपद शुक्ला दशमी को जगन्नाथजी की वापसी यात्रा शुरू होती है शाम तक जगन्नाथ मंदिर पहुंच जाती है । यहाँ एक दिन प्रतिमाएँ भक्तो के दर्शनार्थ रथ में रखी जाती है । अगले दिन एकादशी को प्रतिमाओं को मंत्रोच्चार के । साथ गर्भगृह में पुनः स्थापित कर दिया जाता है इस यात्रा को गुण्डीय । यात्रा या कार फेस्टिवल ' भी कहा जाता है । इस यात्रा में लकड़ी की प्रतिमाएँ होती है च रथ भी लकड़ी का ही बनाते हैं । रथों का निर्माण अक्षय तृतीया से वनजगा महोत्सव से प्रारम्भ होता है । 

नबकलेवर महोत्सव : यह जगन्नाथपुरी ( ओडिशा ) में 12 से 19 वर्षों में एक बार मनाया जाने वाला त्योहार है जिसमें भगवान जगन्नाथ . बलभद्र व सुभद्रा की पुरानी मूर्तियों के स्थान पर नई मूर्तियों प्रतिस्थापित की जाती है । यह महोत्सव उस वर्ष मनाया जाता जब आषाढ़ माह में दो बार पूर्णिमा आती है अर्थात् जब वर्ष में अधिमास आता है । इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है । यह वर्ष 2015 में 8वीं बार आयोजित हुआ । 

कलिंग महोत्सव : यह महोत्सव शांति की युद्ध पर विजय ( कलिंग लड़ाई ) के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है । यह 10 व । । जनवरी भुवनेश्वर ( ओडिशा ) में धौली शांति स्तूप में मनाया जाता है । इसमें भारतभर से मार्शल आर्टिस्ट भाग लेते हैं । 

कोणार्क नृत्य महोत्सव : यह महोत्सव 1 - 5 दिसम्बर तक कोणार्क मन्दिर में मनाया जाता है । इसमें देशभर के नर्तक भाग लेते हैं । 

बाली यात्रा महोत्सव : यह महोत्सव ओडिशा में कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है । बाली यात्रा मेला महानदी के किनारे कटक शहर में लगता है । इस दिन ओडिशा के व्यापारी बड़ी - बड़ी नावों जिन्हें " Boilin ' कहते हैं , में समुद्री यात्राएँ करते हैं । इस दिन प्रतीक के रूप में छोटी - छोटी कागज की नावें दीपक रखकर नदी में छोड़ी जाती है । इसे ' बोइटा बंदन ' ( Boita Bandana ) कहा जाता है । कार्तिकेय की मूर्ति की पूजा की जाती है तथा बाद में इसे महानदी में बहा दिया जाता है । 

चंदन यात्रा , ओडिशा : चवन यात्रा ओडिशा ( उड़ीसा ) में भगवान जगन्नाथ के सम्मान में प्रतिवर्ष मई - जून में मनाया जाने वाला त्योहार है । यह अक्षय तृतीया को प्रारम्भ होता है व 21 दिन तक चलता है । 

गम्हा पूर्णिमा : ओडिशा में आवण माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला त्योहार है । इस दिन गाय - बेलों की पूजा की जाती है । गम्हा पूर्णिमा भगवान बलराम का जन्म दिवस मानी जाती है । इसी दिन पूरे देश रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है ।

पश्चिम बंगाल 
बसन्त उत्सव : बसन्त आगमन पर मनाया जाने वाला त्योहार त्योहार सर्वप्रथम विश्वभारती शांति निकेतन में रवीन्द्रनाथ टैगोर टा पारम्भ किया गया । 

चरक पूजा : यह बंगाली माह चन्न ' के अंतिम दिन चैत्र संक्रांति ( 14 15 अप्रैल ) की मध्य रात्रि को समस्त पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है । जस दिन शिव व शक्ति की पूजा की जाती है । इसे नील पूजा , हाजरा । पूजा व बत्री चरक भी कहते हैं । 

दुर्गा पूजा : यह पश्चिम बंगाल का प्रमुख त्योहार है जो अप्रैल - मई ( चैत्र माह ) व सितम्बर - अक्टूबर ( आश्विन माह ) में 9 दिन तक नवरात्रों में मनाया जाता है । इसमें दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है । अंतिम दिन दुर्गा की मूर्ति का नदी में विसर्जन किया जाता है । इस दिन धुनची नृत्य किया जाता है । 

जगधात्री पूजा : दुर्गा पूजा व काली पूजा के बाद जगधात्री पूजा बंगाल का एक महत्वपूर्ण उत्सव है । यह उत्सव कार्तिक माह में मनाया जाता है । 

तीस्ता टी एंड टूरिज्म फेस्टिवल : यह पश्चिम बंगाल में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए नवम्बर - दिसम्बर में दार्जिलिंग , दोआर व सिक्किम में मनाया जाता है । यह तीन सप्ताह तक चलता है । 

विष्णुपुर फेस्टिवल : यह पश्चिम बंगाल का राजकीय त्योहार है जो 27 31 दिसम्बर तक विष्णुपुर ( बाँकुरा जिला ) में मदनमोहन मंदिर के पास आयोजित किया जाता है । 

बिहार
 बिहुला बिशरी पर्व : यह भागलपुर ( पूर्वी बिहार ) का प्रमुख त्योहार है , जो श्रावण माह में मनाया जाता है । इस दिन अपने परिवार के कल्याण के लिए मनसा माता ( साँपों की देवी ) की पूजा की जाती है । 

सोनपुर पशु मेला : यह मेला गंगा व गडक नदी के संगम पर नवम्बर में पर्णिमा को बिहार में आयोजित किया जाता है । इसे हरिहर चैत्र मेला ( Harihar Chhetra Mela ) के नाम से भी जाना जाता है । यह विश्व में आयोजित किया जाने वाला अपनी तरह का एकमात्र मेला है । हाथी बाजार इस मेले का प्रमुख आकर्षण है । 

वृषभ संक्रांति : बिहार में 15 मई को मनाया जाने वाला त्योहार है । इसे ओडिशा में अशा संक्रान्ति के नाम से मनाया जाता है । इस दिन विशेष रूप से ' गायों का दान ' किया जाता है । 

भागलपुर महोत्सव              राजगीर महोत्सव , नालन्दा
मिथिला महोत्सव ,              मधुबनी . बौद्ध महोत्सव , बोध गया 

मध्य प्रदेश . 
भगोरिया हाट महोत्सव : यह आदिवासियों का महत्वपूर्ण त्योहार है जो मध्य प्रदेश में मनाया जाता है । इस महोत्सव में आदिवासी लड़के - लड़किया । अपना जीवनसाथी चुनते हैं । 

खजुराहो नृत्य महोत्सव : प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल खजुराहो ( बुदेलखण्ड , मध्य प्रदेश ) में फरवरी - मार्च माह में मनाया जाने वाला महोत्सव है , जिसमें 7 दिनों तक शास्त्रीय व अन्य नृत्यों का आयोजन होता है । 

मदाई उत्सव : यह उत्सव भी मध्य प्रदेश के आदिवासियों मुख्यतः । गोण्ड जनजाति का प्रमुख महोत्सव है जो मंडल से बस्तर जिले तक के क्षेत्र में मनाया जाता है । यह फरवरी के तीसरे - चौथे सप्ताह में मनाया जाता है ।

पंजाब तानसेन संगीत समारोह : ग्वालियर के यहत स्थान पर हर वर्ष ससाट अकबर के दरबार के प्रसिद्ध संगीतज्ञ तानसेन की स्मृति में मनाया जाता है । 

पंजाब
होला मोहल्ला पंजाब में होली के दूसरे दिन यह त्योहार रंगों के त्योहार के रूप में मनाया जाता है । 

गुरुपर्व : यह पंजाब में सिख गुरुओं विशेषकर गुरुनानक , गुरु गोविन्द सिंह व गुरु अर्जुनदेव जी के सम्मान में मनाया जाने वाला त्योहार है । 

तियां : पंजाब में आवण शक्ला तीज को मनाया जाने वाला त्योहार । इस त्योहार पर गिद्धा नृत्य किया जाता है । 

माधी : लोहड़ी के दूसरे दिन मनाया जाने वाला त्योहार । इसे मकर यौनक्रान्ति ( Yonkranti ) भी कहते हैं । 

उत्तराखंड 
नंदादेवी मेलाः अल्मोड़ा 
नंदा देवी राजजात यात्रा : यह तीन सप्ताह की यात्रा चमोली में हर बारह वर्ष में आयोजित होती है । 

देवीधुरा मेला : यह मेला रक्षाबंधन के दिन चपावत जिले के देवीधुरा में बाराही देवी मंदिर में आयोजित होता है । इस दिन यहाँ ' बग्वाल ( पत्थरों की लड़ाई ) का आयोजन भी किया जाता है । 

गौचर मेला : यह मेला उत्तराखण्ड के चमोली की कर्णप्रयाग तहसील गौचर कस्तो में भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू जन्म दिन के अवसर पर 14 नवम्बर से एक सप्ताह तक आयोजित किया जाने वाला व्यावसायिक मेला है । गौचर कस्बा अलकनन्दा नदी बाएँ किनारे पर स्थित है । 

उत्तर प्रदेश 

बाराबंकी मेला , उत्तर प्रदेश : इसे देवा मेला ( Dewa Fair ) भी कहा जाता है , जो प्रतिवर्ष अक्टूबर व नवम्बर माह ( कार्तिक माह ) में आयोजित किया जाता है । यह दस दिवसीय वार्षिक उर्स मेला ' देवा ' बाराबंकी ( उत्तर प्रदेश ) में हाजी वारिस अलीशाह की प्रसिद्ध दरगाह में आयोजित किया जाता है । 

झूला मेला : मथुरा , वृदावन व अयोध्या के झूले मेले प्रसिद्ध हैं , जिनमें प्रतिमाओं को सोने व चाँदी के झूलों में रखा जाता है । 

माघ मेला : यह वार्षिक मिनी कुभ मेला है जो इलाहाबाद ( उत्तर प्रदेश ) म त्रिवेणी संगम के किनारे प्रतिवर्ष माघ माह ( जनवरी ) में आयोजित  किया जाता है । 
आयुर्वेद झांसी महोत्सव , झाँसीः नवम्बर माह किया जाता है । 
गंगा महोत्सव , वाराणसी : नवम्बर माह ताज महोत्सव , 
ताज महोत्सव,   आगरा : फरवरी। 

गुजरात 

मोघेरा डांस फेस्टिवल , गुजरात : यह त्योहार गुजरात के मेहसाना जिले में मोघेरा के सूर्य मंदिर में प्रतिवर्ष जनवरी में मनाया जाता है । 

तरणेतर मेला : भाद्रपद ( अगस्त - सितम्बर ) माह के शुक्ल पक्ष में चतुर्थी . पचमी और षष्ठी के दिन गुजरात के तरणेतर गाँव में भगवान शिव की स्तुति में तरणेतर मेला लगता है । 

माधवराय मेला : भगवान कृष्ण द्वारा रुक्मिणी से विवाद के उपलक्ष्य में । चैत्र मास ( मार्च - अप्रैल ) के शुक्ल पक्ष की नवमी को पोरबंदर के पास । माधवपुर में माधवराय मेला लगता है । 

अंबाजी मेला : उत्तरी गुजरात के बनासकांठा जिले में माँ अंबा को समर्पित अंबाजी मेला आयोजित किया जाता है । अंबाजी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है । 

                अन्य मुख्य मेले एवं त्योहार 
        ( Important Fairs and Festivals ) 

श्रावणी मेला : बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मन्दिर , देवघर ( झारखण्ड ) में बाबा बैद्यनाथ ( शिव ) का यह 30 दिवसीय मेला पूरे श्रावण माह ( जुलाई व अगस्त ) में लगता है । 

कुम्भ मेला : यह आम परम्परागत भारतीय मेलों से अलग है । यह मूलतः एक धार्मिक सम्मेलन है । जो 12 वर्ष में एक बार ( महाकुम ) 4 तीर्थ स्थानों इलाहाबाद ( प्रयाग ) , उज्जैन , नासिक , हरिद्वार में बारी - बारी से आयोजित होता है । “ अर्द्धकुंभ " 6 साल में एक बार आता है । 

पुष्कर मेला : कार्तिक शुक्ला एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक ( अक्टूबर , नवम्बर ) प्रसिद्ध पुष्कर मेला आयोजित होता है । पुष्कर भारत का एकमात्र तीर्थ स्थल है । जहाँ अभी भी ब्रह्मा की पूजा होती है । पुष्कर मेला पशु मेले के लिए प्रसिद्ध है । 

गंगा दशहरा : ज्येष्ठ शुक्ला दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है । इस दिन भागीरथ गंगा नदी को पृथ्वी पर लाये थे । इस दिन गंगा का पूजन किया जाता है । 

वट सावित्री पूजाः यह त्योहार ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाया जाता है । इसमें वट वृक्ष व सावित्री की पूजा की जाती है । तथा महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं । तमिलनाडु व कर्नाटक में इसे कारादेई नोन्बू कहा जाता 

छठ पूजाः यह त्योहार बिहार , उत्तर प्रदेश व बंगाल में वर्ष में 2 बार चैत्र व कार्तिक में मनाया जाता है । छठ पूजा एकमात्र एक ऐसा त्योहार है जिसमें अस्त होते हुए सूर्य की पूजा की जाती है । इसे डाला छठ भी कहते हैं । सूर्य के साथ इस दिन छठ मइया की भी पूजा की जाती है ।
  
     By आलोक वर्मा