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*नई शिक्षा नीति*

*नई शिक्षा नीति*



*1) SSRA (State School Regulatory Authority) बनेगी जिसके चीफ शिक्षा विभाग से जुड़े होंगे।*

 

*2) 4 ईयर इंटेग्रेटेड बीएड, 2 ईयर बीएड or 1 ईयर B Ed course चलेंगें।*

 

*3) ECCE (Early Childhood Care and Education) के अंतर्गत प्री प्राइमरी शिक्षा आंगनबाड़ी ओर स्कूलों के माध्यम से।*

 

*4) TET लागू होगा up to सेकंडरी लेवल।*

 

*5) शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से हटाया जाएगा, सिर्फ चुनाव ड्यूटी लगेगी, BLO ड्यूटी से शिक्षक हटेंगे, MDM se भी शिक्षक हटेंगे।*

 

*6) स्कूलों में एसएमसी/एसडीएमसी के साथ SCMC यानी स्कूल कॉम्प्लेक्स मैनेजमेंट कमेटी बनाई जाएगी।*

 

*7) शिक्षक नियुक्ति में डेमो/स्किल टेस्ट और इंटरव्यू भी शामिल होंगे।*

 

*8) नई ट्रांसफर पॉलिसी आयेगी जिसमें ट्रांसफर लगभग बन्द हो जाएंगे, ट्रांसफर सिर्फ पदोन्नति पर ही होंगे।*

 

*9) ग्रामीण इलाकों में स्टाफ क्वार्टर बनाए जाएंगे, केंद्रीय विद्यलयों की तर्ज पर।*

 

*10) RTE को कक्षा 12 तक या 18 वर्ष की आयु तक लागू किया जाएगा।*

 

*11) मिड डे मील के साथ हैल्थी ब्रेकफास्ट भी स्कूलों में दिया जाएगा।*

 

*12) Three language based स्कूली शिक्षा होगी।*

 

*13) Foreign language course भी स्कूलों में शुरू होंगे।*

 

*14) विज्ञान ओर गणित को बढ़ावा दिया जाएगा, हर सीनियर सैकंडरी स्कूल में science or math विषय अनिवार्य होंगे।*

 

*15) स्थानीय भाषा भी शिक्षा का माध्यम होगी।*

 

*16) NCERT पूरे देश में नोडल एजेंसी होगी।*

 

*17) स्कूलों में राजनीति व सरकार का हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।*

 

*18) क्रेडिट बेस्ड सिस्टम होगा जिससे कॉलेज बदलना आसान और सरल होगा बीच मे कोई भी कॉलिज बदला जा सकता है।*

 

*19) नई शिक्षा नीति में सिर्फ बीएड इण्टर के बाद 4 वर्षीय बीएड, स्नातक के बाद 2 वर्ष बीएड, परास्नातक के बाद 1 वर्ष का बीएड कोर्स होगा।*

*प्रयास किया फिर भी त्रुटि हुई तो सुझाव दे दूर करे**🙏विज़ार्ड ऑफिसर्स जोन टीम🎯🇮🇳

 


कक्ष प्रबन्धन का अर्थ

कक्ष प्रबन्धन का अर्थ
जॉनसन एवं यूक्स का विचार - कक्षाकक्ष प्रबन्धन " एक संगठनात्मक कार्य प्रणाली , जिसमें विविध प्रकार के वातावरण में कार्य किये जाते हैं जिनके परिणामस्वरूप मन में कुछ विशेष मूल्य विकसित होते हैं जैसे कि मनुष्यों के लिए आदर , व्यक्तिगत निष्ठा , आत्म - निर्देशन , सामहिक संयोजन इत्यादि । "
अवधारणात्मक अर्थ - अवधारणात्मक दृष्टिकोण से कक्षाका प्रबन्धन को देखने में , व्यति प्रबन्धन के प्रति हाल के कुछ उपागम पहचानता है जैसे कि उद्देश्यों द्वारा प्रबन्धन , व्यवहार सुधार ( सकारात्मक और नकारात्मक पुनर्बलन ) , कार्य व्यवहार सम्बन्धी विश्लेषण और आकस्मिकता प्रबन्धन ।
कक्षाकक्ष प्रबन्धन के अर्थों में अध्यापक विभिन्न कार्य करते हैं जैसे कि योजना बनाना , व्यवस्था करना , समन्वित करना , निर्देशित करना , नियन्त्रित करना और व्यवहार का आदान - प्रदान करना ।

क्रियात्मक अर्थ - अध्यापक - छात्र सम्बन्ध के माध्यम से अधिगम को प्रेरित करने के लिए कक्षाकक्ष में क्रियाओं और कार्यकलापों की व्यवस्था का प्रबन्धन किया जाता है । कक्षाकक्ष की क्रियाओं का प्रबन्धन करने के लिए अध्यापक और छात्र मूलभूत घटक होते हैं ।
व्यवहारात्मक अर्थों में कक्षाकक्ष प्रबन्धन की परिभाषा - कक्षाकक्ष प्रबन्धन के आयामों को ध्यान में रखते हुए इसके अर्थ को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है
( 1 ) भौतिक आयाम या वातावरण - कक्षाकक्ष शैक्षिक संस्थान की कार्यात्मक इकाई है । संस्था का संस्थापक या प्रबन्धक स्थान - स्थल के सम्बन्ध में निर्णय लेता है और भवन , मैदान तथा । कक्षाकक्षों की रूपरेखा तैयार करता है । बैठने की व्यवस्था , प्रकाश और वायु की व्यवस्था , श्यामपट्ट और अन्य सुविधाएँ कक्षाकक्ष प्रबन्धन के लिए महत्वपूर्ण विषय होती है । प्रबन्धन के रूप में अध्यापक को कक्षाकक्ष के भौतिक वातावरण की इन सुविधाओं की जाँच करनी होती है जिन्हें अधिगम के लिए अनुकूल होना चाहिए ।
( 2 ) मनोवैज्ञानिक आयाम - अभिप्रेरणा अधिगम का हृदय होती है । जहाँ अभिप्रेरणा होगी वहाँ अधिगम होगा । अभिप्रेरणा के अभाव में अधिगम अर्जित नहीं किया जा सकता है । अध्यापक शाब्दिक और गैर - शाब्दिक ढंग से अपने छात्रों को अभिप्रेरित करता है । उसके द्वारा वांछनीय व्यवहार का पुनर्बलन किया जाता है । वह छात्रों की आकांक्षा का स्तर ऊपर उठाता है । कक्षाकक्ष प्रबन्धन में अध्यापक के सम्मिलन से छात्रों की सहभागिता को प्रोत्साहन मिलता है । छात्रों की सहभागिता और अधिगम में मनोवैज्ञानिक आयाम की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है ।
( 3 ) सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम - कक्षाकक्ष संस्था तथा समाज का लघु रूप होता । है । कक्षाकक्ष के वांछनीय सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण के माध्यम से उसमें नये समाज को आकार प्रदान किया जाता है । कक्षाकक्ष प्रबन्धन में सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण का सम्बन्ध शामिल होता है जो निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता . अध्यापक और छात्र सम्बन्ध , छावा म सम्बन्ध , ( iii ) अध्यापकों में सम्बन्धी अध्यापक एवं संस्थान के मुखिया के मध्य
( 4 ) नतिक आयाम - कक्षाकक्ष प्रधान का नैतिक आयाम छात्रों की भावनाओं , अभिलिया और नैतिक पहलू से सम्बन्धित है । अध्यापक कसा का नेता और अपने छात्रों के लिए आदर्श होता है । उसे अध्यापक की तरह दिखना और व्यवहार करना चाहिए । उसे कक्षाका का माहता आचरण का पालन करना चाहिए जो नैतिक होना चाहिए ।
कक्षाकक्ष प्रबन्धन के सिद्धान्त
 कक्षाकक्ष प्रबन्धन के सिद्धान्त सामान्य और विशिष्ट दोनों हैं 1 )
कक्षाकक्ष प्रबन्धन के सामान्य सिद्धान्त - सामान्य सिद्धान्तों को योजनाबद्ध ढंग से सीखा और उनका प्रयोग किया जा सकता है । सामान्य सिद्धान्तों का प्रयोग विभिन्न स्थितियों में किया जा सकता है । ये उन समस्याओं से निपटने के लिए अध्यापक को सशक्त आधार प्रदान करते है जिनके लिए विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता होती है । सामान्य सिद्धान्त निम्नलिखित पूर्व - धारणाओं के रूप में हैं –
( i ) आत्म - नियन्त्रण - अध्यापक का लक्ष्य न केवल बाहरी नियंत्रण का प्रयोग करना होता है बल्कि आन्तरिक आत्म - नियन्त्रण को भी विकसित करना होता है ।
( ii ) समझ और स्वीकृति - जब छात्र कक्षाकक्ष के नियमों को समझते हैं और उन्हें स्वीकार करते हैं तो उनके द्वारा इनका पालन किये जाने की सम्भावना अधिक रहती है ।
( iii ) मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त - अपनी रुचियों , रुझानों और योग्यताओं के अनुसार अर्थपूर्ण कार्य में लगे हुए छात्रों की अनुशासन सम्बन्धी समस्या कम होती है ।
( iv ) उत्पादक कार्य - प्रबन्धन द्वारा केवल नियन्त्रण पर बल दिये जाने की अपेक्षा उत्पादक कार्य में व्यतीत किये गये छात्रों के समय को अधिकतम करने की ओर अपना ध्यान लगाया जाना चाहिए ।
( 2 ) कक्षाकक्ष प्रबन्धन के विशिष्ट सिद्धान्त - कक्षाकक्ष प्रबन्धन के विशिष्ट सिद्धान्त निम्नलिखित पूर्व धारणाओं के रूप में है –
1.      नियोजन - स्वतन्य क्रियाओं तथा संगठित पाठों का नियोजन किया जाना चाहिए ।
2.      प्रोत्साहन - प्रयास और संकेतों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उपयुक्त व्यवहार को पुनर्बलन प्रदान किया जाना चाहिए ।
3.      जिम्मेदारी - छात्रों को स्वतन्त्र रूप से जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए ।
4.       न्यूनतम बाधा - बाधा और विलम्ब न्यूनतम होना चाहिए ।
5.      स्पष्ट नियम - जब आवश्यकता हो तो स्पष्ट नियम स्थापित किये जाने चाहिए ।
6.      परस्कार - यह निश्चित करने के लिए कि छात्रों को जानकारी हो कि क्या करना है और इसे करने के लिए वे अभिप्रेरित हों , वांछनीय व्यवहार का निश्चित रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए और ऐसे व्यवहार को पुरस्कृत किया जाना चाहिए ।
7.      अच्छा वातावरण - कक्षा में अच्छा वातावरण स्थापित किया  जाना चाहिए और समय एवं प्रयास को अधिकतम किया जाना चाहिए ।