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भारत विजय दिवस 16 दिसंबर को मनाया जा रहा, पाकिस्तान को भारत ने 1971 के युद्ध में बहुत बुरी तरह से हराया

भारत विजय दिवस 16 दिसंबर को मनाया जा रहा, पाकिस्तान को भारत ने 1971 के युद्ध में बहुत बुरी तरह से हराया
विजय दिवस 16 गठबंधन को 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत के कारण मनाया जाता है। इस युद्ध के अंत के बाद 93,000 पाकिस्तान सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया था। 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को करारी परस्त किया, जो बाद में पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र हो गया, जिसे आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। यह युद्ध भारत के लिए ऐतिहासिक और हर देशवासी के हृदय में उमंग पैदा करने वाला साबित हुआ।

 देश भर में 16 गठबंधनों को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1971 के युद्ध में करीब 3,900 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे, जबकि 9,851 घायल हो गए थे। पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तान फोर्सेस के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आके नियाजी ने भारत के पूर्वी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के लिए अलग से आत्मसमर्पण कर दिया था, जिसके बाद 17 दिसंबर को 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बना दिया गया था।

विश्व योग दिवस 21 जून 2021, मोदी जी ने किया संबोधित

विश्व योग दिवस 21 जून 2021



उत्पत्ति

औपचारिक व अनौपचारिक योग शिक्षकों और उत्साही लोगों के समूह ने 21 जून के अलावा अन्य तारीखों पर विश्व योग दिवस को विभिन्न कारणों के समर्थन में मनाया। दिसंबर 2011 में, अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी, ध्यान और योग गुरू श्री श्री रविशंकर और अन्य योग गुरुओं ने पुर्तगाली योग परिसंघ के प्रतिनिधि मण्डल का समर्थन किया और दुनिया को एक साथ योग दिवस के रूप में 21 जून को घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र को सुझाव दिया।

भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की अपील के बाद 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव को अमेरिका द्वारा मंजूरी दी, जिसके बाद सर्वप्रथम इसे 21 जून 2015 को पूरे विश्व में विश्व योग दिवस के नाम से मनाया गया।

इसके पश्चात 'योग: विश्व शान्ति के लिए एक विज्ञान' नामक सम्मेलन 4 से 5 दिसम्बर 2011 के बीच आयोजित किया गया। यह संयुक्त रूप से लिस्बन, पुर्तगाल के योग संघ, आर्ट ऑफ़ लिविंग फ़ाउण्डेशन और SVYASA योग विश्वविद्यालय, बेंगलूर के द्वारा आयोजित किया गया। जगत गुरु अमृत सूर्यानन्द के अनुसार विश्व योग दिवस का विचार वैसे तो 10 साल पहले आया था लेकिन, यह पहली बार था जब भारत की ओर से योग गुरु इतनी बड़ी संख्या में इस विचार को समर्थन दे रहे थे। उस दिन श्री श्री रवि शंकर के नेतृत्व में विश्व योग दिवस के रूप में 21 जून को संयुक्त राष्ट्र और यूनेस्को द्वारा घोषित करने के लिए हस्ताक्षर किए गए।

निम्नलिखित सदस्य उस सम्मेलन में उपस्थित थे:

श्री श्री रवि शंकर, संस्थापक, आर्ट ऑफ़ लिविंग; आदि चुन चुन गिरि मठ के श्री स्वामी बाल गंगाधरनाथ; स्वामी पर्मात्मानन्द, हिन्दू धर्म आचार्य सभा के महासचिव; बीकेएस अयंगर, राममणि आयंगर मेमोरियल योग संस्थान, पुणे; स्वामी रामदेव, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार; डॉ॰ नागेन्द्र, विवेकानन्द योग विश्वविद्यालय, बंगलुरू; जगत गुरु अमृत सूर्यानन्द महा राज, पुर्तगाली योग परिसंघ के अध्यक्ष; अवधूत गुरु दिलीपजी महाराज, विश्व योग समुदाय, सुबोध तिवारी, कैवल्यधाम योग संस्थान के अध्यक्ष; डा डी॰आर कार्तिकेयन, कानून-मानव जिम्मेदारियों व कारपोरेट मामलों के सलाहकार और डॉ॰ रमेश बिजलानी, श्री अरबिन्दो आश्रम, नई दिल्ली।

 

संयुक्त राष्ट्र की घोषणा

इस पहल को कई वैश्विक नेताओं से समर्थन मिला। सबसे पहले, नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्ताव का समर्थन किया। संयुक्त राज्य अमेरिका सहित 177 से अधिक देशों, कनाडा, चीन और मिस्र आदि ने इसका समर्थन किया है।

"अभी तक हुए किसी भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के संकल्प के लिए यह सह प्रायोजकों की सबसे अधिक संख्या है।"

 11 दिसंबर 2014 को 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से 'योग के अंतर्राष्ट्रीय दिवस' के रूप में 21 जून को मंजूरी दे दी गयी।

 

संयुक्त राष्ट्र के घोषणा करने के बाद, श्री श्री रविशंकर ने नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते है कहा:

 

"किसी भी दर्शन, धर्म या संस्कृति के लिए राज्य के संरक्षण के बिना जीवित रहना बहुत मुश्किल है। योग लगभग एक अनाथ की तरह अब तक अस्तित्व में था। अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक मान्यता योग के लाभ को विश्वभर में फैलाएगी।"

— श्री श्री रविशंकर

 

योग के महत्व पर बल देते हुए श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि योग आप को फिर से एक बच्चे की तरह बना देता है, जहाँ योग और वेदांत है वहां, कोई कमी, अशुद्धता, अज्ञानता और अन्याय नहीं है। हमें हर किसी के दरवाजे तक योग को ले जा कर दुनिया को दुखों से मुक्त कराने की आवश्यकता है।

 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बोले पीएम मोदी- कोरोना काल में उम्मीद की किरण बना योग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वह 7वें योग दिवस कार्यक्रम को कल सुबह करीब 6:30 बजे संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि कल 21 जून को हम 7वां योग दिवस मनाएंगे। इस वर्ष का विषय 'योग फॉर वेलनेस' है, जो शारीरिक और मानसिक कल्याण के लिए योग का अभ्यास करने पर केंद्रित है। 21 जून 2021  सुबह करीब साढ़े छह बजे योग दिवस कार्यक्रम को संबोधित किया ।

 

कोविड-19 महामारी के कारण अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2021 का प्रमुख कार्यक्रम एक टेलीविजन कार्यक्रम होगा। इसमें प्रधानमंत्री का संबोधन होगा। सभी दूरदर्शन चैनलों पर सुबह 6:30 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री किरेन रिजिजू का संबोधन और मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के योग प्रदर्शन का सीधा प्रसारण भी शामिल है। विदेशों में स्थित भारत के मिशन अपने-अपने देशों में 21 जून तक विभिन्न गतिविधियों का समन्वय कर रहे हैं और रिपोर्टों के अनुसार वैश्विक स्तर पर लगभग 190 देशों में योग दिवस मनाया जाएगा।

पिछले वर्षों की तरह, 21 जून 2021 को आईडीवाई अवलोकन में सुबह 7:00 बजे योग के सामंजस्यपूर्ण निरूपण/प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भाग लेने वाले व्यक्ति शामिल होंगे। लगभग 45 मिनट की अवधि के योग अभ्यासों का एक निर्दिष्ट क्रम, सामान्य योग प्रोटोकॉल (सीवाईपी) इस तरह के सामंजस्य की सुविधा प्रदान करने वाला माध्यम होगा। लाखों की संख्या में योग प्रेमी पहले ही इस गतिविधि का हिस्सा बनने के लिए खुद को प्रतिबद्ध कर चुके हैं और अपने घरों के भीतर सुरक्षित होकर योग कर रहे हैं।

 

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद योग प्रदर्शन शुरू होगा और यह सुबह 7:00 से 7:45 तक होगा। इस सीधे प्रसारित योग प्रदर्शन के बाद 15 आध्यात्मिक गुरुओं और योग गुरुओं के संदेश भी दिखाए जाएंगे। आईडीवाई का अवलोकन एक वैश्विक गतिविधि है और आम तौर पर इसकी प्रारंभिक गतिविधियां 21 जून से 3-4 महीने पहले शुरू हो जाती हैं। प्रत्येक वर्ष आईडीवाई अवलोकन के हिस्से के रूप में एक जन आंदोलन की भावना से लाखों व्यक्तियों को योग से परिचित कराया जाता है।

 


मध्य प्रदेश राज्य का इतिहास

मध्य प्रदेश का इतिहास

मुख्यमंत्री : शिवराज सिंह चौहान

क्षेत्रफल : 308245 km

जनसंख्या : 85002417

राजधानी : भोपाल

मुख्यभाषा : हिंदी

राज्य चिन्ह : click here

इतिहास और भूगोल

मध्‍य प्रदेश 30, 8,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल के साथ दूसरा सबसे बड़ा भारतीय राज्‍य है। भौगोलिक दृष्टि से यह देश में एक केन्‍द्रीय स्‍थान रखता है।

सम्राट अशोक ने सबसे पहले उज्‍जैन पर शासन किया। मध्‍य भारत का काफी बड़ा हिस्‍सा गुप्‍त साम्राज्‍य (300-500 ईसवी) का भाग था। ग्‍यारहवीं शताब्‍दी के प्रारंम्‍भ में मध्‍य भारत में मुसलमानों का आगमन हुआ। सबसे पहले महमूद गज़नवी यहां आया और फिर मुहम्‍मद गौरी आया, जिसने वहां के कुछ भागों को अपनी दिल्‍ली सल्‍तनत में मिला लिया। मध्‍य भारत मुगल साम्राज्‍य का भी हिस्‍सा रहा। मराठों का प्रभाव आरंभ होने से लेकर 1794 में माधवजी सिंधिया के देहांत तक मध्‍य भारत पर मराठों का बोलबाला रहा। परंतु उसके बाद छोटे-छोटे स्‍वतंत्र राज्‍य बनने लगे। ये छोटे राज्‍य ही आगे चलकर ब्रिटिश सत्‍ता के जमने का कारण बने।

इंदौर की रानी अहिल्‍याबाई होल्‍कर, गोंड की महारानी कमलापति और रानी दुर्गावती आदि कुछ महान महिला शासकों ने अपने उत्‍कृष्‍ट शासन के लिए भारतीय इतिहास में अपना नाम स्‍वर्णाक्षरों में लिखवा लिया। मध्‍य प्रदेश की स्‍थापना 1 नवंबर, 1956 का हुई। नया राज्‍य छत्‍तीसगढ़ बनाने के लिए हुए विभाजन के बाद यह अपने वर्तमान स्‍वरूप में 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्‍व में आया। मध्‍य प्रदेश उत्‍तर में उत्‍तर प्रदेश, पूर्व में छत्‍तीसगढ़ त‍था पश्चिम में राजस्‍थान और गुजरात, दक्षिण में महाराष्‍ट्र से घिरा है।

 

कृषि

कृषि राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था का आधार है, क्‍योंकि राज्‍य की 74.73 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और खेती पर निर्भर है। राज्‍य की करीब 49 प्रतिशत जमीन खेती योग्‍य है। 2010-11 में शुद्ध बुवाई क्षेत्र 2,08,36,000 हेक्‍टेयर रहने का अनुमान था और अनाज का कुल उत्‍पादन 171.77 मिलियन मीट्रिक टन रहा। गेहूं, चावल, दलहन जैसी प्रमुख फसलों का उत्पादन भी अच्छा रहा।

 

उद्योग और खनिज

मध्य प्रदेश ने इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, मोटरवाहनों, सूचना प्रौद्योगिकी आदि उच्च-तकनीकी उद्योगों के क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। दूरसंचार प्रणालियों के लिए यह राज्य ऑप्टिकल फाइबर का उत्पादन कर रहा है। इंदौर के पास पीथमपुर में बड़ी संख्या में मोटर-वाहन उद्योग स्थापित हुए हैं। राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उद्योग हैं—भोपाल में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लि., होशंगाबाद में सिक्योरिटी पेपर मिल, देवास में नोट छापने की प्रेस, नेपानगर में अखबारी कागज की मिल और नीमच की अल्कालॉयड फैक्ट्री। गत वर्ष राज्य में सीमेंट का उत्पादन 12.49 लाख मीट्रिक टन हुआ। पीथमपुर में जल्दी ही एक मालवाहक विमान परिसर स्थापित किया जा रहा है। भारत सरकार इंदौर में विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित कर रही है। समग्र आर्थिक विकास नीति लागू कर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए आकर्षक छूट देने के लिए औद्योगिक प्रोत्साहन नीति की घोषणा की है। भारत सरकार ने धार जिले के पीथमपुर में एक राष्ट्रीय ऑटोमोटिव परीक्षण, अनुसंधान तथा विकास परियोजना को मंजूरी दे दी है।

 

सिंचाई और बिजली

2009-10 में कुल 65.43 लाख हेक्टेयर इलाके में सिंचाई सुविधा उपलब्ध थी। मध्य प्रदेश में निम्न स्तर का कोयला प्रचुर मात्रा में होता है, जो बिजली उत्पादन के अनुकूल है। पनबिजली उत्पादन की भी यहां अपार क्षमता है। राज्य में विद्युत उत्पादन की कुल स्थापित क्षमता 9658.45 मेगावाट थी। यहां 902.5 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता के आठ पनबिजली केंद्र हैं।

 

विकास की पहल

मध्य प्रदेश ग्रामीण रोजगार योजना सभी 50 जिलों में लागू की गई है। इस योजना को लागू करने में मध्य प्रदेश प्रथम स्थान पर है। राज्य में बागवानी उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन शुरू किया गया है।

 

परिवहन

सड़कें: मध्य प्रदेश में सड़कों की कुल लंबाई 91,968 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4,280 कि.मी. और प्रांतीय राजमार्गों की लंबाई 8,729 कि.मी. है। राज्य में सड़कों के निर्माण तथा सुधार का कार्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है तथा लगभग 70 हजार कि.मी. सड़कों का निर्माण तथा सुधार किया जाएगा।

रेलवे: उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला प्रमुख रेलमार्ग मध्य प्रदेश से होकर गुजरता है। राज्य में भोपाल, बीना, ग्वालियर, इंदौर, इटारसी, जबलपुर, कटनी, रतलाम और उज्जैन मुख्य जंक्शन हैं। रेलवे के क्षेत्रीय मुख्यालय भोपाल, रतलाम और जबलपुर में हैं।

 

त्‍योहार

मध्य प्रदेश में कई त्योहार और उत्सव मनाए जाते हैं। आदिवासियों का एक महत्वपूर्ण त्योहार भगोरिया है, जो परंपरागत हर्षोल्लास से मनाया जाता है। खजुराहो, भोजपुर, पचमढ़ी और उज्जैन में शिवरात्रि के पर्व के दौरान स्थानीय परंपराओं का रंग दिखाई देता है। चित्रकूट और ओरछा में रामनवमी पर्व के आयोजन की अनोखी परंपरा है। ओरछा, मालवा और पचमढ़ी के उत्सवों में कला और संस्कृति का बड़ा सुंदर मेल दिखाई देता है। ग्वालियर के तानसेन संगीत समारोह, मैहर के उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत समारोह, उज्जैन के कालिदास समारोह और खजुराहो के नृत्य समारोह मध्य प्रदेश के कुछ प्रसिद्ध कला उत्सव हैं। जबलपुर में संगमरमर की चट्टानों के लिए मशहूर भेड़ाघाट में वार्षिक नर्मदा उत्सव की शुरुआत की गई है। शिवपुरी में भी शिवपुरी उत्सव शुरू किया गया है।

 


भारतं के सभी राज्यों के प्रथम मुख्यमंत्रियों के नाम

भारतं के सभी राज्यों के प्रथम मुख्यमंत्रियों के नाम 




  • जम्मू एवं कश्मीर - गुलाम मोहम्मद सद्दीक
  • हरियाणा - भगवत दयाल शर्मा
  • हिमाचल प्रदेश - यशवंत सिंह परमार
  • पंजाब - डॉ॰ गोपीचन्द भार्गव
  • दिल्ली - चौधरी ब्रह्म प्रकाश
  • उत्तराखण्ड - नित्यानन्द स्वामी
  • राजस्थान - हीरालाल शास्त्री
  • उत्तर प्रदेश - गोविन्द वल्लभ पन्त
  • बिहार - श्री कृष्ण सिन्हा
  • झारखण्ड - बाबूलाल मरांडी
  • पश्चिम बंगाल - प्रफुल्ल चन्द्र घोष
  • ओडिशा - हरेकृष्णा महतब
  • छत्तीसगढ़ - अजीत जोगी
  • मध्य प्रदेश - पं. रविशंकर शुक्ल
  • गुजरात - डॉ॰ जीवराज नारायण मेहता
  • महाराष्ट्र -- यशवन्त राव चव्हाण
  • गोवा -- दयानंद बांदोडकर
  • आंध्र प्रदेश -- नीलम संजीव रेड्डी
  • तमिलनाडु -- पी.एस. कुमारस्वामी राजा
  • केरल -- इ.एम.एस. नंबूदिरीपाद
  • असम -- गोपीनाथ बारदलोई
  • मणिपुर -- एम. कोइरंग सिंह
  • मेघालय -- डब्ल्यू. ए. संगमा
  • सिक्किम -- के.एल. दोरजी खंगसरपा
  • नागालैण्ड -- पी. शैलू ओ
  • अरुणाचल प्रदेश -- प्रेमखाण्डू थंगन
  • मिजोरम -- एल. चल छंगा

अफगानिस्तान ( Country in South Asia )

  

अफगानिस्तान (  Country in South Asia )

 

अध्यक्ष

अशरफ़ ग़नी ट्रेंडिंग

राजधानी

काबुल

जनसंख्या

3.72 करोड़ (2018) विश्व बैंक

मुद्रा

अफगान अफ़गानी

आधिकारिक भाषा

पश्तो, दारी


Flag of Afghanistan ( National gflag )



अफगानिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज में केंद्र में शास्त्रीय राष्ट्रीय प्रतीक के साथ एक ऊर्ध्वाधर तिरंगा होता है। वर्तमान ध्वज को 19 अगस्त, 2013 को अपनाया गया था, लेकिन 20 वीं शताब्दी के अधिकांश समय में इसी तरह के डिजाइन का उपयोग किया गया था।

" अफगानिस्तान, आधिकारिक तौर पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान, मध्य और दक्षिण एशिया के चौराहे पर स्थित देश है। अफगानिस्तान पूर्व और दक्षिण में पाकिस्तान द्वारा सीमाबद्ध है; पश्चिम में ईरान; उत्तर में तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, और ताजिकिस्तान; और उत्तर पूर्व में चीन। "


हिन्दू राष्ट्र था अफगानिस्तान  

अफगानिस्तान की पहचान इन दिनों आतंकवाद और तालिबान से है, लेकिन एक समय था जब अफगानिस्तान की पहचान एक हिंदू राष्ट्र के रूप में थी। अफगान शब्द को संस्कृत भाषा अवन से लिया गया है। यह देश 7 वीं शताब्दी तक एकजुट भारत का हिस्सा था। एक समय पर, बौद्ध धर्म यहाँ पनपा और अब यह एक इस्लामिक राष्ट्र के रूप में पहचाना जाता है। 17 वीं शताब्दी की शुरुआत तक अफगानिस्तान का नाम भी नहीं था। महाभारत काल में गांधार महाजनपद अपने उत्तरी क्षेत्र में था, जिसके कारण इसकी राजधानी कंधार कहलाती थी। इसके अलावा, आर्याना, कंबोज आदि क्षेत्र इसमें शामिल थे।

कभी भारत का हिस्सा और हिन्दू राष्ट्र था अफगानिस्तान

 

गजनी ने किया बर्बाद

गांधारी और पाणिनी यहीं के रहने वाले थे। अभी भी अफगानिस्तान में बच्चों के नाम कनिष्क, आर्यन और वेद आदि रखे जाते हैं। यहां पहले आर्य रहा करते थे जो वैदिक धर्म को मानते थे। अफगानिस्तान, यूनानी और मौर्य साम्राज्य का भी हिस्सा रहा। बौद्ध धर्म जब यहां पहु्चा तो यह स्थान उनका गढ़ बन गया। आपको ध्यान होगा कि बमियान घाटी में 2001 में तालिबान ने बुद्ध की जो प्रतिमा तोड़ी थी वह दुनिया की सबसे बड़ी बुद्ध प्रतिमा थी। अभी भी वहां स्तूपों, मंदिरों और मूर्तियों के अवशेष मिल जाते हैं। महमूद गजनी ने अफगानिस्तान की सभ्यता को बर्बाद किया और तलवार के बल पर धर्म परिवर्तन कराया।

 

सिख और हिन्दू परेशान

इन दिनों वहां रहने वाले सिख और हिन्दू बेहद परेशान हैं। रायटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1992 में यहां हिन्दुओं और सिखों के दो लाख 20 बजार परिवार थे, लेकिन इन दिनों यह संख्या 220 रह गई है। वहां हिन्दुओं को शव जलाने नहीं दिए जाते। वहां के स्थानीय हिन्दू और सिख अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

 

“ 6 मई 1739 को दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह अकबर ने ईरान के नादिर शाह से संधि कर उपगण स्थान अफगानिस्तान उसे सौंप दिया था।

17वीं सदी तक अफगानिस्तान नाम का कोई राष्ट्र नहीं था। अफगानिस्तान नाम का विशेष-प्रचलन अहमद शाह दुर्रानी के शासन-काल (1747-1773) में ही हुआ। इसके पूर्व अफगानिस्तान को आर्याना, आर्यानुम्र वीजू, पख्तिया, खुरासान, पश्तूनख्वाह और रोह आदि नामों से पुकारा जाता था जिसमें गांधार, कम्बोज, कुंभा, वर्णु, सुवास्तु आदि क्षेत्र थे। “


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