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क्या होता है इथेनॉल फ्यूल? जानिये इसके फायदे और नुकसान

क्या होता है इथेनॉल फ्यूल? जानिये इसके फायदे और नुकसान

 


अब चावल, गेहूं, जौ, मक्का और ज्वार से बनेगा इथेनॉल, जानें, क्या है इथेनॉल और किस काम आता है?

    इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाडिय़ों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इथेनॉल का उत्पादन यूं तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है। इससे खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है। इसके अलावा इसका उपयोग वार्निश, पालिश, दवाओं के घोल तथा निष्कर्ष, ईथर, क्लोरोफ़ार्म, कृत्रिम रंग, पारदर्शक साबुन, इत्र तथा फल की सुगंधों का निष्कर्ष और अन्य रासायनिक यौगिक बनाने में होता है। पीने के लिए विभिन्न मदिराओं के रूप में, घावों को धोने में जीवाणुनाशक के रूप में तथा प्रयोगशाला में घोलक के रूप में इसका उपयोग होता है। पीने को औषधियों में यह डाला जाता है और मरे हुए जीवों को संरक्षित रखने में भी इसका उपयोग होता है।

     

     

    ऐसे बनता है इथेनॉल

    इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इथेनॉल का उत्पादन यूं तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है। इससे खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है। भारतीय परिपेक्ष्य में देखा जाए तो इथेनॉल ऊर्जा का अक्षय स्रोत है क्योंकि भारत में गन्ने की फसल की कमी कभी नहीं हो सकती |

    इथेनॉल दो विधियों से तैयार किया जाता है। इसमें पहली संश्लेषण विधि व दूसरी किण्वीकरण विधि है।

     

    संश्लेषण विधि- एथिलीन गैस को सांद्र सल्फ्य़ूरिक अम्ल में शोषित कराने से एथिल हाइड्रोजन सल्फ़ेट बनता है जो जल के साथ उबालने पर उद्धिघटित (हाइड्रोलाइज़) होकर एथिल ऐल्कोहल देता है। इस विधि का प्रचलन अभी अधिक नहीं है।

    किण्वीकरण विधि- इसके द्वारा किसी भी शक्करमय पदार्थ (गन्ने की शक्कर, ग्लूकोस, शोरा, महुए का फूल आदि) या स्टार्चमय पदार्थ (आलू, चावल, जौ, मकई आदि) से ऐल्कोहल व्यापारिक मात्रा में बनाते हैं।

     

    इथेनॉल की कीमत / इथेनॉल Price

    माह अक्टूबर 2020 को सरकार ने इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। इसके अनुसार सी हैवी शीरे से बने इथेनॉल की कीमत 43.75 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 45.69 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है। जबकि बी हैवी शीरे से बने इथेनॉल की कीमत 54.27 रुपए प्रति लीटर से बढक़र 57.61 रुपए प्रति लीटर और गन्ना रस से बने इथेनॉल की कीमत 59.48 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 62.65 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है।

    क्या हैं इथेनॉल के फायदें

    इथेनॉल के इस्तेमाल से 35 फीसदी कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। इतना ही नहीं यह कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन और सल्फर डाइऑक्साइड को भी कम करता है। इसके अलावा इथेनॉल हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को भी कम करता है। इथेनॉल में 35 फीसदी फीसद ऑक्सीजन होता है। इथेनॉल फ्यूल को इस्तेमाल करने से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है।

     

    हमें क्यों है इथेनॉल फ्यूल की जरूरत

    इथेनॉल इको-फ्रैंडली फ्यूल है और पर्यावरण को जीवाश्म ईंधन से होने वाले खतरों से सुरक्षित रखता है। इस फ्यूल को गन्ने से तैयार किया जाता है। कम लागत पर अधिक ऑक्टेन नंबर देता है और MTBE जैसे खतरनाक फ्यूल के लिए ऑप्शन के रूप में काम करता है। यह इंजन की गर्मी को भी बाहर निकलता है। एल्कोहल बेस्ड फ्यूल गैसोलीन के साथ मिलकर ई 85 तक तैयार हो गया। कहने का मतलब इथेनॉल फ्यूल हमारे पर्यावरण और गाड़ियों के लिए सुरक्षित है।

     

    ब्राजील में क्यों होता है सबसे ज्यादा इस्तेमा

    ब्राजील में लगभग 40 प्रतिशत गाड़ियां 100 फीसदी इथेनॉल से चलती हैं, यही नहीं बाकी गाड़ियां भी 24 फीसदी इथेनॉल मिला ईंधन उपयोग कर रही हैं। ब्राजील जैसे देश के लिए यह करना आसान इसलिए हुआ क्योंकि उनके पास भारत से तीन गुना जमीन और आबादी उत्तर प्रदेश जितनी है। स्वीडन और कनाडा में भी इथेनॉल पर गाड़ियां चल रही है। कनाडा में तो इथेनॉल के इस्तेमाल पर सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जा रही है।

     

    नुकसान

    अगर इथेनॉल की डिमांड बढ़ी तो गन्ने की फसल पर ज्यादा फोकस होगा गन्ने की खेती में पानी काफी लगता है और फिलहाल सिंचाई की व्यवस्था अभी भी उतनी बेहतर नहीं है। ऐसे में बैलेंस बनाकर चलना होगा।

     


    भारत में इथेनॉल के उत्पादन को लेकर लिए गए फैसले की मुख्य बातें

    1.    सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक 2030 तक पेट्रोल में इथेनॉल के 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए और रसायन एवं अन्य क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 1,400 करोड़ लीटर एल्कोहल/इथेनॉल की जरूरत होगी।

    2.    इसमें से 1,000 करोड़ लीटर की जरूरत 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए और 400 करोड़ लीटर की जरूरत रसायन एवं अन्य क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए होगी।

    3.    इस 1,400 करोड़ लीटर की कुल जरूरत में से 700 करोड़ लीटर की आपूर्ति चीनी उद्योग और 700 करोड़ लीटर की आपूर्ति अनाज आधारित भट्टियों को करनी होगी। इससे लगभग 175 लाख मीट्रिक टन अनाज का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

    4.    चीनी उद्योग द्वारा 700 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करने के लिए करीब 60 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे अतिरिक्त चीनी भंडार की समस्या का समाधान होगा, अतिरिक्त चीनी के भंडारण की समस्या से चीनी उद्योग को निजात मिलेगी और चीनी मिलों की राजस्व वसूली बढ़ेगी। इससे वे गन्ना किसानों को उनके बकाये का समय पर भुगतान कर सकेंगी।

    5.    गन्ना और इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से तीन राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में होता है। इन तीन राज्यों से इथेनॉल को दूरदराज के अन्य राज्यों में ले जाने पर भारी परिवहन खर्च आता है।

    6.    देशभर में नई अनाज आधारित भट्टियां स्थापित करने से देश के अलग-अलग भागों में इथेनॉल का वितरण संभव हो सकेगा और इससे इसके परिवहन पर आने वाला भारी खर्च भी बचाया जा सकेगा।

    7.    आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि निम्न श्रेणियों को इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की एक संशोधित योजना लाई जाए।

    8.    इथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज आधारित भट्टियों की स्थापना करना/मौजूदा अनाज आधारित भट्टियों का विस्तार करना, लेकिन इस योजना के लाभ केवल उन्हीं भट्टियों को मिलेंगे, जो अनाजों की सूखी पिसाई की प्रक्रिया (ड्राई मीलिंग प्रोसेस) का इस्तेमाल करेंगी।

    9.    इथेनॉल उत्पादन के लिए गुड़ शीरा आधारित नई भट्टियों की स्थापना/मौजूदा भट्टियों का विस्तार (चाहे वे चीनी मिलों से संबद्ध हो या उनसे अलग हो) और चाहे केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा शून्य तरल डिस्चार्ज (जेडएलडी) को हासिल करने के लिए स्वीकृत कोई भी अन्य तरीका कायम करना हो।

    10.                       इथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज और शीरा दोनों का दोहरा इस्तेमाल करने वाली नयी भट्टियां स्थापित करना और पहले से संचालित भट्टियों का विस्तार करना।

    11.                       मौजूदा गुड़ शीरा आधारित भट्टियों (चाहे चीनी मिलों से संबद्ध हो या पृथक हो) को दोहरे इस्तेमाल (गुड़ शीरा और अनाज/कोई भी अन्य खाद्यान्न) में बदलना और अनाज आधारित भट्टियों को भी दोहरे इस्तेमाल वाली भट्टियों में बदलना।

    12.                       चुकन्दर, ज्वार और अनाज आदि जैसे अन्य खाद्यान्न से इथेनॉल निकालने के लिए नई भट्टियां स्थापित करना/मौजूदा भट्टियों का विस्तार करना।

    13.                       मौजूदा भट्टियों में संशोधित स्प्रिट को इथेनॉल में बदलने के लिए मॉलिक्यूलर सीव डीहाईड्रेशन (एमएसडीएच) कॉलम स्थापित करना। 

    विश्व योग दिवस 21 जून 2021, मोदी जी ने किया संबोधित

    विश्व योग दिवस 21 जून 2021



    उत्पत्ति

    औपचारिक व अनौपचारिक योग शिक्षकों और उत्साही लोगों के समूह ने 21 जून के अलावा अन्य तारीखों पर विश्व योग दिवस को विभिन्न कारणों के समर्थन में मनाया। दिसंबर 2011 में, अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी, ध्यान और योग गुरू श्री श्री रविशंकर और अन्य योग गुरुओं ने पुर्तगाली योग परिसंघ के प्रतिनिधि मण्डल का समर्थन किया और दुनिया को एक साथ योग दिवस के रूप में 21 जून को घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र को सुझाव दिया।

    भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की अपील के बाद 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के प्रस्ताव को अमेरिका द्वारा मंजूरी दी, जिसके बाद सर्वप्रथम इसे 21 जून 2015 को पूरे विश्व में विश्व योग दिवस के नाम से मनाया गया।

    इसके पश्चात 'योग: विश्व शान्ति के लिए एक विज्ञान' नामक सम्मेलन 4 से 5 दिसम्बर 2011 के बीच आयोजित किया गया। यह संयुक्त रूप से लिस्बन, पुर्तगाल के योग संघ, आर्ट ऑफ़ लिविंग फ़ाउण्डेशन और SVYASA योग विश्वविद्यालय, बेंगलूर के द्वारा आयोजित किया गया। जगत गुरु अमृत सूर्यानन्द के अनुसार विश्व योग दिवस का विचार वैसे तो 10 साल पहले आया था लेकिन, यह पहली बार था जब भारत की ओर से योग गुरु इतनी बड़ी संख्या में इस विचार को समर्थन दे रहे थे। उस दिन श्री श्री रवि शंकर के नेतृत्व में विश्व योग दिवस के रूप में 21 जून को संयुक्त राष्ट्र और यूनेस्को द्वारा घोषित करने के लिए हस्ताक्षर किए गए।

    निम्नलिखित सदस्य उस सम्मेलन में उपस्थित थे:

    श्री श्री रवि शंकर, संस्थापक, आर्ट ऑफ़ लिविंग; आदि चुन चुन गिरि मठ के श्री स्वामी बाल गंगाधरनाथ; स्वामी पर्मात्मानन्द, हिन्दू धर्म आचार्य सभा के महासचिव; बीकेएस अयंगर, राममणि आयंगर मेमोरियल योग संस्थान, पुणे; स्वामी रामदेव, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार; डॉ॰ नागेन्द्र, विवेकानन्द योग विश्वविद्यालय, बंगलुरू; जगत गुरु अमृत सूर्यानन्द महा राज, पुर्तगाली योग परिसंघ के अध्यक्ष; अवधूत गुरु दिलीपजी महाराज, विश्व योग समुदाय, सुबोध तिवारी, कैवल्यधाम योग संस्थान के अध्यक्ष; डा डी॰आर कार्तिकेयन, कानून-मानव जिम्मेदारियों व कारपोरेट मामलों के सलाहकार और डॉ॰ रमेश बिजलानी, श्री अरबिन्दो आश्रम, नई दिल्ली।

     

    संयुक्त राष्ट्र की घोषणा

    इस पहल को कई वैश्विक नेताओं से समर्थन मिला। सबसे पहले, नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्ताव का समर्थन किया। संयुक्त राज्य अमेरिका सहित 177 से अधिक देशों, कनाडा, चीन और मिस्र आदि ने इसका समर्थन किया है।

    "अभी तक हुए किसी भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के संकल्प के लिए यह सह प्रायोजकों की सबसे अधिक संख्या है।"

     11 दिसंबर 2014 को 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से 'योग के अंतर्राष्ट्रीय दिवस' के रूप में 21 जून को मंजूरी दे दी गयी।

     

    संयुक्त राष्ट्र के घोषणा करने के बाद, श्री श्री रविशंकर ने नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते है कहा:

     

    "किसी भी दर्शन, धर्म या संस्कृति के लिए राज्य के संरक्षण के बिना जीवित रहना बहुत मुश्किल है। योग लगभग एक अनाथ की तरह अब तक अस्तित्व में था। अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक मान्यता योग के लाभ को विश्वभर में फैलाएगी।"

    — श्री श्री रविशंकर

     

    योग के महत्व पर बल देते हुए श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि योग आप को फिर से एक बच्चे की तरह बना देता है, जहाँ योग और वेदांत है वहां, कोई कमी, अशुद्धता, अज्ञानता और अन्याय नहीं है। हमें हर किसी के दरवाजे तक योग को ले जा कर दुनिया को दुखों से मुक्त कराने की आवश्यकता है।

     

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बोले पीएम मोदी- कोरोना काल में उम्मीद की किरण बना योग

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वह 7वें योग दिवस कार्यक्रम को कल सुबह करीब 6:30 बजे संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि कल 21 जून को हम 7वां योग दिवस मनाएंगे। इस वर्ष का विषय 'योग फॉर वेलनेस' है, जो शारीरिक और मानसिक कल्याण के लिए योग का अभ्यास करने पर केंद्रित है। 21 जून 2021  सुबह करीब साढ़े छह बजे योग दिवस कार्यक्रम को संबोधित किया ।

     

    कोविड-19 महामारी के कारण अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2021 का प्रमुख कार्यक्रम एक टेलीविजन कार्यक्रम होगा। इसमें प्रधानमंत्री का संबोधन होगा। सभी दूरदर्शन चैनलों पर सुबह 6:30 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री किरेन रिजिजू का संबोधन और मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के योग प्रदर्शन का सीधा प्रसारण भी शामिल है। विदेशों में स्थित भारत के मिशन अपने-अपने देशों में 21 जून तक विभिन्न गतिविधियों का समन्वय कर रहे हैं और रिपोर्टों के अनुसार वैश्विक स्तर पर लगभग 190 देशों में योग दिवस मनाया जाएगा।

    पिछले वर्षों की तरह, 21 जून 2021 को आईडीवाई अवलोकन में सुबह 7:00 बजे योग के सामंजस्यपूर्ण निरूपण/प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भाग लेने वाले व्यक्ति शामिल होंगे। लगभग 45 मिनट की अवधि के योग अभ्यासों का एक निर्दिष्ट क्रम, सामान्य योग प्रोटोकॉल (सीवाईपी) इस तरह के सामंजस्य की सुविधा प्रदान करने वाला माध्यम होगा। लाखों की संख्या में योग प्रेमी पहले ही इस गतिविधि का हिस्सा बनने के लिए खुद को प्रतिबद्ध कर चुके हैं और अपने घरों के भीतर सुरक्षित होकर योग कर रहे हैं।

     

    प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद योग प्रदर्शन शुरू होगा और यह सुबह 7:00 से 7:45 तक होगा। इस सीधे प्रसारित योग प्रदर्शन के बाद 15 आध्यात्मिक गुरुओं और योग गुरुओं के संदेश भी दिखाए जाएंगे। आईडीवाई का अवलोकन एक वैश्विक गतिविधि है और आम तौर पर इसकी प्रारंभिक गतिविधियां 21 जून से 3-4 महीने पहले शुरू हो जाती हैं। प्रत्येक वर्ष आईडीवाई अवलोकन के हिस्से के रूप में एक जन आंदोलन की भावना से लाखों व्यक्तियों को योग से परिचित कराया जाता है।

     


    World Blood Donor Day 2021 : विश्व रक्तदान दिवस का उद्देश्य, थीम और इसके फायदे

     

    World Blood Donor 14 June Day 2021 :

    विश्व रक्तदान दिवस का उद्देश्य, थीम और इसके फायदे

     

    आज पूरी दुनिया में विश्व रक्तदान दिवस यानी वर्ल्ड ब्लड डोनर डे (World Blood Donor Day 2021) मना रही है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनिया में जरूरत के मुताबिक खून उपलब्ध करवाना है।

     


    वर्ल्ड ब्लड डोनर डे का उद्देश्य

    साल 2004 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (World Health Organization) ने विश्व रक्तदान दिवस की शुरुआत की थी। दुनियाभर में खून की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जाता है। नोबल प्राइस विजेता कार्ल लैंडस्टेनर (Karl Landsteiner) को ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम खोजने का श्रेय जाता है। 14 जून को कार्ल लैंडस्टेनर की बर्थ एनिवर्सरी मनाई जाती है। कई बार समय पर मरीजों को खून नहीं मिलता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है। ऐसे में रक्तदाताओं के द्वारा दिए गए रक्त उन मरीजों के लिए जीवनदान बन जाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अपने देश में खून की कमी से हर साल करीब 1.36 लाख महिलाओं की मौत हो जाती है। जो पूरी दुनिया में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान हुई मौतों का 25.7 प्रतिशत है।

     

    विश्व रक्तदान दिवस की थीम

    डब्ल्यूएचओ के अनुसार, विश्व रक्तदान दिवस 2021 की इटली अपने राष्ट्रीय रक्त केंद्र (एनबीसी) के माध्यम से करेगा। हर साल विश्व रक्तदान दिवस के लिए एक नई थीम रखी जाती है। इस बार इसकी थीम 'रक्त दो और दुनिया को धड़काते रहो' (Give Blood And Keep The World Beating) रखी गई है। इस संदेश के तहत लोगों की जिंदगी बचाने और दूसरों के स्वास्थ्य सुधार में सहयोग करके दुनिया को स्पंदित बनाए रखने के लिए रक्तदाओं के महत्वपूर्ण योगदान पर जोर दिया गया है।

     


    रक्तदान करने के फायदे...

    1.

    1.     डेढ़ पाव खून का दान करने से आपके शरीर से 650 कैलोरीज कम होती है।

    2.     वजन कम करने में खून का दान करने से मदद मिलती है। इसीलिए साल 2 बार रक्तदान करना चाहिए।

    3.     आइरन की मात्रा को बैलेंस करने से लिवर हेल्दी बनता है और कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।

    4.     रक्तदान से शरीर में एनर्जी आती है। क्योंकि दान के बाद नए ब्लड सेल्स बनते हैं, जिससे शरीर में तंदरूस्ती आती है।

    5.     रक्तदान से खून का थक्का नहीं जमता, इससे खून कुछ मात्रा में पतला हो जाता है और हार्ट अटैक की संभावनाएं कम होती है।

    6.     खून डोनेट करने से लिवर से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है। शरीर में ज़्यादा आइरन की मात्रा लिवर पर दवाब डालती है और रक्तदान से आइरन की मात्रा बैलेंस हो जाती है।

     


    भारत के प्रमुख शोध-संस्थानों के नाम और उनके स्थानों की सूची

     

    भारत के प्रमुख शोध-संस्थानों के नाम और उनके स्थानों की सूची

     

    1.  भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान – नई दिल्ली

    2.  केंद्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान – कोयंबटूर

    3.  केंद्रीय तंबाकू अनुसंधान संस्थान – राजमुंदरी

    4.  भारतीय चीनी तकनीकी संस्थान – कानपुर

    5.  राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान – करनाल

    6.  केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान – चेन्नई

    7.  केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान – लखनऊ

    8.  भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान – नई दिल्ली

    9.  रमण अनुसंधान संस्थान – बंगलुरु

    10. राष्ट्रीय धातु विज्ञान प्रयोगशाला – जमशेदपुर

    11. कपड़ा उद्योग अनुसंधान संस्थान – अहमदाबाद

    12. राष्ट्रीय प्रतिरोधक विज्ञान संस्थान – नई दिल्ली

    13. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र – ट्रांबे

    14. भारतीय पेट्रोलियम संस्थान – देहरादून

    15. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान – नई दिल्ली

    16. टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च – मुंबई

    17. इंडियन सिक्योरिटी प्रेस – नासिक रोड, पुणे

    18. केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान – मैसूर

    19. केंद्रीय भवन निर्माण अनुसंधान संस्थान – रुड़की

    20. केंद्रीय कांच तथा मृतिका अनुसंधान संस्थान – कोलकाता

    21. केंद्रीय विधुत रासायनिक अनुसंधान संस्थान – कराईकुडी

    22. केंद्रीय यांत्रिक इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान – दुर्गापुर

    23. केंद्रीय नमक और समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान – भावनगर

    24. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण – नई दिल्ली

    25. राष्ट्रीय भू भौतिकी अनुसंधान संस्थान – हैदराबाद

    26. केंद्रीय नारियल अनुसंधान संस्थान – कासरगोड

    27. केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान – शिमला

    28. दृष्टि विकलांग हेतु राष्ट्रीय संस्थान – देहरादून

    29. केंद्रीय वन अनुसंधान संस्थान – देहरादून

    30. भारतीय लाह अनुसंधान संस्थान – रांची

    31. केंद्रीय ईंधन अनुसंधान संस्थान – जलगोडा

    32. केंद्रीय खनन अनुसंधान केंद्र – धनबाद

    33. भारतीय सर्वेक्षण विभाग – देहरादून

    34. भारतीय मौसम वेधशाला – पुणे

    35. जीवाणु प्रौद्योगिकी संस्थान – चंडीगढ़

    36. प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान – गांधीनगर

    37. भारतीय भू-चुंबकीय संस्थान – मुंबई

    38. भारतीय खगोल संस्थान – बंगलुरु

    39. राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान – पणजी

    40. डीजल लोकोमोटिव वर्क्स – वाराणसी

    41. केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान – नई दिल्ली

    42. केंद्रीय ट्रैक्टर संस्थान – नई दिल्ली

    43. केंद्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान – लखनऊ

    44. भारतीय रासायनिक जैविक संस्थान – कोलकाता

    45. उच्च अक्षांश अनुसंधान प्रयोगशाला – गुलमर्ग

    46. केंद्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान – नागपुर

    47. औद्योगिक विष विज्ञान अनुसंधान – लखनऊ

    48. कोशिकीय तथा आणविक जीव विज्ञान केंद्र – हैदराबाद

    49. भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग – कोलकाता

    50. केंद्रीय सूट प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान – कोलकाता

    51. सेंटर फॉर डी.एन.ए. फिंगर प्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स – हैदराबाद

    52. राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र – गुडगांव

    53. भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड – जलाहली

    54. केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान – कटक

    55. भारतीय दलहन शोध संस्थान – कानपुर

     


     

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