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वैश्विक परिवार दिवस 1 जनवरी को प्रति वर्ष मनाया जाता है

वैश्विक परिवार दिवस Global Family Day


वैश्विक परिवार दिवस हर साल 1 जनवरी को मनाया जाता है।
वैश्विक परिवार दिवस को वैश्विक शांति और साझाकरण के वैश्विक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इसे 2000 में शुरू किया गया था।

दिन का उद्देश्य बहुसंस्कृतिवाद, बहुलवाद को बढ़ावा देना है और यह सिखाता है कि शांति और सद्भाव में एक-दूसरे के साथ कैसे सह-अस्तित्व है।
यह दिन दुनिया के एक वैश्विक परिवार के विचार को बढ़ावा देता है।

वैश्विक परिवार दिवस का उद्देश्य क्या है ?

उद्देश्य विश्व शांति है। इस दिन परिवार को लोग साथ आयें और एकजुट समाज की रचना करें, यही इस दिवस का उद्देश्य है।

वैश्विक परिवार दिवस का इतिहास

वैश्विक परिवार दिवस की शुरुआत कब हुई इस बारे में प्रमाण नहीं है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने 1997 में इस दिवस को मनाने की घोषणा की और इसे पीस और शेयरिंग डे बताया।
• बहुत से लोग मानते हैं कि इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा की घोषणा के साथ होती है, जो 1997 में विश्व के बच्चों के लिए शांति और अहिंसा की संस्कृति के लिए अंतर्राष्ट्रीय दशक की शुरुआत करती है।
शांति में एक दिन का उत्सव (One Day of Peace and sharing) परिणामस्वरूप, वैश्विक परिवार दिवस की शुरुआत हुई । इसलिए इस दिन को वन डे ऑफ पीस एंड शेयरिंग के नाम से भी जाना जाता है।, इस प्रकार, स्थानीय और विश्व स्तर पर शांति को कैसे बढ़ावा दिया जाता है, इसे पहचानने के लिए वर्ष के पहले दिन को वैश्विक परिवार दिवस रूप में मनाया जाता है।
• 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की घोषणा "शांति का एक दिन" विषय के साथ शुरू हुई, जिसे तब हर साल के पहले दिन मनाया जाता था।

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस 15 मई

विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 15 मई को ' अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस' (IDF) मनाया जाता है। इस दिवस के आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच पारिवारिक संबंधों के महत्त्व को उजागर करना है। ज्ञात हो कि परिवार समाज के निर्माण की मूलभूत इकाई है और यह एक व्यक्ति के जीवन में सर्वाधिक महत्त्व रखता है।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस आम जनमानस के बीच परिवारों से संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने और संबंधों को प्रभावित करने वाले सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय कारकों के बारे में समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस की थीम

• वर्ष 2021 के लिये इस दिवस का थीम है- 'परिवार और नई प्रौद्योगिकियाँ'। यह थीम परिवार और पारिवारिक संबंधों पर नई प्रौद्योगिकियों के प्रभाव पर केंद्रित है।

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस शुरुआत

• गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बुनियादी परिवार प्रणाली के महत्त्व को महसूस करते हुए वर्ष 1993 में 15 मई को 'अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस' के रूप में घोषित किया और सबसे पहले इसे 15 मई, 1994 को मनाया गया था।

कंप्यूटर से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न

 

 

कंप्यूटर से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न

 

 

 

सवाल: नास्कॉम ( NASSCOM ) का पूरा नाम क्या है?

जवाब: नैशनल असोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विसेज कंपनीज

सवाल: विश्व की प्रथम वर्चुअल समाचार वाचिका का नाम क्या है?

जवाब: एनानोवा

सवाल: विकलांगों के लिए विशेष रूप से बनाए गए कंप्यूटर का नाम क्या है?

जवाब: आल राइट

सवाल: विश्व में सबसे कम उम्र के वेब डिजाइनर होने का गौरव किसने प्राप्त किया?

जवाब: अजयपुरी

सवाल: सेंटर फॉर डिवेलपमेंट ऑफ अडवांस कंप्यूटिंग ( सी-डेक ) का मुख्यालय कहां हैं?

जवाब: पुणे में

सवाल: दुनिया की पहली महिला कंप्यूटर प्रोग्रामर कौन हैं?

जवाब: एडा ऑगस्टा ( अमेरिका )

सवाल: इंटरनेट से जुड़ने वाला पहला हिंदू तीर्थस्थल कौन सा है?

जवाब: वैष्णो देवी मंदिर (जम्मू)

सवाल: भारत में खोजे गए पहले कंप्यूटर वायरस का नाम क्या है?

जवाब: सी ब्रेन

सवाल: वाई टू के की समस्या से प्रभावित विश्व का एकमात्र देश कौन सा था?

जवाब: जांबिया

सवाल: देश का पहला राज्य कौन सा है, जिसके सभी विकास खंडों को कंप्यूटर नेटवर्क से जोड़ दिया गया है?

जवाब: आन्ध्र प्रदेश

सवाल: 'वाई टू के' का विस्तृत रूप क्या है?

जवाब: ईयर टू थाउजेंड

सवाल: न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली भारत की पहली सॉफ्टवेयर कंपनी सी है?

जवाब: सिल्वर लाइन टेक्नोलॉजीज (मुंबई)

सवाल: इंडियन इंस्टिटयूट ऑफ इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी का मुख्यालय कहां है?

जवाब: हैदराबाद ( आन्ध्र प्रदेश )

सवाल: देश की पहली क्षेत्रीय भाषा कौन सी है, जिसका कीबोर्ड उसकी अपनी भाषा में है?

जवाब: तमिल

सवाल: 'परम पदम' सुपर कंप्यूटर का विकास किस संस्था द्वारा किया गया है?

जवाब: पुणे स्थित सेंटर फॉर डिवेलपमेंट ऑफ अडवांस कंप्यूटिंग (सी-डीएसी)

सवाल: विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस कब मनाया जाता है?

जवाब: 2 दिसंबर


UP University Exam 2021: बिना परीक्षा प्रमोट होंगे कॉलेज के ये छात्र, पढ़ें

बिना परीक्षा प्रमोट होंगे कॉलेज के ये छात्र, पढ़ें

उत्‍तर प्रदेश में यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में भी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. छात्रों को बिना परीक्षा पास किया जाएगा. हालांकि फाइनल ईयर के छात्रों को एग्‍जाम देना होगा।


कोरोना संक्रमण को देखते हुए जहां एक तरफ सीबीएसई के साथ साथ राज्‍य बोर्ड भी कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर रहे हैं, वहीं यूपी बोर्ड ने कॉलेजों की परीक्षाएं भी रद्द कर दी हैं. मंगलवार 8 जून को यूपी सरकार ने विश्वविद्यालयों और कालेजों की परीक्षाएं रद्द कर दी. इससे 41 लाख छात्रों को बिना परीक्षा ही अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाएगा. यूपी सरकार की ओर से इसे लेकर दिशा-निर्देश जारी किये गए हैं. इसकी घोषणा राज्‍य के उपमुख्‍यमंत्री दिनेश शर्मा ने की और कहा कि राज्‍य के ग्रेजुएशन और पोस्‍टग्रेजुएशन के फर्स्‍ट ईयर के छात्रों को बिना परीक्षा, सेकेंड ईयर में प्रोमोट कर दिया जाएगा. हालांकि जो छात्र फाइनल ईयर में हैं, उन्‍हें परीक्षा देनी होगी. उम्‍मीद की जा रही है कि अगस्‍त में फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षा आयोजित की जा सकती है.

राज्‍य सरकार ने जो गाइडलान्‍स जारी की हैं, उसमें यह कहा गया है कि फर्स्‍ट ईयर के अंकों को सेकेंड ईयर की परीक्षा के आधार पर तैयार किया जाएगा, जो अगले वर्ष (2022) में होने वाली है. बता दें कि राज्‍य सरकारें, कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए छात्रों की सेहत की सुरक्षा के लिये ये कदम उठा रही हैं.


ये व्यवस्थाएं की गई हैं-
सेमेस्टर पद्धति के तहत संचालित स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए-

1- जहां स्नातक प्रथम/तृतीय (विषम) व स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं हो चुकीं है वहां स्नातक द्वितीय/चतुर्थ (सम) सेमेस्टर और स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के अंक प्रथम/तृतीय सेमेस्टर के अंकों और मिड-टर्म/अन्तरिम मूल्यांकन के आधार पर परिणाम निर्धारित होंगे
2- जहां विषम एवं सम सेमेस्टर की परीक्षाएं सम्पन्न नहीं हुई हैं वहां मिड टर्म/अन्तरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम निर्धारित होंगे
3- यदि स्नातक पंचम सेमेस्टर व स्नातकोत्तर तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाएं नही हुई हों, तो अन्तिम सेमेस्टर में प्राप्त अंकों से पूर्व सेमेस्टर के अंक निर्धारित किए जा सकते हैं।

वार्षिक परीक्षा पद्धति के तहत संचालित पाठ्यक्रम
- ऐसे विश्वविद्यालय जहां स्नातक पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष की परीक्षाएं नहीं हुई हैं, उनके छात्रों को द्वितीय वर्ष में प्रोन्नत किया जाएगा और 2022 में होने वाली उनकी द्वितीय वर्ष की परीक्षा के अंकों के आधार पर उनके प्रथम वर्ष का परिणाम व अंक निर्धारित होंगे।

- स्नातक द्वितीय वर्ष के लिए दो व्यवस्थाएं तय की गई हैं। ऐसे विश्वविद्यालय जहां वर्ष 2020 में प्रथम वर्ष की परीक्षाएं हुई थीं, वहां प्रथम वर्ष के अंकों के आधार पर द्वितीय वर्ष के परिणाम व अंक निर्धारित होंगे। छात्रों को तृतीय वर्ष में प्रोन्नत किया जायेगा। ऐसे विश्वविद्यालय जहां वर्ष 2020 में प्रथम वर्ष की परीक्षाएं नहीं हुई थी, उनके द्वारा द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं करवाई जाएंगी।

- स्नातकोत्तर पूर्वार्द्ध के छात्रों को उत्तरार्द्ध में प्रोन्नत किया जाएगा। जब वर्ष 2022 में उत्तरार्द्ध की परीक्षाएं आधार पर उन्हें पूर्वार्द्ध वर्ष के अंक निर्धारित किए सकेंगे। 


स्रोत : news18 hindi

यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 | UP TET Application Form 2021 : यहाँ से कर सकेंगे आवेदन

यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 | UP TET Application Form 2021 : यहाँ से कर सकेंगे आवेदन 


यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 : जो उम्मीदवार यूपी टीईटी 2021 के लिए आवेदन पत्र भरना चाहते हैं उनको बता दें कि आवेदन प्रक्रिया  015 जून 2021 से 30 जून 2021 तक पूर्ण की जानी थी जिसे बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते स्थगित कर दिया गया है। आवेदन की नयी तिथियों की घोषणा कोविड-19 परिस्थितियों के अनुसार किया जायेगा। यूपी टीईटी 2021 के लिए आवेदन पत्र यूपी डीएलएड की आधिकारिक

 वेबसाइट https://updeled.gov.in/ पर जारी किये जायेंगे। परीक्षा में शामिल इच्छुक उम्मीदवार, आवेदन जारी होने के बाद इस पेज के माध्यम से भी आवेदन कर सकेंगे। यूपी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (UPTET) परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवार शिक्षक बन कर शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं।
     UP TET Application Form 2021 से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ सकते हैं।

    नवीनतम : यूपी टीईटी 2021 के लिए 15 जून से  होगी आवेदन प्रक्रिया शुरू !

    यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 (UP TET Application Form 2021)

    यूपी टीईटी 2021 के लिए आवेदन पत्र केवल ऑनलाइन माध्यम से भरा जाएगा। आवेदन पत्र भरने के लिए उम्मीदवार के पास अपना मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी होनी जरूरी है। UP TET Application Form 2021 भरने से पहले उम्मीदवार अपनी पात्रता मापदंड अवश्य जांच लें। अगर आप तय किये गए शैक्षिक योग्यता और आयु सीमा को पूरा नहीं करते तो आपके द्वारा किया गया आवेदन रद्द कर दिया जाएगा। नीचे दिए गए टेबल के माध्यम से आप यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण तारीखें देख सकते हैं।


    महत्वपूर्ण तारीखें

    कार्यक्रम

    तारीखें

    अधिसूचना की तारीख

    02 जून 2021

    आवेदन प्रक्रिया शुरू होने की तिथि

    15 जून 2021 

    आवेदन की आखिरी तारीख

    30 जून 2021 

    आवेदन शुल्क जमा करने की आखिरी तारीख

    02 जुलाई 2021 

     प्रिंट निकालने की अंतिम तारीख

    04 जून 2021 

     UPTET Online Forme Here

    आवेदन पत्र – यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 आधिकारिक वेबसाइट https://updeled.gov.in पर जारी किया जाएगा।

    यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 कैसे भरें

    आवेदन पत्र जारी होने के बाद उम्मीदवारों को आवेद न पत्र भरने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन अब उम्मीदवार हमारे पेज पर दिये गये सरल स्टेप्स को फॉलो करके आवेदन पत्र आसानी भर सकेंगे ।

    • आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले इस पेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करना होगा।
    • इसके अलावा उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर भी आवेदन कर सकते हैं।
    • आधिकारिक वेबसाइट पर जाने के बाद सबसे पहले होम पेज खुलेगा।
    • होम पेज पर उम्मीदवारों को यूपी टीईटी 2021 का लिंक दिखाई देगा ।
    • लिंक ओपन होने के बाद उम्मीदवार यूपी टीईटी 2021 के लिए आवेदन पत्र पर लिंक पर क्लिक करें ।
    • अब उम्मीदवारों को यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 प्राप्त होगा ।
    • आवेदन पत्र प्राप्त होने के बाद उम्मीदवार आवेदन पत्र में मांगी गई जानकारी को सही से जांच लें उसके बाद ही आवेदन पत्र भरें ।
    • आवेदन पत्र में मांगी गई जानकारी को भरने के बाद उम्मीदवार सबमिट करें ।
    • अब उम्मीदवार आवेदन पत्र का प्रिंट आउट निकाल लें ।

    आवेदन शुल्क

    केटेगरी

    पेपर-1 या पेपर-2 के लिए

    दोनों पेपर के लिए

    जनरल/ओबीसी

    600

    1200

    एससी/एसटी

    400

    800

    पीडबल्यूडी

    100

    200

     

    उम्मीदवारों की जानकारी के लिए बता दें कि यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 भरने के बाद आवेदन शुल्क का भुगतान भी करना होगा। उम्मीदवार आवेदन फीस 02 जून 2021 तक जमा कर सकेंगे। उम्मीदवार शुल्क का भुगतान नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड आदि के माध्यम से भर सकेंगे।

    यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 के लिए निम्न चीजों को किया जायेगा शामिल

    • रजिस्ट्रेश प्रकिया
    • योग्यता
    • डाक्यूमेंट
    • आवेदन शुल्क
    • हस्ताक्षर
    • 10वीं और 12वीं की मार्कशीट
    • आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि ।

    यूपी टीईटी आवेदन पत्र 2021 और जरूरी डॉक्यूमेंट्स

    जो उम्मीदवार आवेदन करेंगे उन्हें अपने आवेदन पत्र के साथ कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स की स्कैन कॉपी भी अपलोड करनी होगी जैसेः-

    • फोटो – 3.5 x 4.5 cm (max 20 kb)
    • सिग्नेचर – max 20 kb (2 to 10 kb)

    यूपी टीईटी योग्यता मापदंड 2021

    कक्षा 1 से 5 तक शिक्षक योग्यता
    • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन तथा दो वर्षीय डीएलएड (बीटीसी) उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो। अथवा
    • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन तथा डिस्टेंस लर्निंग से अप्रशिक्षित व स्नातक शिक्षामित्रों का दो वर्षीय डीएलएड (बीटीसी) उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो। अथवा
    • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन तथा शिक्षा शास्त्र में दो वर्षीय डिप्लोमा (डी.एड) उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो। अथवा
    • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 50% अंकों के साथ स्नातक / परास्नातक और बी.एड उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो। अथवा
    • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 45% अंकों के साथ ग्रेजुएशन / पोस्ट ग्रेजुएशन तथा बी.एड। अथवा
    • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन तथा यूपी में संचालित दो वर्षीय बीटीसी उर्दू विशेष प्रशिक्षण उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो। अथवा
    • न्यूनतम 50% अंकों के साथ इंटरमीडिएट अथवा समकक्ष तथा चार वर्षीय बी.एल.एड उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो।

    कक्षा 6 से 8 तक शिक्षक पात्रता के लिए अर्हता

    • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन तथा दो वर्षीय डीएलएड (बीटीसी) उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो। अथवा
    • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 50% अंकों के साथ ग्रेजुएशन / पोस्ट ग्रेजुएशन और बी.एड उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो। अथवा
    • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 45% अंकों के साथ ग्रेजुएशन / पोस्ट ग्रेजुएशन तथा बी.एड। अथवा
    • न्यूनतम 50% अंकों के साथ इंटरमीडिएट अथवा समकक्ष तथा चार वर्षीय बी.ए.एड / बी.ए.बीएड उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो। अथवा
    • न्यूनतम 50% अंकों के साथ इंटरमीडिएट अथवा समकक्ष तथा चार वर्षीय बी.एस.सी.एड /बी.एस.सी.एड उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो। अथवा
    • न्यूनतम 50% अंकों के साथ इंटरमीडिएट अथवा समकक्ष तथा चार वर्षीय बी.एल.एड उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में हो।

    यूपी टीईटी एडमिट कार्ड 2021

    जो भी उम्मीदवार यूपी टीईटी 2021 के लिए आवेदन पत्र भरेंगे उन उम्मीदवारों का एडमिट कार्ड जारी किया जायेगा । एडमिट कार्ड उम्मीदवारों को ऑनलाइन प्राप्त होंगे । UPTET 2021 Admit Card उन उम्मीदवारों को प्राप्त होगा जिन्होंने आवेदन पत्र समाप्त होने कि अंतिम तिथि तक आवेदन पत्र भरा होगा और आवेदन शुल्क का किया होगा । UPTET Admit Card लिखित परीक्षा में ले जाना बेहद जरुरी है यदि उम्मीदवार यूपी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट 2021 में एडमिट कार्ड ले जाना भूल जाते हैं तो वह परीक्षा नहीं दे सकेंगे।

    यूपीटीईटी ऑनलाइन फोर्मे क्लिक HERE

    UPTET Online Forme Here

    UPTET 2020: 15 जून से शुरू होंगे शिक्षक पात्रता परीक्षा के ऑनलाइन आवेदन, शासन को भेजा गया प्रस्ताव


    UPTET 2020-21: कोरोना वायरस (Corona Virus) की वजह से टाली गई उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (Uttar Pradesh Teacher Eligibility Test) को 15 जून से कराए जाने की तैयारी है। इस संबंध में परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव (प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। शासन की तरफ से जैसे ही इस प्रस्ताव पर मुहर लगेगी, वैसे ही नई समय सारिणी के अनुसार आवेदन लिए जाएंगे। मगर, अभी लिखित परीक्षा की तारीख तय नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप की वजह से ही इस परीक्षा को टाला गया था।

    मामले में विशेष सचिव द्वारा कहा गया है कि UPTET 2020 को कोरोना महामारी के चलते अग्रिम आदेशों तक स्थगित किया जाता है। ज्ञात हो कि यह आदेश 15 मार्च को जारी शासनादेश के बाद 11 मई को आया था। क्योंकि, इसी दिन उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा का विज्ञापन जारी किया जाना था /


    15 मार्च को बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Shiksha Vibhag) ने प्रदेश की शिक्षक पात्रता परीक्षा-2020 के आयोजन से संबंधित शासनादेश जारी किया था। इस शासनादेश में समयसारिणी भी तय कर दी गई थी। जिसके अनुसार 11 मई को विज्ञापन प्रकाशित करने व ऑनलाइन आवेदन के लिए रजिस्ट्रेशन 18 मई की दोपहर से शुरू होकर अंतिम तारीख एक जून तय थी। मगर, उस वक़्त कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से लगातार कोरोना कर्फ़्यू का इस्तेमाल किया गया था। जिससे ये परीक्षाएं नहीं कराई जा सकी।


    शासन को भेजे गए प्रस्ताव के बारे में बात करते हुए परीक्षा संस्था परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2020 का विज्ञापन और आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव भेज चुके हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा में बड़ी तादाद में आवेदन पत्र आएंगे। इस परीक्षा में करीब दस लाख लोगों के आवेदन आने का अनुमान लगाया जा रहा है। ज्ञात हो कि एक ही दिन दो स्तर प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षाएं होनी हैं।

    अगली कक्षा में प्रमोट करने को नहीं जारी कोई दिशा-निर्देश

    अगली कक्षा में प्रमोट करने को नहीं जारी कोई दिशा-निर्देश 2021

    कोरोना काल में परीक्षाएं कराना बड़ी चुनौती है। शासन ने 15 मई तक सभी तरह की परीक्षाएं स्थगित की थीं और उसके बाद 15 मई तक सभी शिक्षण संस्थानों को पूरी तरह से बंद कर दिया था। अब सभी शिक्षण संस्थानों को 20 मई तक बंद कर दिया गया है। सिर्फ अंतिम वर्ष की परीक्षा के अलावा अन्य कक्षा के छात्रों के प्रमोट होने की खबरें प्रसारित होने पर बरेली में भी छात्रों को प्रमोट होने की उम्मीद जगी लेकिन यूजीसी ने अगली कक्षा में प्रमोट करने के कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं।


    मंगलवार को यूजीसी ने प्रसारित हो रहीं खबरों को गलत बताया। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने भी अभी इसको लेकर कोई तैयारी नहीं की है। विश्वविद्यालय प्रशासन यूजीसी के निर्देश के साथ शासन के निर्देश का इंतजार कर रहा है। हालांकि कई विश्वविद्यालय छात्रों को प्रमोट करने की तैयारी कर रहे हैं।

    बता दें कि पिछले वर्ष कोरोना की वजह से सिर्फ अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं करायी गई थीं, अन्य छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया था। इसके लिए नियम बनाए गए थे। देरी से परीक्षाएं होने के बाद सत्र भी देरी से शुरू हुआ था। दिसंबर माह तक प्रवेश ही होते रहे थे। उसके बाद विश्वविद्यालय ने सत्र को पूरा करने के लिए तैयारियां तेज कीं। ऑनलाइन कक्षाएं भी किसी तरह से संचालित कीं। उसके बाद परीक्षाओं की तैयारी शुरू हो गई।

    परीक्षा फार्म भी भरवा लिए गए और 1 मई से परीक्षाओं का शिड्यूल भी जारी कर दिया गया लेकिन उससे पहले ही कोरोना की दूसरी लहर से दिक्कतें शुरू हो गईं। परीक्षाएं 15 मई तक स्थगित कर दी गईं। उसके बाद शिक्षण संस्थानों को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया। हालांकि परीक्षाएं निरस्त करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया।

    शासन के निर्देशों के तहत एमेजपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने हालात सुधरने पर 10 जून से परीक्षाएं कराने की भी बात कही लेकिन अभी हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में 10 जून से परीक्षाएं कराना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा।

                         स्रोत :बरेली, अमृत विचार

    मध्य प्रदेश राज्य का इतिहास

    मध्य प्रदेश का इतिहास

    मुख्यमंत्री : शिवराज सिंह चौहान

    क्षेत्रफल : 308245 km

    जनसंख्या : 85002417

    राजधानी : भोपाल

    मुख्यभाषा : हिंदी

    राज्य चिन्ह : click here

    इतिहास और भूगोल

    मध्‍य प्रदेश 30, 8,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल के साथ दूसरा सबसे बड़ा भारतीय राज्‍य है। भौगोलिक दृष्टि से यह देश में एक केन्‍द्रीय स्‍थान रखता है।

    सम्राट अशोक ने सबसे पहले उज्‍जैन पर शासन किया। मध्‍य भारत का काफी बड़ा हिस्‍सा गुप्‍त साम्राज्‍य (300-500 ईसवी) का भाग था। ग्‍यारहवीं शताब्‍दी के प्रारंम्‍भ में मध्‍य भारत में मुसलमानों का आगमन हुआ। सबसे पहले महमूद गज़नवी यहां आया और फिर मुहम्‍मद गौरी आया, जिसने वहां के कुछ भागों को अपनी दिल्‍ली सल्‍तनत में मिला लिया। मध्‍य भारत मुगल साम्राज्‍य का भी हिस्‍सा रहा। मराठों का प्रभाव आरंभ होने से लेकर 1794 में माधवजी सिंधिया के देहांत तक मध्‍य भारत पर मराठों का बोलबाला रहा। परंतु उसके बाद छोटे-छोटे स्‍वतंत्र राज्‍य बनने लगे। ये छोटे राज्‍य ही आगे चलकर ब्रिटिश सत्‍ता के जमने का कारण बने।

    इंदौर की रानी अहिल्‍याबाई होल्‍कर, गोंड की महारानी कमलापति और रानी दुर्गावती आदि कुछ महान महिला शासकों ने अपने उत्‍कृष्‍ट शासन के लिए भारतीय इतिहास में अपना नाम स्‍वर्णाक्षरों में लिखवा लिया। मध्‍य प्रदेश की स्‍थापना 1 नवंबर, 1956 का हुई। नया राज्‍य छत्‍तीसगढ़ बनाने के लिए हुए विभाजन के बाद यह अपने वर्तमान स्‍वरूप में 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्‍व में आया। मध्‍य प्रदेश उत्‍तर में उत्‍तर प्रदेश, पूर्व में छत्‍तीसगढ़ त‍था पश्चिम में राजस्‍थान और गुजरात, दक्षिण में महाराष्‍ट्र से घिरा है।

     

    कृषि

    कृषि राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था का आधार है, क्‍योंकि राज्‍य की 74.73 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और खेती पर निर्भर है। राज्‍य की करीब 49 प्रतिशत जमीन खेती योग्‍य है। 2010-11 में शुद्ध बुवाई क्षेत्र 2,08,36,000 हेक्‍टेयर रहने का अनुमान था और अनाज का कुल उत्‍पादन 171.77 मिलियन मीट्रिक टन रहा। गेहूं, चावल, दलहन जैसी प्रमुख फसलों का उत्पादन भी अच्छा रहा।

     

    उद्योग और खनिज

    मध्य प्रदेश ने इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, मोटरवाहनों, सूचना प्रौद्योगिकी आदि उच्च-तकनीकी उद्योगों के क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। दूरसंचार प्रणालियों के लिए यह राज्य ऑप्टिकल फाइबर का उत्पादन कर रहा है। इंदौर के पास पीथमपुर में बड़ी संख्या में मोटर-वाहन उद्योग स्थापित हुए हैं। राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उद्योग हैं—भोपाल में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लि., होशंगाबाद में सिक्योरिटी पेपर मिल, देवास में नोट छापने की प्रेस, नेपानगर में अखबारी कागज की मिल और नीमच की अल्कालॉयड फैक्ट्री। गत वर्ष राज्य में सीमेंट का उत्पादन 12.49 लाख मीट्रिक टन हुआ। पीथमपुर में जल्दी ही एक मालवाहक विमान परिसर स्थापित किया जा रहा है। भारत सरकार इंदौर में विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित कर रही है। समग्र आर्थिक विकास नीति लागू कर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए आकर्षक छूट देने के लिए औद्योगिक प्रोत्साहन नीति की घोषणा की है। भारत सरकार ने धार जिले के पीथमपुर में एक राष्ट्रीय ऑटोमोटिव परीक्षण, अनुसंधान तथा विकास परियोजना को मंजूरी दे दी है।

     

    सिंचाई और बिजली

    2009-10 में कुल 65.43 लाख हेक्टेयर इलाके में सिंचाई सुविधा उपलब्ध थी। मध्य प्रदेश में निम्न स्तर का कोयला प्रचुर मात्रा में होता है, जो बिजली उत्पादन के अनुकूल है। पनबिजली उत्पादन की भी यहां अपार क्षमता है। राज्य में विद्युत उत्पादन की कुल स्थापित क्षमता 9658.45 मेगावाट थी। यहां 902.5 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता के आठ पनबिजली केंद्र हैं।

     

    विकास की पहल

    मध्य प्रदेश ग्रामीण रोजगार योजना सभी 50 जिलों में लागू की गई है। इस योजना को लागू करने में मध्य प्रदेश प्रथम स्थान पर है। राज्य में बागवानी उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन शुरू किया गया है।

     

    परिवहन

    सड़कें: मध्य प्रदेश में सड़कों की कुल लंबाई 91,968 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4,280 कि.मी. और प्रांतीय राजमार्गों की लंबाई 8,729 कि.मी. है। राज्य में सड़कों के निर्माण तथा सुधार का कार्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है तथा लगभग 70 हजार कि.मी. सड़कों का निर्माण तथा सुधार किया जाएगा।

    रेलवे: उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला प्रमुख रेलमार्ग मध्य प्रदेश से होकर गुजरता है। राज्य में भोपाल, बीना, ग्वालियर, इंदौर, इटारसी, जबलपुर, कटनी, रतलाम और उज्जैन मुख्य जंक्शन हैं। रेलवे के क्षेत्रीय मुख्यालय भोपाल, रतलाम और जबलपुर में हैं।

     

    त्‍योहार

    मध्य प्रदेश में कई त्योहार और उत्सव मनाए जाते हैं। आदिवासियों का एक महत्वपूर्ण त्योहार भगोरिया है, जो परंपरागत हर्षोल्लास से मनाया जाता है। खजुराहो, भोजपुर, पचमढ़ी और उज्जैन में शिवरात्रि के पर्व के दौरान स्थानीय परंपराओं का रंग दिखाई देता है। चित्रकूट और ओरछा में रामनवमी पर्व के आयोजन की अनोखी परंपरा है। ओरछा, मालवा और पचमढ़ी के उत्सवों में कला और संस्कृति का बड़ा सुंदर मेल दिखाई देता है। ग्वालियर के तानसेन संगीत समारोह, मैहर के उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत समारोह, उज्जैन के कालिदास समारोह और खजुराहो के नृत्य समारोह मध्य प्रदेश के कुछ प्रसिद्ध कला उत्सव हैं। जबलपुर में संगमरमर की चट्टानों के लिए मशहूर भेड़ाघाट में वार्षिक नर्मदा उत्सव की शुरुआत की गई है। शिवपुरी में भी शिवपुरी उत्सव शुरू किया गया है।