मेला
1- प्रदेश के प्रमुख सांस्कृतिक क्षेत्र अज , अवध , बुन्देलखण्ड रुहेलखण्ड तथा भोजपुरी क्षेत्र
2- प्रदेश में स्थापत्य कला के प्राचीनतम नमूने प्राप्त होते है ( मार्यकालीन : सारनाथ । कौशाम्बी , कुशीनगर आदि स्थानों से )
3- मदिर निर्माण कला का विकास हुआ गुप्तकाल में
4- गुप्तकालीन मंदिरों के साक्ष्य मिलते हैं । देवगढ़ ( झाँसी ) , भीतरगाँव ( कानपुर ) तथा भीतरी ( गाजीपुर ) से
5- मध्यकाल में स्थापत्यकला की दो प्रमुख शैलियाँ शर्की और मुगल ( आगरा ) शैली
6- मध्यकाल की प्रमुख चित्रकला शैलियाँ गुगल ( आगरा ) , मथुरा ( बज ) तथा बुन्देली शैली
7- मध्यकाल के प्रमुख संगीतकार स्वामी हरिदास , कश्यप , शार्दुल , दत्तिल . मातगम , अभिनवगुप्त , हरिपाल , अमीर खुसरो , अदारंग , सदारंग , वाजिदअली शाह , तानसेन बैजू , हुसेन शर्की आदि ।
8- मुगल चित्रकला शैली की नींव रखी हुमायूँ ने
9- मुगल चित्रकला शैली का स्वर्ण काल जहाँगीर काल
10- शर्की शैली का सर्वोत्कृष्ट नमूना अटाला मस्जिद ( जौनपुर )
11- मुगल शैली का सर्वोत्कृष्ट नमूना : ताजमहल
12-आधुनिक काल में स्थापत्य कला की प्रमुख शैली लखनऊ
13- शैली लखनऊ शैली का विशुद्ध नमूना बड़े इमामबाड़े का हॉल ।
14- चित्रकला के प्राचीनतम नमूने : मिर्जापुर , सोनभद्र के सोनकदा लिखनियादरी , मानिकपुर , जोगीमारा , होशंगाबाद , रायगढ़ आदि स्थलो के शैलों पर एवं गुफाओं में ।
15- काशी नरेश के संरक्षण में विकसित चित्रकला शैली अपमंश तथा कम्पनी शैली
16- आधुनिक चित्रकला की प्रमुख शैलियाँ वाशटेम्पा या लखनऊ शैली
17- लखनऊ चित्रकला शैली के जनक : असित कुमार हल्दार
18- ईरानी - फारसी व भारतीय रागों का मिश्रण किया अमीर खुसरो ने
19- प्रदेश के प्रमुख संगीत घराने : आगरा , लखनऊ , वाराणसी . सहारनपुर रामपुर , किराना ( मुजफ्फरनगर ) , अतरौली ( अलीगढ़ ) एवं खुर्जा ( अलीगढ़ घराना आदि ।
20 संगीत की दृष्टि से लखनऊ घराने का स्वर्णकाल वाजिद अली शाह का काल
21- वाजिद अली शाह के काल में काफी लोकप्रिय हुआ ठुमरी
22- वाजिद अली शाह उनरी की बंदिशें तैयार की - ' अख्तर पिया उप से
23- वाजिद अली शाह के दरबार में रहते थे बिन्दादिन कथक ) एव कोत सिंह ( पखावजी )
24- कथक नृत्य में तुमरी गायन का समावेश किया : बिन्दादिन में
25- शाहजहाँपुर एवं इटावा ( गौरीपुर ) घराना प्रसिद्ध है सरोद वादन के लिए
26- अजराड़ा ( मेरठ ) घराना प्रसिद्ध है तबला वादन के लिए
27- तबले के लखनऊ घराने का सूत्रपात किया : मोदू एवं बख्शूर खाँ ने
28- प्रदेश का एकमात्र शास्त्रीय नृत्य कथक
29- कथक के लिए प्रसिद्ध घराने लखनऊ एवं वाराणसी
30- कव्वाली , तराना , कौलकलवाना आदि शैलियों की खोज की अमीर खुसरो ने
31- तबला एवं सितार का आविष्कार किया : अमीर खुसरो ने
32- मंदिरों में संगीतबद्ध अर्चना पद्धति की शुरुआत की : वल्लभाचार्य ने
33- प्रसिद्ध संगीतज्ञ , भक्त तथा वृन्दावन ( निधिवन ) निवासी स्वामी हरिदास की संगीतबद्ध रचनाएँ हैं श्रीकेलिमाल व अष्टादश पद
34- कृष्ण भक्त स्वामी हरिदास प्रसिद्ध है ध्रुवपद गायन के लिए
35- तानसेन बैजू , गोपाल आदि 8 शिष्य थे स्वामी हरिदास के
36- अकबर के दरबारी तानसेन पारंगत थे : राग दीपक व वीणा वादन में
37- बैजू पारगत थे राग मेघ में
38- बड़े ख्याल का प्रवर्तन किया सुल्तान हुसैन शर्की ( जौनपुर ) ने
39- 2003 से पूर्व अनुसूचित जनजाति श्रेणी में सूचीबद्ध जनजातियाँ थीं 2 | ( थारू एवं बुक्सा )
40- - 2003 में अनुसूचित जनजाति श्रेणी में सूचीबद्ध नई जनजातियाँ 10
41- राज्य में कुल आकाशवाणी केन्द . 13
42- राज्य में कुल दूरदर्शन केन्द्र : 3
43- राज्य में टेलीविजन सेवा की शुरुआत 1975 में लखनऊ से
44- भारत की पहली बोलती फिल्म आलमआरा के निर्देशक थे बी पी . मिश्रा ( देवरिया )
45- उत्तर प्रदेश चलचित्र निगम की स्थापना : 1975 में
46- फिल्म बन्धु उत्तर प्रदेश एवं फिल्म विकास परिषद का गठन 2001 में
47- लखनऊ के महान गायक मिया शौरी ने टप्पा गायकी शैली प्रचलित की , जो पंजाब की हीर - शैली गायकी पर आधारित है ।
48- जौनपुर के सुल्तान हुसैन शकी ने बड़ा ख्याल ' जैसी नई गायन शैली आविष्कार किया ।
49- अवध के महान संगीतज्ञ विवादीन महाराज ने कथक में उमरी गायन का समावेश किया ।
50- महान गायक एवं संगीतज्ञ तानसेन के दामाद हाजी सुल्तान ने ख्याल गायकी को नया रूप दिया ।
51- आधुनिक शास्त्रीय गायन का पिता उस्ताद फैयाज खाँ को माना जाता है , जिन्हें आफताब - ए - मोसिकी ( संगीत के सूर्य ) उपाधि से सम्मानित किया गया है ।
52- रामपुर के संगीतज्ञ बजीर अली खाँ ने ' वीणा वादन ' में ख्याल पद्धति का प्रयोग करके सैनिया घराना ' जैसे संगीत घराने को जन्म दिया ।
53- पं . राम सहाय , किशन महाराज , कण्ठे महाराज , आदि तबला वादक हैं । तबला सम्राट पं . सामता प्रसाद मिश्र ( गदई महाराज ) का सम्बन्ध हिन्दुस्तानी शैली के बनारस घराने से है ।
54- उदयशंकर एवं गोपीकृष्ण चौबे बनारस घराने के नर्तक हैं ।
55- बनारस घराने के अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के सितार वादक भारत रत्न ' । पण्डित रविशंकर महान सितारज्ञ उस्ताद अलाउद्दीन खाँ के शिष्य हैं ।
56- प्रसिद्ध ठुकरी गायिका छोटी मैना , बड़ी मैना , रसूलन बाई एवं गिरिजा देवी बनारस घराने की हैं ।
57- रोशन आरा , गंगूबाई हंगल , भीमसेन जोशी आदि किराना घराने के हैं ।
58- शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खाँ एवं मुमताज खान बनारस घराने के हैं
59- इटावा घराना सितार वादन के लिए प्रसिद्ध है ।
60- किराना घराने की गंगूबाई हंगल को 2002 में पद्म विभूषण मिला था
61- ओंकार नाथ ठाकुर और डॉ . एन . राजम वायलिन वादक हैं ।
62- पखावज वादक कोदऊ सिंह लखनऊ घराने के थे । 63- पखावज वादक शम्भू महाराज बनारस घराने के थे ।
64- टप्पा शैली की मीठी आवाज वाली जानकी बाई ( छप्पन छुरी ) इलाहाबाद की थीं ।
65- बाँसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया एवं रघुनाथ सेठ इलाहाबाद के हैं