जीव जन्तुओं के आवास
( Habitat of Living organisms )
जीव - जन्तु जिस वातावरण में रहकर अपनी प्रजाति की वृद्धि करते हैं , वही उनका आवास कहलाता है । इस आवास में वे जीव - जन्तु रहते हैं , भोजन प्राप्त करते हैं एवं अपनी संतानोत्पत्ति के लिए अनुकूल परिस्थितियों प्राप्त । करते हैं ।
आवास के प्रकार ( Types of Habitat )
- स्थलीय आवास - स्थल पर रहने वाले सभी जीवों का आवास । स्थलीय आवास ( Terrestrial habitat ) कहलाता है । इसमें निम्न प्रकार के आवास शामिल किये जाते हैं - 1 . वनीय आवास 2 . घास भूमियों 3 . मरुस्थलीय आवास 4 . पहाड़ी आवास 5 . ध्रुवीय आवास
- वनीय आवास में जन्तु एवं पेड़ - पौधे दोनों पाये जाते हैं जो एक - दूसरे पर आश्रित होते हैं । सभी प्रकार के जंगली जानवर एवं वनस्पति इस प्रकार के आवास में रहते हैं । ।
- घास भूमि आवास - पास भूमियों में लम्बी व मोटी घास अत्यधिक मात्रा में उगती है । यहाँ के मुख्य जानवरों में जेबरा जिराफ , हाथी . गजेला , राइनोसोर , हिरण आदि होते हैं । प्रमुख घास भूमियों के उदाहरण हैं - सवाना प्रेयरीज डाउन्स स्टेपी , मीडोज लानोस पपाज , ग्रान चाको आदि ।
- मरुस्थलीय आवास - मरुस्थलीय क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा अत्यधिक कम व तापमान की अतिशयताएँ होती हैं । यहाँ पाये जाने वाले जन्तुओं में ऊँट , केटल सॉप , कंगारू , चूहे आदि तथा वनस्पति में काँटेदार व मोटी व मांसल पत्ती वाले पेड़ - पौधे मिलते हैं ।
- पहाड़ी आवासों में याक , भालू , पहाड़ी बकरियाँ उड़ने वाली लोमड़ी । आदि मिलते हैं ।
- धुवीय आवास - धुवीय क्षेत्रों में वर्ष भर अत्यधिक बर्फ जमी रहती है । अतः यहाँ पाये जाने वाले जन्तुओं के शरीर पर फर होते है तथा चर्म के अन्दर वसा की परत होती है , जो न केवल सर्दी से सुरक्षा करती है बल्कि अत्यधिक ठण्ड के दिनों में उनके लिए संरक्षित भोजन का कार्य भी करती है । यहाँ ध्रुवीय भालू , रेडियर , आर्कटिक लोमड़ी , सील , स्नोगूज , आर्कटिक भेड़िया , खरगोश , बाल्ड ईगल , बेलुगाव्हेल , उलशीप ( भेड़ ) , एमीन , वालरस , वोल्वरिन आदि जानवर मिलते हैं ।
- जलीय आवास - जलीय आवास निम्न प्रकार के होते हैं
- ताजा जलीय आवास - नदियाँ , झीलें , तालाब , झरने आदि । इनमें मछलियाँ , केकड़े , मगरमच्छ , टैडपोल , मेढक कैटफिश , सर्प , ड्रेगन फ्लाई आदि जन्तु पाये जाते हैं ।
- समुद्री आवास - समुद्री पानी में मछली , व्हेल , डॉग फिश , स्टार फिश , जेली फिश , ऑक्टोपस , शार्क मछली , व्हेल मछली , समुद्री घोड़ा ( एक प्रकार की मछली ) , समुद्री ड्रेगन , समुद्री कछुआ , मगरमच्छ , समुद्री सॉप आदि जीव - जन्तु मिलते हैं ।
- तटवर्ती आवास - इन क्षेत्रों में समुद्री जल एवं नदियाँ द्वारा लाये गये ताजा जल का मिश्रण मिलता है । अतः यहाँ मैलोव प्रकार की वनस्पति की बहुलता रहती है । ।
कुछ जीव - जन्तुओं के विशिष्ट आवास
( Specific Habitats of certain Living Organisms )
- बिल - कुछ जन्तु धरती में बिल बनाकर रहते हैं , जैसे - चूहा , साँप । खरगोश , दीमक , चींटी , गोयरा आदि ।
- घोंसला - कुछ पक्षी पेड़ों पर या घरों में घोंसला बनाकर रहते हैं , जैसे बया , बुलबुल , कठफोड़वा , चिड़िया , कबूतर आदि । बया का घोंसला बहत सुन्दर होता है ।
- गिलहरी - पेड़ की कोटर में रहती है ।
- मांद या गुफा - शेर ' , भेड़िये , लोमड़ी , भालू आदि माद या गुफा में रहते है ।
- केनल - कुत्तों का आवास ।
- पेड की शाखाएँ - बंदर चील , कौआ , टिड्डा आदि पेड़ की शाखाओं पर रहते हैं ।
- छत्ता - मधुमक्खी , बर्र , ततैया आदि छत्ते में रहते हैं ।
- घर - छिपकली , चूहे व पालतू जन्तु घरों में रहते है ।
- जल - जल समुद्रों , नदियों आदि में रहने वाले जीव - जन्तुओं का आवास होता है ।
- गाय , भैंस , भेड़ - बकरी आदि पालतू जानवरों के लिए छप्पर या बाडा बनाया जाता है । पक्षियों के लिए पिंजरा या जाली का घर बनाना पड़ता है ।
- सूअर - शूकर शाला ( sty )
- घोड़ा - अस्तबल ( Stable )
- कंगारू - पेड़ की कोटर
- मकड़ी - जाल ( Web )
- मुर्गी - मुर्गी खाना या दबड़ा ।
मानव आवास
( Human Habitat )
प्रत्येक मानव के लिए घर एक मूलभूत आवश्यकता है । मकान गर्मी : सर्दी वर्षा व जीव - जन्तुओं से हमें सुरक्षित रखता है । मकान में हमारे समस्त कार्य सम्पादित होते हैं । कच्चे घर , पक्के घर झोपड़ियाँ आदि विभिन्न प्रकार के मानवीय आवास हैं । आवास से तात्पर्य वह स्थान है , जो ईंट , पत्थर , संगमरमर आदि से बना हो । इसमें एकाकी झोंपड़ी से लेकर नवीनतम भवन , राजप्रसाद , दुर्ग आदि सभी शामिल हैं । आवास की आवश्यकता निम्न कारणा
- दिनभर के श्रम के बाद रात्रि में सुरक्षित स्थान पर शयन व विश्राम हेतु।
- जंगली पशुओं , चोर - डाकुओं एवं शत्रुओं से सुरक्षा हेतु ।
- आर्थिक क्रियाओं द्वारा उत्पादित वस्तुओं के संग्रहण व अपनी सम्पत्ति की सुरक्षा हेतु ।
- मानव की समस्त गतिविधियों के संचालन हेतु ।
विभिन्न प्रकार के विशिष्ट मानव आवास
- इग्लू - ये उत्तरी अमेरिका की ग्रीनलैण्ड के आर्कटिक क्षेत्र के टण्डा प्रदेश में निवास करने वाली एस्किमो जन जातियों के आवास है । एस्किमो लोग हही खाल तथा बर्फ के सख्त टुकड़ों को जोड़कर ' इरल ( Igloo ) नामक गुम्बदनुमा मकान बनाते है । शीतकाल की कड़ाकेदार ठण्ड इन मकानों की मजबूती बढ़ाती है । इन मकानों का व्यास 4 - 5 मीटर तथा ऊंचाई 3 मीटर तक होती है । इग्लू ' के अन्दर की तरफ दीवारों तथा फ्लोर पर सील मछली की खाल लगायी जाती है । इससे ये मकान अन्दर से गर्म बने रहते हैं । दीवार । व खाल के मध्य रिक्त स्थान छोड़ा जाता है । इस रिक्त स्थान में । तण्डी हवा की उपस्थिति होती है । इससे इग्ल की आन्तरिक गर्मी से बर्फ से बनी दीवारें पिघलती नहीं हैं । इग्लू ' में गर्मी व रोशनी बनाये रखने के लिए सील मछली की चर्बी जलायी जाती है । ' इग्लू ' में एक छोटा द्वार होता है । इस द्वार का प्रयोग लेट कर । अन्दर - बाहर आने - जाने में किया जाता है । एस्किमो कुछ घण्टों में ही अच्छा ' इग्लू ' बना लेते हैं । परिवार बड़ा होने पर एक से अधिक ' ग्लू ' आपस में जोड़कर बनाये जाते हैं ।
- ट्यूपिक - एस्किमो लोगों के चमड़े के बने तम्बू जो उनके ग्रीष्मकालीन आवास होते हैं । ये घर केरीबो तथा धुवीय भालू की खाल के बने । होते हैं ।
- किस्ताऊ - कजाकिस्तान की खिरगीज जाति के आवास स्थान जो घास से निर्मित होते हैं । खिरगीज इनमें शीत ऋतु में निवास करते
- युत - खिरगीज जाति के ग्रीष्मकालीन आवास । ये चमड़े के बने तम्बू होते हैं । ये ऊनी नमदे से भी बनाए जाते हैं ।
- कू - भील जनजाति के आवास जो आयताकार होते हैं । इनकी दीवारें बॉस या पत्थर की बनी होती हैं , फर्श मिट्टी या पत्थर का तथा छत खपरैल या घास - फूस की ।
- बंगाल ओराक व कातोम ओराक - संथाल जनजाति के आवास गृह ।
- क्राल - दक्षिण अफ्रीका में बण्टू और नाटाल में जुलू जनजाति के तथा पूर्वी अफ्रीका में मसाई जनजाति के लोगों द्वारा बनाई गई घास की झोपड़ियाँ ।
- तिपि - रॉकी पर्वत के पूर्वी भागों में रेड इंडियन लोगों द्वारा बिसन बैल के चमड़े से व लम्बे बाँसों से बनाए गए शंक्वाकार तम्बू । ये पोर्टेबल होते हैं ।
- विगवाम - अमेरिकी आदिवासियों के आवास । ये छोटे व सामान्यतः गोल आकार में बने होते हैं । इन्हें ' वेतु ' भी कहा जाता है ।
- लोंगहाउस - ये अमेरिका की इरोक्युअस जाति के आवास होते हैं । ये बहुत बड़े होते हैं ।
- अर्स - भारत में नीलगिरि की पहाड़ियों में निवास करने वाली आदिम जाति के लम्बे बड़े ढोल की आकति के घर ।
- बशमैन जाति के आवास - अफ्रीका महाद्वीप के कालाहारी मरुस्थल की आखेटक जनजाति बुशमैन ( सान ) के लोग स्थायी व पक्के मकान नहीं बनाते हैं । ये लोग मौसम की कठोरता व जगली । जानवरों से बचाव के लिए झोपड़ियों , गुफाओं या टेंटों में रहते हैं । झोपड़ियों के निर्माण में लकड़ी , घास , पत्तियों व खालों का प्रयोग किया जाता है ।
- खाइमास - अरब व सहारा के बद्दू जाति के लोगों के तम्बू है।
- पिग्मी जाति के आवास - पिग्मी शिकार पर निर्भर रहते है अश स्थायी रूप से घर बगाकर नहीं रहते हैं । पिग्मी जंगली जीवा स सुरक्षा की दृष्टि से अपनी झोपडिगा वक्षों पर जाना है । इनका झोपड़ियों सधुमक्खी के छत्ती की भाति गोल बनाई जाती है ।
- झोपे - शुष्क व पश्चिमी राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्रों में बन घर
- पड़वा - राजस्थान में मरुस्थल में बनाए जाने वाले घर । पड़वा की । डुवारे प्रायः धूप में सखाई मिटी की इंटी से बनाते हैं और कलू खपरेल ) से तलवाँ छत बनाते हैं ।
- टपरा व डागला - राजस्थान के आदिवासियों का सामान्य घर ।
- भाखर का ढाँचा - राजस्थान के गिरासिया जनजातियों का घर ।
- मुनसा - उत्तराखंड के भोटिया जनजाति का शीतकालीन आवास
- मैत - उत्तराखंड के भोठिया जनजाति का ग्रीष्मकालीन आवास ।
- ऑल - यूरोप के कॉकेशस पर्वतीय क्षेत्र की कबीलाई जनजातियों द्वारा लकड़ी के ऊपर चमड़ा मदकर बनाया गया वृत्ताकार व तम्बूनुमा आवास ।
- इज्वा - उत्तरी रूस के ग्रामीण जनजातियो द्वारा बनाया गया त्रिकोणीय । रंगीन आवास ।
- प्लक गृह - अमेरिका के उत्तरी पश्चिमी तट पर रहने वाली आदिवासी जातियों के घर । ये घर केदार Cedar ) लकड़ी के बनाए जाते है ।
- प्यूब्लोस - दक्षिण - पश्चिम अमेरिका में प्युब्लोस इंडियन द्वारा बनाए जाने वाले घर ।
- चिकोज - अमेरिका में फ्लोरिडा में सेमीनोल इडियन्स ( Seminoles Indian ) द्वारा बनाए जाने वाले घर । इन घरों में दीवारे नहीं होती है , केवल छप्पर की छत और एक लकड़ी का प्लेटफार्म होता है जो भूमि से कई फीट ऊँचा होता है । ये घर गर्म व दलदली ( Swampy ) जलवायु के लिए उपयुक्त होते हैं ।
- होगान - ये घर दक्षिण - पश्चिम अमेरिका की आदिवासी जाति Navaja द्वारा बनाये जाते हैं । इसमें कोई खिड़की नहीं होती है , बल्कि धुआँ निकलने के लिए छत में एक छेद होता है । इन घरों का प्रवेश द्वार हमेशा पूर्व की तरफ होता है ।
- विकीअप्स ये अमेरिका की अपाचे ( Apache ) जाति के लोगों द्वारा बनाए जाने वाले घर हैं । ये उल्टे ॥ आकार ( Upside - down U shaped ) के घर होते हैं जो वृक्षों से बनाए जाते हैं तथा इन्हें जानवरों की खाल से ढका जाता है । घर का प्रवेश द्वार बहुत छोटा Mur होता है ।
आवास और निकटवर्ती स्थानों की स्वच्छता
( Cleaning of the Habitat & Surrounding )
स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता आवश्यक है । घर वह स्थान होता है । जहाँ परिवार निवास करता है । परिवार के सभी सदस्यों को प्रसन्नचित्त व स्वस्थ रखने के लिए हमें अपने आवास और आस - पास के स्थान को स्वच्छ रखना चाहिए । इसके लिए निम्न बातो का ध्यान रखना आवश्यक है .
- मकान की नालियों साफ - सुथरी व ढकी हुई हो ।
- शौचालय व स्नानागार प्रतिदिन अच्छी तरह से साफ किए जाने चाहिए क्योंकि यहाँ कीटाणु पनपने की संभावना सर्वाधिक होती है । पर की नालियों में कीटनाशको का नियमित छिड़काव किया जाना चाहिए ।
- कमरों में से दूषित हवा निकलने के लिए रोशनदान की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए ।
- समस्त कूड़ा - करकट प्रतिदिन एक कूड़ेदान में एकत्रित करना चाहिए । यह कूड़ादान ढक्कन वाला होना चाहिए ।
- रसोईघर में धुएँ के निकास के लिए चिमनी की व्यवस्था होनी चाहिए ।
- घर में प्रतिदिन फिनायल आदि डालकर पोंछा लगाया जाना चाहिए ताकि मच्छर व मक्खी न फैल सकें ।
- घर का समस्त कूड़ा - करकट बाहर नहीं फेंकना चाहिए । इसे नगर परिषद् के सफाई कर्मचारी के सुपुर्द किया जाना चाहिए ।
- गली - मोहल्ले की नालियाँ भी साफ करवानी चाहिए ।
- नगर परिषद् से संपर्क कर समय - समय पर कीटनाशकों , फिनायल , बीएचसी पाउडर आदि का छिड़काव करवाना चाहिए ।
- सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए आवासीय बस्तियाँ योजानाबद्ध रूप से बसी होनी चाहिए , जिसमें सभी आवासों के लिए समुचित हवा , पानी , रोशनी , जल निकास व शौचालय आदि की व्यवस्था हो ।
- गंदे जल के निकास की नालियाँ व गटर ढंके हुए हों ।
- आवासीय बस्तियों में जल के गड्ढे नहीं होने चाहिए , क्योंकि इन स्थानों पर मच्छर पनपने की सम्भावना रहती है ।
- जल स्रोत साफ - स्वच्छ होने चाहिए । कुएँ ढंके हों , जिनमें समय - समय पर जीवाणुनाशक दवाएँ डाली जाती रहें ।
- हण्डपम्प , कएँ व बावड़ियाँ आदि के आस - पास का स्थान स्वच्छ रखना चाहिए । इन स्रोतों में कपड़े व बर्तन धोना , स्वयं नहाना , जानवरों को नहलाना आदि कार्य नहीं करने चाहिए ।
- पानी की टंकियों की नियमित सफाई की जानी चाहिए ।
- बस्ती में वृक्षारोपण करना चाहिए ।
- मरे हुए जानवरों को जलस्रोत या बस्तियों से दूर उचित स्थान पर डालना चाहिए ।
- हर घर के बाहर या कुछ घरों के बीच कचरा पात्र रखे जायें । ।
- समुदाय के लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करनी चाहिए ।
- लोगों को गंदगी से होने वाली बीमारियों व संक्रामक रोगों के बारे में जानकारी होनी चाहिए ताकि वे अपने आस - पास के क्षेत्र को साफ - सुथरा रख सकें ।
- भारत सरकार ने 15 अगस्त , 2014 को स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम शुरू किया है , जिसके तहत 2 अक्टूबर , 2019 तक यह कार्यक्रम चलेगा । By आलोक वर्मा