आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी by आलोक वर्मा

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

आधुनिक हिन्दी साहित्य को समृद्धशाली बनाने का श्रेय आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी को है । आपने हिन्दी भाषा का संस्कार करके गद्य को सुसंस्कृत , परिमार्जित एवं प्रांजल रूप प्रदान किया । हिन्दी की इस महान् विभूति का जन्म 5 मई , सन् 1864 ई० में जिला रायबरेली के दौलतपुर नामक ग्राम में हुआ । आपके पिताश्री रामसहाय द्विवेदी सेना में नौकर थे । आर्थिक स्थिति प्रतिकूल होने के कारण आपकी शिक्षा सुचारु रूप से न चल सकी । आपने घर पर ही संस्कृत , हिन्दी , मराठी , अंग्रेजी और बंगला भाषा का गहन अध्ययन किया । शिक्षा समाप्ति के बाद आपने जी०आर०पी० ( रेलवे ) में नौकरी कर ली । सन् 1903 में नौकरी छोड़कर आप ' सरस्वती ' के संपादक बने । अपने सशक्त लेखन द्वारा हिन्दी साहित्य की श्रीवृद्धि करते हुए आप 21 दिसम्बर , सन् 1938 को दिवंगत हुए ।
आचार्य द्विवेदी जी की आरम्भ से ही साहित्य में गहन रुचि थी । आपकी साहित्य - साधना का शुभारम्भ सन् 1903 से हुआ , जब ' सरस्वती ' के सम्पादन का भार संभालकर आप पूर्ण रूप से हिन्दी साहित्य को समर्पित हुए । हिन्दी भाषा का संस्कार आपकी महत्त्वपूर्ण देन है । द्विवेदी जी की अथक् साहित्य - साधना से प्रभावित होकर सन् 1931 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा ने आपको ' आचार्य एवं हिन्दी - साहित्य सम्मेलन में ' वाचस्पति ' की उपाधियों से विभूषित किया ।

    आपकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित है

- . काव्य संग्रह - ' काव्यमंजूषा ' , ' कविताकलाप ' , ' सुमन ' आदि । निबन्ध - उत्कृष्ट कोटि के सौ से भी अधिक निबन्ध जो सरस्वती तथा अन्य पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए । अनुवाद - आप उच्चकोटि के अनुवादक भी थे । आपने संस्कृत और अंग्रेजी , दोनों भाषाओं से अनुवाद किया । कमारसम्भव , वेकनविचार , मेघदूत , विचार रत्नावली , स्वाधीनता आदि । आलोचना - नाट्यशास्त्र . हिन्दी नवरत्न , रसज्ञ - रंजन , विचार विमर्श , कालिदास की निरंकुशता , साहित्य सन्दर्भ आदि । सम्पादन सरस्वती मासिक पत्रिका
   
                      By आलोक वर्मा