सड़क सुरक्षा
विश्व स्वास्थ्य संगठन के वर्ष 2008 के आंकड़ों के अनुसार अस्पतालों में भर्ती होने वाले और उनसे होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण सड़क दुर्घटना है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वा 2011 में विश्व में सबसे अधिक 1 . 36 , 834 सड़क दुर्घटनाएँ भारत में हुई , जिसमें दुपहिया वाहन प्रतिशत , ट्रक 19 प्रतिशत , कार 10 प्रतिशत , टैम्पो / वैन 06 प्रतिशत , बस 09 प्रतिशत , पैदल चलने वाले 09 प्रतिशत तथा अन्य 10 प्रतिशत हैं ।सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और सड़क सुरक्षा उपायों के प्रति आम नागरिकों को और अधिक जागरूक किए जाने की आवश्यकता है । विकसित देश न केवल सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करते हैं वरन् वाहन सुरक्षा और सड़कों की आधारभूत संरचना पर भी ध्यान देते हैं । वर्तमान में सड़क दुर्घटना से होने वाली चोट और मृत्यु बहुत सामान्य बात हो गयी है ।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के वर्ष 2001 के आँकड़ों के अनुसार सड़क दुर्घटना में 18 प्रतिश की वृद्धि हुई , जो वर्ष 2011 में बढ़कर 24 प्रतिशत हो गयी है । वर्ष 2001 में प्रति 100 व्यक्तियों पर मरने वालों की संख्या 19 . 6 थी जो वर्ष 2011 में बढ़कर प्रति 100 व्यक्तियों पर 28 . 6 हो गयी है ।
सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली वृद्धि का प्रमुख कारण सड़क सुरक्षा के नियमों की अनदेखी है । गलत दिशा में चलना , तीव्र गति से अथवा नशे का सेवन कर गाड़ी चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं के समाचार प्रत्येक दिन सुने जा सकते हैं । सरकार द्वारा सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के यातायात नियम बनाए गए हैं । यातायात के नियमों के पालन करने , जैसे सही गति से वाहन चलाना , सुरक्षा उपायों , यथा हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग करना एवं सड़कों पर बने यातायात संकेतों के पालन से दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है । वर्तमान में दो पहिया अथवा चार पहिया वाहन चलाते समय मोबाइल अथवा दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रयोग करने पर चालक का ध्यान भंग से होने वाली घटनायें बढ़ी हैं ।
यातायात के नियमों के पालन करने से यातयात अर्थदण्ड एवं ड्राइविंग लाइसेन्स के निरस्तीकरण से बचा जा सकता है । वाहन चालन के पूर्व प्रत्येक व्यक्ति को किसी मान्यता प्राप्त चालन स्कूल के प्रशिक्षित प्रशिक्षक से । चालन कोर्स करना चाहिए । सार्वजनिक स्थलों पर बिना ड्राइविंग लाइसेन्स के वाहन चलाना अपराध । श्रेणी में आता है और मोटर यान अधिनियम , 1988 की धारा 181 के तहत इसके लिए 500 | 70 का अर्थदण्ड निर्धारित है । वाहन स्वामियों को अपने वाहनों की समय - समय पर जाँच कराते रहना चाहिए ताकि होने वाली दुर्घटना से बचा जा सके ।
किसी भी यात्रा पर जाने के पूर्व वाहन स्वामी को प्राथमिक चिकित्सालय बॉक्स, टूल बॉक्स एवं गैसोलीन आदि की जाँच करा लेनी चाहिए । वाहन स्वामियों की सुरक्षा हेत कछ सरक्षा नियम निम्नवत् दिए गए ह
1 . वाहन चालक सड़क पर अपने बाएँ चलें और खासकर दूसरी तरफ से आ जाने दें ।
2 . वाहन चालक को गाड़ी मोड़ते समय वाहन की गति धीमी रखनी चाहिए ।
3. खासकर दूसरी तरफ से आ रहे वाहन को Pr बाल हेलमेट पहनने चाहिए तथा चार पहिया वाहन चालकों एवं आगे तथा पीछे की सीट पर बैठने वाले व्यक्तियों को सीट बेल्ट अवश्य चाहिए ।
4 . वाहन की गति निर्धारित सीमा तक ही रखी जानी चाहिए . विशेष रूप से स्कूल , अस्पताल एवं कालोनी आदि क्षेत्रों में ।
5 . सभी वाहनों को दूसरे वाहनों से एक निश्चित दूरी बनाकर चलना चाहिए । ।
6 . पैदल यात्रियों को भी सड़क पर चलने के नियम से परिचित होना चाहिए , जैसे क्रॉसवांक एवं जेब्रा क्रॉसिंग का उपयोग ।
7 . वाहन चालक द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन करने जैसे क्रासिंग पर लाल पीली बत्ती पार करना एवं बिना संकेत दिए गली बदलना अथवा तीन सवारी के साथ दो पहिया वाहन चलाना धारा 199 के साथ मोटर यान अधिनियम , 1988 की धारा 177 के तहत दण्डनीय अपराध है । प्रथम बार अपराध करने पर 100 रु० एवं दूसरी बार या अनुवर्ती अपराध करने पर दण्डस्वरूप 300 रु० की धनराशि निर्धारित है ।
8 . सार्वजनिक स्थान पर सड़क सुरक्षा , ध्वनि नियंत्रण और वायु प्रदूषण के विहित मानकों का उल्लंघन करने पर मोटर यान अधिनियम , 1988 की धारा 190 ( 2 ) के तहत प्रथम बार अपराध करने पर 1000 रु० तथा दुसरी बार या अनुवर्ती अपराध करने पर दण्डस्वरूप 2 , 000 रु० की धनराशि निर्धारित है । अवयस्क व्यक्ति द्वारा दो पहिया अथवा चार पहिया वाहन चलाना अपराध की श्रेणी में आता है , साथ ही प्रत्येक व्यक्ति को अपने वाहन का बीमा निर्धारित अवधि के अन्तर्गत अवश्य करा लेना चाहिए । बिना बीमा के वाहन चलाना मोटर अधिनियम , 1988 की धारा 146 के साथ - साथ धारा 196 के तहत दण्डनीय अपराध है जिसके लिए दण्डस्वरूप 1000 रु० की जुनि की राशि निर्धारित है । सड़क पर चलने वाले पैदल यात्रियों के साथ - साथ दो पहिया एवं चार पहिया वाहन चलाने वाले चालकों द्वारा यातायात के नियमों का सही ढंग से पालन करने एवं सुरक्षा उपायों को अपनाने पर वाहन से होने वाली दर्घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है ।
By आलोक वर्मा