भारतीय संविधान में शिक्षा
पन्द्रह अगस्त सन् 1947 को भारत ब्रिटिश दासता से स्वतन्त्र हुआ । स्वतन्त्रता के उपरान्त 26 जनवरी सन् 1950 को भारतीय संविधान लागू किया गया । भारत के संविधान को विश्व का सबसे बड़ा सिद्धान्तों के साथ - साथ नागरिकों के मूल अधिकारों व मूल कर्तव्यों को भी स्पष्ट किया गया है । सन् 2006 में हुए संशोधन के उपरान्त इसमें 26 भागों में विभक्त 480 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियाँ हैं । भारतीय जनमानस की आशाओं के इस सजीव प्रतिविम्य में शिक्षा को एक महत्वपूर्ण स्थान दिया जाना स्वाभाविक या । इसीलिए भारतीय संविधान में अनेक शैक्षिक विषयों को सम्मिलित किया गया है । भारतीय संविधान के खण्ड तीन तथा चार में शिक्षा सम्बन्धी अनेक प्रावधान किये गये हैं । यहाँ यह इंगित करना उचित होगा कि इन प्रावधानों में प्रयुक्त शब्द ' राज्य ' ( State ) के अन्तर्गत जब तक अन्यथा इंगित न हो , भारत की सरकार व संसद तथा राज्यों की सरकार व विधान मंडल तथा सभी स्थानीय व अन्य संस्थाएँ सम्मिलित है । इसके अतिरिक्त भारत के संविधान में केन्द्र तथा राज्यों के शैषिक उत्तरदायित्वों को स्पष्ट रूप से विभाजित कर दिया गया है । प्रारम्भिक शिक्षा का मूल अधिकार अल्पसंख्यकों की शिक्षा , शिक्षा अधिकारों में समानता , अनुसूचित जाति व जनजाति के यालकों की शिक्षा , धार्मिक शिक्षा की स्वतन्त्रता , शिक्षा के माध्यम , हिन्दी भाषा के विकास आदि के सम्बन्ध में संविधान में विशेष प्रावधान किये गये हैं । वर्ष 1950 में संविधान लागू होने के उपरान्त परिस्थितिओं की मांग को देखते हुए संविधान में अनेक संशोधन किये गये हैं । यथा सम्भव अद्यतन संशोधित संवैधानिक प्रावधानों को समाहित करते हुए प्रस्तुत अध्याय में भारतीय संविधान में शिक्षा के सम्बन्ध में किये गये विभिन्न प्रावधानों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है ।"स्वतन्त्र भारत के संविधान में शिक्षा के सम्बन्ध में अनेक प्रावधान किए गये हैं । राज्यों व केन्द्रों के संवैधानिक कर्तव्यों तथा अधिकारों को स्पष्ट किया गया है ।"
- शिक्षा का अधिकार - संविधान के अनुच्छेद 21 में शिक्षा के अधिकार को एक विवक्षित अधिकार के रूप में सम्मिलित किया गया है । जबकि अनुच्छेग 21 क में निःशुल्क व अनिवार्य प्रारम्भिक शिक्षा को एक मूल अधिकार स्वीकार किया गया है ।
- शैशवपूर्ण देखभाल तथा शिक्षा - संविधान के अनुच्छेद 45 के अनुसार छह वर्ष तक की आयु के सभी बालक बालिकाओं को शैशवपूर्ण देखभाल तथा शिक्षा प्रदान करने का उत्तरदायित्व राज्य को सौंपा गया है ।
- अल्पसंख्यकों की शिक्षा - संविधान के अनुच्छेद 30 के अनुसार धर्म अथवा भाषा के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय अपनी पसन्द की शिक्षा प्राप्त करने के लिए शिक्षा संस्थाएं खोल सकते हैं ।
- शिक्षा के समान अवसर- अनुच्छेद 29 में व्यवस्था की गई है कि जाति , धर्म , भाषा आदि के आधार पर किसी भी व्यक्ति को शिक्षा संस्था में प्रवेश के लिए रोका नहीं जा सकता है ।
- अनुसूचित जाति व जनजाति की शिक्षा - संविधान के अनुच्छेद 46 में अनुसूचित जाति , जनजाति तथा समाज के अन्य कमजोर वर्गों की शैक्षिक व आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने का उत्तरदायित्व राज्य को दिया गया है ।
- धार्मिक शिक्षा की स्वतन्त्रता - संविधान के द्वारा शिक्षा संस्थाओं में किसी धर्म विशेष की शिक्षा प्रदान करने पर पाबन्दी लगाई गई है । अनुच्छेद 28 में यह व्यवस्था करते हुए छात्रों को धार्मिक शिक्षा की स्वतन्त्रता सुनिश्चित की गई है ।
- मातृ भाषा में शिक्षा - अनुच्छेद 350 - A में भाषायी अल्पसंख्यकों के लिए उनकी मातृ भाषा में प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने का संवैधानिक उत्तरदायित्व राज्य को सौंपा गया है ।
- हिन्दी भाषा का विकास - भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 में हिन्दी भाषा के विकास ब प्रचार - प्रसार का उत्तरदायित्व केन्द्र को दे दिया गया है ।
- स्त्रियों व पिछड़ा वर्ग की शिक्षा - संविधान के अनुच्छेद 15 ( 3 ब 4 ) में महिलाओं तथा शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान करने पर किसी प्रकार की रोक न लगाने की व्यवस्था की गई है ।
- केन्द्र तथा राज्यों के शैक्षिक अधिकार - छब्बीस जनवरी सन् 1950 को लागू संविधान में कुछ विशिष्ट बातों को छोड़कर शिक्षा सम्बन्धी कानून व व्यवस्था के अधिकार राज्यों को दे दिये गये थे । केन्द्र को राष्ट्रीय महत्व की शिक्षा संस्थाएं केन्द्रीय विश्वविद्यालयों , उस शिक्षा व अनुसंधान के स्तर आदि विषयों पर कानून बनाने तथा व्यवस्था करने का अधिकार दिया गया था । परन्तु सन् 1977 में किए गए संविधान संशोधन के द्वारा शिक्षा को समवर्ती सूची में सम्मिलित कर दिया गया है । अतः अब शिक्षा सम्बन्धी विषयों पर केन्द्र व राज्य दोनों को ही अपने - अपने ढंग से कानून व व्यवस्था का अधिकार प्राप्त है । परन्तु केन्द्र व राज्यों के कानूनों में विरोध होने पर केन्द्र का कानून प्रभावी माना जायेगा ।