डिसग्राफिया यानि लेखन विकार by Alok Verma

      डिसग्राफिया यानि लेखन विकार
                सिग्राफिया क्या है ? 
डिसग्राफिया सुसंगत किया सुसगत रूप से न लिख पाने की एक अक्षमता है और ये एक बीमारी की पहचान के रूप में चिह्नित है । डिसग्राफिया एक खास की सीखने की अक्षमता है जो लेखन के कौशल पर असर डालती इसमें स्पेलिंग , हस्तलेखन और काम्प्रीहेन्शन यानि अवधारणात्मक शब्दों , वाक्यों और पैराग्राफों को संयोजित करना ) जैसे कौशल बाधित होते हैं । लेखन का सम्बन्ध भाषा को समझने और इस्तेमाल करने के कौशल से जुड़ा है । जिन बच्चों में डिसग्राफिया पाया जाता है उनकी लेखन प्रक्रिया कठिन और धीमी होती है । डिस्लेक्सिया और डिसकैलकुलिया जैसी सीखने की अन्य अक्षमताओं की तुलना में , डिसग्राफिया के बारे में कम मालनात हैं और इसका कम ही पता चल पाता है । अन्य लक्षण इस पर हावी हो सकते हैं । इसके अलावा इस समस्या की पहचानने के लिए कोई तयशुदा परीक्षण भी उपलब्ध नहीं है

डिसग्राफिया नहीं है 
समझना महत्त्वपूर्ण है कि धीमी और खराब राइटिंग , डिसग्राफिया का संकेत नहीं है । ये भी संभव हो सकता है कि बच्चे को सुनने में समस्या हो और वो कही हुई बात को न सुन पाता हो और जैसा सुनता हो वैसा ही लिखने की कोशिश करता हो । सुनने की समस्या का पता लगाने के लिए ऑडियोमिट्री टेस्ट कराया जा सकता है । 

संकेत 

डिसग्राफिया के संकेत हर बच्चे में अलग अलग हो सकते हैं और इसकी गंभीरता भी हर अवस्था में अलग अलग हो सकती है ।

पूर्व प्राथमिक या प्री - 

स्कूल पेंसिल को सहजता से पकड़ना । बच्चा पेंसिल को जोर से पकड़े रहता है या अटपटे ढंग से पकड़ता है । / अक्षरों और संख्याओं के आकार बनाना । अक्षरों और शब्दों के बीच एक सुसंगत या सिलसिलेवार स्पेस बनाए रखना । बड़े यानि अपरकेस ( कैपीटल लैटर्स ) और छोटे यानि लोअरकेस ( स्मॉल लेटर्स ) अक्षरों की समझ होना । एक रेखा या हाशियों के बीच में लिखना या चित्र बनाना । लंबी अवधि तक लिखना । 

प्राइमरी और मिडिल स्कूल 

स्पष्ट रूप से यानि साफ - साफ लिखना ।
; प्रवाहपूर्ण लेखन और छपाई वाले शब्दों की तरह लिखना । 
लिखते समय शब्दों को जोर - जोर से बोलना ।
लिखने के काम में अत्यधिक तनाव की वजह से जो लिखा गया है , उसे समझना । नोट्स लेना ।
लिखते समय नये शब्द या समानार्थी शब्दों के बारे में सोचना । 
पूरे वाक्य बनाना कुछ शब्द छोड़े जा सकते हैं या अधूरे रह सकते हैं । 


किशोर और युवा 

लिखित संचार में विचारों को संगठित करना । 
पूर्व लिखित विचारों को फिर से देखना । व्याकरण के लिहाज से सही और सुव्यवस्थित वाक्य बनाना । 
कारण 

शोधकर्ताओं को डिसग्राफिया की मटीक वजह का पता नहीं चल पाया है लेकिन उन्होंने पाया है कि सूचना को सही ढंग से प्रोरोस न कर पाने या सूचना को सटीक संदेश में न बदल पाने की मस्तिष्क की अक्षमता की वजह से ऐसा हो सकता है 

पहचान :-
पहचान अभिभावक और शिक्षक , प्रो स्कूल में ही बच्चे में डिसग्राफिया के लक्षण देख सकते हैं । लेकिन अधिकांश मौकों पर ये चिह्न नजर नहीं आते हैं । जितना जल्दी स्थिति का पता चल जाए और उसका समाधान ढूँढ लिया जाए उतना ही आसान बच्चे के लिए इस कठिनाई से निजात पाना रहता है । 
विशेषज्ञ कुछ खास आकलन करते हैं और राइटिंग के टेस्ट लेते हैं । इससे मस्तिष्क की संदेश भेजने की क्षमता का पता चलता है । 

उपचार

डिसग्राफिया का कोई निश्चित इलाज नहीं है । हालांकि , ऐसे वैकल्पिक तरीके भी हैं जो बच्चे को उसकी लेखन क्षमता सुधारने में मदद कर सकते हैं । आप विशेष शिक्षा विशेषज्ञों की मदद लेकर सीखने के अलग - अलग तरीकों को प्रयुक्त कर देख सकते हैं और ये पता कर सकते हैं कि आपके बच्चे के लिए कौन सा तरीका बेहतर है ।

देखरेख 

अभिभावक और विशेषज्ञ एक साथ काम कर सकते है और निम्न में से कुछ वैकल्पिक तरीके इस्तेमाल कर सकते हैं • अलग - अलग पेंसिल और पेन का इस्तेमाल करके देखें और जो सबसे सुविधाजनक और सहज हो , उससे काम करें ।
साफ लाइनों वाले पेज पर लिखें और अक्षर बनाने के लिए पर्याप्त जगह लें और लाइनों के बीचोबीच लिखें । ग्राफिक्स , चित्रों और स्वरविज्ञान का सहारा लेकर बच्चे लिखने के लिए अक्षरों और शब्दों को पहचान सकते हैं । लिखने की योग्यता में सधार के लिए सहायक तकनीकी और आवाज वाले सॉफ्टवेयरों ( शब्द संयोजन के उपकरण और ऑडियो टूल ) का इस्तेमाल । एसाइनमेंट पूरा करने या टेस्ट के लिए शिक्षक अतिरिक्त समय दें । पाठों को रिकॉर्ड करने के लिए टोपरिकॉर्डर का इस्तेमाल करें और धीरे - धीरे सुनकर लिखें ।


डिसकैलकुलिया यानि गणना करने में असक्षमता

डिसकैलकुलिया ( गणित की समस्या ) क्या है ?

डिसकैलकुलिया सीमा से जुड़ी एक विशिष्ट विकलांगता है जिसमें बच्चा अकों के बारे में बुनियादी बातें याद नहीं रख पाता है और गणित के सवालों को बहुत देर से सम्झता है या गलत करता है । ये लक्षण हर बच्चे में अलग - अलग हो सकते हैं । कुछ बच्चों को गणित की वर्ड प्रॉब्लम करने में मुश्किल आती है तो कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें हल तक पहुँचने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया सम्झने में मुश्किल होती है और कुछ ऐसे भी होते हैं जो खास तरह की गणितीय अवधारणाओं को समझ ही नहीं पाते है । 

क्या नहीं है ? 

आमतौर पर देखें तो ज्यादातर बच्चों के लिए गणित एक मुश्किल विषय हो सकता है और कुछ बच्चे धीरे - धीरे ही सीख पाते हैं , उन्हें लगातार दोहराना और अभ्यास करना होता है , वे अवधारणाओं को याद कर लेते । हैं । 

कछ बच्चों को गणित चुनौतीपूर्ण लग सकती है और इसलिए नर्वस हो सकते हया तनाव में आ सकते है , इसका असर उनकी परीक्षा में किए गए प्रदर्शन पर पड़ता है । 
ये डिसकैलकुलिया के चिह्न नहीं है । 

चिह्न 

हर बच्चे की सीखने की रफ्तार अलग होती है । औसत बच्चे को गणितीय अवधारणाओं को समझने के लिए समय और नियमित अभ्यास की जरूरत होती है । लेकिन अगर सीखने में कोई एक खास या चिह्नित करने लायक अंतराल या देरी आने लगती है और आप ये नोट करते हैं कि अतिरिक्त कोचिंग और ट्रेनिंग के बावजूद बच्चे को समस्या आ रही है तो हो सकता है कि बच्चे को डिसकैलकुलिया हो । 

हर अवस्था और हर बच्चे में लक्षण अलग - अलग होते हैं । 

प्री - स्कूल या प्लेग्रुप या नर्सरी
गिनती सीखना ।
छपे हुए अंकों को पहचानना । 
वास्तविक जीवन की चीजों से अंकों का संबंध जोडं पाना ( मिसाल के लिए 3 घोड़े , 5 पेंसिलें आदि ) । 
न्यूमेरिकल को याद करना ।
चिन्हों, पैटर्न , आकार को पहचानना और चीजो को व्यवस्थित के गेंदें एक जगह चौकोर चीजें अलग जगह आदि ) । 

प्राइमरी और मिडिल स्कूल 

अंकों और चिह्नों को पहचानना । 
गणित के सवाल सीखना - जोड़ , घटाव , गुणा , भाग । 
गणित में वर्ड प्रॉब्लम हल करना । 
चीजों की माप करना । मैंटल गणित मैथ ) करना ।
फोन नंबर याद रखना । 
उन खेलों में शामिल होना जिननें अंक होते हैं या जिनमें योजना यावं की जरूरत होती है । 

किशोर और युवा 

कीमतो की गणना करना , मूल्य आकना । 
बेसिक गणित से आगे सीखना । 
जमा खाते को समझना , उसका प्रबंध करना ।
बीजो को नाप करना । 
समय , स्थान और दूरी की अवधारणाओं को समझना । । 
मैंटल गणित करना यानि दिमाग में गणनाएँ करने में सक्षम हेना । 
एक ही सवाल को अलग - अलग तरीकों से हल करने के तरीके खोजन उन गतिविधियों में भागीदारी करना जिनमें गति और दरी का अ किया जाता है । जैसे - खेल और ड्राइविंग सीखना । बच्चे में भरोसे हो सकती है और वह इन गतिविधियों से परहेज कर सकता है । 

कारण

शोधकर्ताओं को अभी डिसकैलकलिया की सटीक वजह काप चला है । फिर भी मानते है कि जीन्स और आनलशिकी जस विकार वजह हो सकती है ।

पहचान। 

डिसकैलकुलिया का कोई विशेष टेस्ट नहीं है । बाल रोग या मनोवैज्ञानिक इस स्थिति का पता करने के लिए कुछ निश्चित आकलन या टेस्ट कर सकते हैं ।


उपचार

इसका कोई एक अकेला टेस्ट नहीं है । स्थिति का पता लगाने के लिए कई आकलन और कई तरह के टेस्ट किए जा सकते है । 

मेडिकल हिस्टी

सीखने की अन्य समस्याओं या एडीएचडी के साथ डिसकैलकुलिया भी हो सकता है । इसलिए विशेषज्ञ , विकार की पहचान करने या उसका इलाज करने से पहले बच्चे के चिकित्सा इतिहास की जाँच करते हैं । 

पहचान

विशेष शिक्षा से जुड़ा विशेषज्ञ विकार की जाँच के लिए कुछ विशिष्ट टेस्ट करता है । बच्चे की पढ़ाई - लिखाई का प्रदर्शन भी ध्यान में रखा जाता है । सीखने के वैकल्पिक तरीके और तकनीकें इस्तेमाल की जाती हैं जिनसे बच्चा उस स्थिति से निपटने में सक्षम हो सके । 

स्कूल में सहायता - 

अभिभावकों को अपने बच्चे की समस्या के बारे में शिक्षकों को बताना चाहिए और मदद लेनी चाहिए । शिक्षक गणित पढ़ाने के लिए कोई वैयक्तिक योजना तैयार कर सकते हैं । बच्चे को अतिरिक्त सहायता दी जा सकती है । मिसाल के लिए उसे टेस्ट में अतिरिक्त समय दिया जाए , या कैलकलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए। शिक्षक बच्चे की तरक्की का रिकॉर्ड सकते है और यदि उनका पिछला तरीका कारगर नहीं रहता तो सिखाने के तरीके में बदलाव भी कर सकते हैं । 

हस्तक्षेप पर प्रतिक्रिया - 

कुछ स्कूल जन बच्चों को इस प्रयोग को चलाते हैं जिसकी सीखने की रफ्तार कम है । छोटे ग्रुप को अतिरित्ता कोचिंग दी जाती कभी - कभी अकेले बच्चे को भी ये जरूरत पर निर्भर करता है ।


मनोवैज्ञानिक या काउंसलर - 

किसी भी तरह की सीखने की असमता बने के आत्मसम्मान और भरोसे पर असर डाल सकती है जिसका नतीजा तनाव और खराहट भी हो सकता है । एक ननावेज्ञानिक या कारसलर बच्चे को इस स्थिति से निपटने में मददगार हो सकता है ।


देखभाल

अभिभावक के तौर पर , आपका प्रेम और आपकी सहायता बच्चे को इस समस्या से निजात पाने के लिए अनिवार्य है । 
ये भी जरूरी है कि हर बच्चा अपने आप में विशिष्ट है और उसकी अपनी क्षमताएँ और प्रतिभाएँ हैं । आपको उसके लिए सीखने के कई सारे तरीधे हुँइने पड़ सकते है , उन्हें अमल में लना पड़ सकता है । इनसे बच्चा अनं गणितीय बामता में सुधार कर सकता है । 
आप अपने बच्चे की मदद निग्न तरीकों से भी कर सकते हैं 

डिसकैलकुलिया को समझकर - 

आप डिसकैलकुलिया के बारे में पढ़े और जाने । सुधार की दिशा में जागरूकता और सना पहला कदम है । बच्चे के प्रति अपने प्यार और समर्थन और सहायता का इजहार करें । उसे महसूस हो कि आप उससे प्यार करते हैं और उसके साथ हैं । अपने बच्चे से बात कर और उन्हें ये समझाने का अवसर दें कि आप उनकी मुश्किल को समझ रहे है । 

गणित के खेल खेलें

घरेलू चीजों जैसे खिलौने , बर्तन , थाली चम्मच , सब्जी वाफल का इस्तेमाल कर अंकों को रोजाना की गतिविधि से जोड़े । अपने बच्चे को कैलकुलेटर इस्तेमाल करने बैं । अलग - अलग तरीके इस्तेमाल करें और देखें कि आपके बच्चे को किस तरीको से सीखने में राविण है । गणित की जरूरत रोजाना के कामों में पड़ती है , इसलिए उसे पैसे और समय का महत्व याददाश्त हिसाब - किताब और प्रबंधन सिखाएँ । 

प्रोत्साहन और सहायता 

अपने बच्चे की सामर्थ्य को पहचानें और जिस किसा म उसकी दिलचस्पी है उसमें उसको प्रोत्साहित करें । इससे स्थानिक लसम्मान बढ़ेगा और उसमें भरोसा मी पैदा होगा । प्रशंसा और इस बच्चे को अपनापन और सुरक्षा महसूस होती है ।