डिस्लेक्सिया के कारण. by ALOK VERMA

डिस्लेक्सिया के कारण

आनुवंशिक कारक - कई लोगों में डिस्लेक्सिया जन्म से ही होता है । ऐसा DCDC2 जीन्स में डिफेक्ट होने के कारण भी होता है जो रीडिंग परफॉरमेंस से जुड़ा हुआ है ।

अन्य कारक कुछ लोगों को पैदा होने के बाद डिस्लेक्सिया होता है । इस डिस्लेक्सिया का सबसे आम कारण मस्तिष्क की चोट , स्ट्रोक या कुछ अन्य प्रकार के आघात होते हैं ।

जोखिम कारक - डिस्लेक्सिया का पारिवारिक इतिहास भी हो सकता है जहाँ मस्तिष्क के उन हिस्सों में समस्याएँ जो पढ़ने में सक्षम होते हैं ।

डिस्लेक्सिया के प्रकार

1 - प्राथमिक डिस्लेक्सिया - आम तौर पर अक्षर और संख्या पहचान करना , पढ़ना , अंक गणित और अन्य वे गतिविधियाँ जो मस्तिक के बायें हिस्से से सचारित होती हैं , उनमें ये समस्याएँ आती हैं ।

2 - दुनिया भर के स्कूलों में सामान्य शिक्षक विधियों में मुख्यतः बायीं तरफ के मस्तिष्क का उपयोग होता है । जिसमें डिस्लेक्सिया से ग्रस्त बच्चों को पढ़ाई में समस्या आती है ।

3 - यह डेवलपमेंटल डिस्लेक्सिया जो भ्रूण में मस्तिष्क के विकास में समस्याओं की वजह से होता है , जिसमें शब्दों की पहचान और उनकी वर्तनी की समस्याएँ आती हैं ।

4 - हाल की इस स्थिति की कठिनाइयाँ उम्र के साथ सुधर जाती हैं ।

5 - बच्चा बचपन में डिस्लेक्सिस लक्षण का अनुभव कर सकता है परन्तु उचित मार्गदर्शन हो तो कॉलेज में प्रदर्शन में सुधार आ सकता है ।

6 - ऐसे बच्चे आम तौर पर ध्वनि विज्ञान में अच्छे होते हैं ।

ट्रामा डिस्लेक्सिया

यह एक गंभीर बीमारी है ये मस्तिष्क की चोट के कारण होता है ।

इसके लक्षण छोटे बच्चों में निरंतर फ्लू , सर्दी या कान के संक्रमण से सुनने की क्षमता के नुकसान के कारण विकसित हो सकते हैं ।

इसमें बच्चे शब्दों की ध्वनि नहीं सुन पाते हैं इसलिए उन्हें शब्द बोलने , वर्तनी पढ़ने और लिखने में कठिनाई होती है ।

बड़े बच्चों या वयस्कों में मस्तिष्क की बीमारी की वजह से ट्रामा ४ डिस्लेक्सिया विकसित होता है , जो भाषा को समझने की क्षमता को प्रभावित करता है ।

ये लोग आम तौर पर आघात से पहले पढ़ने - लिखने और शब्दों की वर्तनी करने में ठीक होते हैं ।

डिस्लेक्सिया होने से रोका जा सकता है

डिस्लेक्सिया रोकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता , खासकर अगर ये आनुवंशिक हैं ।

यद्यपि प्रारंभिक चरण में निदान और उपचार शुरू कर दिए जाएँ तो इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं ।

डिस्लेक्सिया से ग्रस्त बच्चों को जितनी जल्दी विशेष शिक्षक सेवाएँ मिलती हैं , उतनी ही जल्दी वह पढ़ना - लिखना सीखते हैं ।