डिस्लेक्सिया क्या है ?
जस्लेक्सिया कोई मारी नहीं है और न ही ये कोई मानसिक अयोग्यता है
डिसलेक्सिया पढ़ने - लिखने से सम्बन्धी एक विकार है जिसने बच्चो को शब्दों को पहचानने , पढ़ने याद करने और बोलने में परेशानी आती है ।
वे कुछ अक्षर और शव्दों को उल्टा पढ़ते है और कुछ अक्षरों का उच्चारण भी नहीं कर पाते । .
डिस्लेक्सिया को कंट्रोल किया जा सकता है . इसके लिए बच्ची पर - कोई मानसिक बीमारी नहीं है ।
डिस्लेक्सिया के लक्षण
1 नए शब्दों को धीमे सोखना । .
2 नर्सरी की पिता को पचने में कठिनाई ।
3 कविताओं वाले खेल खेलने में कठिनाई ।
4 सभायें प्रबंधन करने में कविता ।
5 ऊंची आवाज में पढ़ने में कठिनाई ।
6 याद रखने में समस्या ।
7 कहानी को संक्षिप्त करने में कठिनाई ।
8 उम्र के हिसाब से अपेक्षित स्तर से कम पढ़ पाना ।
9 . तेजी से दिए गए निर्देशों को समझने में कठिनाई ।
डिस्लेक्सिया में क्या करें ?
डिस्लेक्सिया ( Dyslexia ) से प्रभावित बच्चों को पढ़ाई में बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है । इसका समाधान ये नहीं है कि आप बच्चों को पढ़ाई में ज्यादा मेहनत करने के लिए जोर दें । इसके बदले आप को अपने बच्चे को पढ़ने के तरीकों में बदलाव लाने की जरूरत पड़ेगी ।
आपका बच्चा सामान्य बच्चों से भिन्न है । आपको उसकी गलतियों को नजरंदाज करना होगा ताकि आपके बच्चे का मनोबल बना रहे और वह अपने आप में विश्वास न खोये ।
अगर आपका बच्चा पढ़ी हुई चीजें भूल जाये तो आप उसको hint दें । फिर भी उसे याद न आये तो आप उसे उत्तर बता दें , लेकिन बिना दूसरे बच्चों से तुलना किये और बिना डांटे ।
आपके बच्चे के लिए भूल जाना बहुत स्वाभाविक है । इसमें उसकी कोई गलती नहीं है ।
बच्चे से ज्यादा मेहनत कराने से उसमें शायद ही कोई सुधार हो । लेकिन इससे आप का बच्चा हताश हो जायेगा और पढ़ाई से दूर भागने लगेगा । इससे नुकसान ज्यादा और फायदा कम होगा ।
पढ़ाते वक्त ये काम कभी न करें ।
कभी - कभी पढ़ाते वक्त अनजाने में माँ - बाप ऐसे काम कर जाते हैं जिनकी वजह से बच्चों की डिस्लेक्सिया ( Dyslexia ) की समस्या और बढ़ जाती है । पढ़ाते वक्त बच्चों के साथ नीचे दिए काम कभी न करें ।
डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों को इस तरह बनायें पढाई में अव्वल
1 घर के माहौल को बच्चे की पढ़ाई के लिए अनुकूल बनायें ।
2 बच्चों के साथ हर दिन समय बिताएँ । उनसे ढेर सारी बातें करें । बच्चों - के प्रारम्भिक जीवन में उनसे बातें करने से उनकी बुद्धि का प्रखर विकास होता है ।।
3 पढ़ाई के लिए एक निश्चित दिनचर्या का निर्धारण करें । डिस्लेक्सिया ( Dyslexia ) से पीड़ित बच्चे पढ़ाई से भागने की कोशिश करते हैं । क्योंकि दूसरे बच्चों की तुलना में पढ़ाई उन्हें सहजता से नहीं आती है । निश्चित दिनचर्या का निर्धारण करने से आप को हर दिन बच्चों को पढ़ाई के लिए बाध्य नहीं करना पड़ेगा । एक निर्धारित दिनचर्या के कारण वे निश्चित समय पर ( बिना कुदकुढ़ाये ) खुद पढ़ने बैठ जायेंगे ।
4 . बच्चों की मेमोरी को बूस्ट करने के उपाये करें ।
5 . घर को इस तरह व्यस्थित करें ताकि बच्चे में पढ़ाई को लेकर रुचि बढ़े ।
6 . डिस्लेक्सिया ( Dyslexia ) से पीड़ित बच्चों का पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से मनोबल कम रहता है । आप अपनी तरफ से वे तरीके अपनायें जिनसे पढ़ाई में बच्चों का मन लगे और उनका आत्मविश्वास बदे । ।