प्राकृतिक संकट तथा आपदायें
आपदा का सामान्य अर्थ विपदा या संकट से होता है । इन्हें दो भागों में बाँटा जा सकता है
( ii ) मानवीय आपदा ( मानवजनित भूस्खलन , रसायनों का प्रयोग ) में बाँटा जा सकता है
प्राकृतिक आपदाओं को मुख्य रूप से चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता हैं
( क ) वायुमण्डलीय : • बर्फानी तूफान • तड़ितझंझा • तड़ित • टॉरनेडो • सूखा • पाला , लू , शीतलहर
( ख ) भौमिक : • भूकम्प • ज्वा ामुखी • भूस्खलन • हिमघाव • अवतलन • मृदा अपरदन
( ग ) जलीय : • बाढ़ • ज्वार • महासागरीय धाराएँ • तूफान महोर्मि • सुनामी .
भारत में प्राकृतिक आपदाएँ
भारत में प्रमुख रूप से निम्नलिखित प्राकृतिक आपदाएँ देखने को मिलती हैं
( क ) भूकम्प
भूकम्प सबसे ज्यादा अपूर्वसूचनीय और विध्वंसक प्राकृतिक आपदा है । जब आन्तरिक शक्तियों के द्वारा धरातल का कोई भाग हिलता है तो उसे भूकम्प कहते हैं । भूकम्प से सामान्य तात्पर्य भूपटल के कम्पन्न से है । इस उत्पन्न करने में मानवीय प्रक्रियाओं का भी योगदान होता है ।
भूकम्प के कारण -
• विवर्तनिकता
ज्वालामुखी क्रिया
समस्थितिक समायोजन
भूपटल का संकुचन
जलीय भार ।
भारत में 26 जनवरी , 2011 को कच्छ ( गुजरात ) में आया भूकम्प सबसे खतरनाक था जिसमें लगभग 80 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई । इसी प्रकार 1967 व 1993 में महाराष्ट्र में आए भूकम्प ने प्रायद्वीप तके भूकम्प रहित होने की अवधारणा को बदल दिया ।
राष्ट्रीय भूभौतिकी प्रयोगशाला , भारतीय भूगर्भीय सर्वेक्षण , मौसम विज्ञान विभाग और इनके साथ कुछ समय पूर्व बने राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन संस्थान ने भारत में आए 1200 भूकम्पों का गहन विश्लेषण किया और भारत को पाँच ( 5 ) भूकम्पीय क्षेत्रों ( Zones ) में बाँटा है
( 1 ) अत्यधिक क्षति जोखिम क्षेत्र
( 2 ) अधिक क्षति जोखिम क्षेत्र
( 3 ) मध्यम क्षति जोखिम क्षेत्र
( 4 ) निम्न क्षति जोखिम क्षेत्र
( 5 ) अति निम्न क्षति जोखिम क्षेत्र ।
( ख ) सुनामी
भूकम्प और ज्वालामुखी से महासागरीय धरातल में अचानक हलचल उत्पन्न होती है और महासागरीय जल का विस्थापन होता है । परिणामस्वरूप लम्बवत् ऊँची तरंगें पैदा होती हैं जिन्हें सुनामी ( बन्दरगाह लहरें ) कहा जाता है । सुनामी का प्रमुख कारण समुद्र तली में भूकम्प का आना होता है । 26 दिसम्बर , 2004 को हिन्द महासागर में आई सुनामी अब तक की सबसे बड़ी व खतरनाक सुनामी थी जिसमें 3 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी ।
( ग ) उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात
उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात कम दबाव वाले उग्र मौसम तन्त्र हैं और 30° उत्तर तथा 30° दक्षिण अक्षांशों के बीच पाए जाते हैं । यह साधारणतया 500 से 1000 किमी क्षेत्र में फैला होता है और इसकी लम्बवत् ऊँचाई 12 से 14 किमी हो सकती है । इसमें पवनें परिधि से केन्द्र की ओर चलती हैं । भारत में सर्वाधिक चक्रवात बंगाल की खाड़ी में अक्टूबर और नवम्बर के मध्य उत्पन्न होते हैं ।
( घ ) बाढ़
वर्षा ऋत में जब नदी में जल की मात्रा अपनी सामर्थ्य से अधिक हो जाती है तब जल नदी के दोनों पाश्वों पर से निकलकर दूर - दूर क्षेत्र में फैल जाता है और क्षेत्र को जलमग्न कर देता है जिसे बाढ़ कहते हैं । बाढ़ का सबसे प्रमुख कारण अत्यधिक वर्षा को माना जाता है । इसके अतिरिक्त अन्य ( बाँधों का टूटना , लहरें आना ) कारण भी इसके लिए उत्तरदायी होते हैं । भारत में 4 करोड़ हैक्टेयर भूमि को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है । देश में असम , पश्चिम बंगाल , बिहार , पूर्वी उत्तर प्रदेश , ओडिशा , तमिलनाडु , आन्ध्र प्रदेश , उत्तर गुजरात आदि प्रमुख बाढ़ प्रभावित क्षेत्र हैं ।
( ङ ) सूखा
सूखा ऐसी स्थिति को कहा जाता है जब लम्बे समय तक कम वर्षा , अत्यधिक वाष्पीकरण और जलाशयों तथा भूमिगत जल के अत्यधिक प्रयोग से भूतल पर जल की कमी हो जाए ।
सूखे के प्रकार -
सूखा निम्नलिखित प्रकार का होता है
1 . मौसम विज्ञान सम्बन्धी सूखा
2 . कृषि सूखा
3 . जलविज्ञान सम्बन्धी सूखा
4 . पारिस्थितिक सूखा
भारत में सूखा - ग्रस्त क्षेत्र को मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में बाँटा गया है
( i ) अत्यधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र ( राजस्थान के जैसलमेर व बाड़मेर जिले )
( ii ) अधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र ( राजस्थान का पूर्वी भाग , महाराष्ट्र के पूर्वी भाग )
( iii ) मध्यम सूखा प्रभावित क्षेत्र ( हरियाणा , उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग , आन्तरिक कर्नाटक )
महत्त्वपूर्ण शब्दावली
1 . आपदा - प्राकृतिक व मानवीय क्रियाओं के फलस्वरूप उत्पन्न संकट ।
2 . भूकम्प - आन्तरिक शक्ति के द्वारा भूपटल का हिलना ।
3 . सुनामी - समुद्री क्षेत्र में भूकम्प के कारण तीव्र वेग वाली लहरें ।
4 . भूस्खलन - ढाल के सहारे मलवे ( अवसाद ) का तीव्र वेग से नीचे खिसकना ।
By आलोक वर्मा