महाकवि भूषण का जीवन परिचय by आलोक वर्मा

     महाकवि भूषण

जीवन - परिचय कविवर भुषण का जन्म कानपुर जिले के तिकवापुर नामक ग्राम में सन् १६१३ ई . में था । इनके पिता पण्डित रत्नाकर त्रिपाठी दुर्गा के अनन्य भक्त थे । हिन्दी के प्रसिद्ध रससित चिन्तामणि मतिराम तथा नीलकण्ठ उन्हीं के पुत्र थे । बाद में भूषण शिवाजी एवं महाराज के दरबार में भी रहे जहाँ इन्हें यथोचित सम्मान प्राप्त हुआ । भूषण इनका कवि उपाधि थी इन्हें चित्रकूट के सोलंकी महाराजा रुद्र से प्राप्त हुई थी । इनके असली नाम का पता नहीं चला अपने पारिवारिक कारणों से भूषण ने गृह त्याग दिया और वे औरंगजेब के दरबार में चले गये इनकी जीवन - लीला का अवसान सन् १७१५ ई० के लगभग माना जाता है । भूषण मध्य यगा । वीररस के श्रेष्ठ कवि हैं । विलासिता और परतन्त्रता के युग में स्वतन्त्रता , ओजस्विता , तेजस्विता । एवं राष्ट्रीयता का स्वर हम भूषण के मुख से ही सर्वप्रथम सुनते हैं ।
भूषण ने अपने समकालीन कवियों की तरह विलासी आश्रयदाताओं के मनोरंजन के लिये शंगारी काव्य की रचना न करके अपनी बीरोपासक मनोवृत्ति के अनुकूल अन्याय और संघर्ष के दमन में | तत्पर , ऐतिहासिक महापुरुष शिवाजी एवं छत्रसाल जैसे वीरनायकों का अपनी ओजस्वी कविता द्वारा लोमहर्षक गुणगान किया । यद्यपि ये अपने युग की लक्षण - ग्रन्थि परम्परा से तथा युग की प्रवृत्तियों से सर्वथा मुक्त नहीं थे , तथापि जातीय , राष्ट्रीय भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति इनके काव्य की सबसे बड़ी विशेषता रही है । सच तो यह है कि भूषण साहित्य के प्रथम राष्ट्रीय कवि हैं । भारत हिन्दू । राष्ट्र था तथा हिन्दुत्व को समाप्त करके भारत का नाश किया जा सकता था : अतः हिन्दुत्वरक्षक । भारतमाता के अमर पुत्र छत्रपति शिवाजी एवं महाराज छत्रसाल बुन्देला जैसे लोकोपकारी महापुरुषा । के चरितगायन में ही इन्होंने अपने जीवन को सार्थक समझा । इन्हीं महापुरुषों की दानशीलता , युद्ध - वीरता , दयालुता एवं धर्मपरायणता का महाकवि भूषण द्वारा उदात्त - चित्रण किया गया है । २९ चरितनायकों के शौर्य - वर्णन या वीर रसात्मक उद्गार सारी भारतीय जनता की सम्पत्ति है । इन्हा । । स्वयं कहा है - " सिवा को सराहों के सराहौं छत्रसाल को ।

" कृतित्व एवं व्यक्तित्व "

भूषण विरचित तीन ग्रन्थ उपलब्ध हैं । शिवराज - भूषण , शिवा - बावनी और छत्रसाल दशव भषण को हिन्दी साहित्य का प्रथम राष्ट्रीय कवि माना जाता है परन्तु भूषण की राष्ट्रीयता । परीक्षा देश की तत्कालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही करनी चाहिये । भूषण के समय हिन्दत्व का सन्देश ही भारतीयता और ज्वलन्त - राष्ट्रीयता का सन्देश था ।
                          By आलोक वर्मा