जगन्नाथदास ' रत्नाकर ' का जीवन परिचय by आलोक वर्मा

जगन्नाथदास ' रत्नाकर '



जीवन - परिचय

आधुनिक काल के ब्रजभाषा के कवियों में जगन्नाथदास ' रत्नाकर ' का सर्वोच्च स्थान है । इनका जन्म काशी में संवत् १९२३ ( सन १८६६ ) में एक प्रतिष्ठित वैश्य परिवार में हुआ था । इनके पिता का नाम पुरुषोत्तमदास था । इन्हें बचपन में उर्दू , फारसी , अंग्रेजी की शिक्षा मिली । बी०ए० , एल - एल०बी० करने के बाद एम० ए० ( फारसी ) की पढ़ाई माताजी के निधन के कारण पूरी न हो सकी । १९०० ई० में अवागढ़ ( एटा ) के खजाने के निरीक्षक , १९०२ ई० में अयोध्यानरेश के निजी सचिव तथा १९०९ ई० में उनकी मृत्यु के पश्चात् महारानी के निजी सचिव बने । राजदरबार से सम्बद्ध रहने के कारण इनका सहन - सहन सामंती था , लेकिन प्राचीन धर्म , संस्कृति और साहित्य में इनकी गहरी आस्था थी । प्राचीन भाषाओं का ज्ञान था तथा विज्ञान की अनेक शाखाओं में इनकी गति थी । भारत के कई प्रसिद्ध तीर्थ एवं प्रमुख स्थानों का इन्होंने भ्रमण किया । विद्यार्थी काल से ही उर्दू - फारसी में कविता लिखते थे लेकिन कालान्तर में ब्रजभाषा में रचना करने लगे । ' साहित्य - सुधानिधि ' और ' सरस्वती ' का सम्पादन , ' रसिक मण्डल ' का संचालन तथा काशी - नागरी - प्रचारिणी सभा की स्थापना एवं विकास में योग दिया । अखिल भारतीय कवि सम्मेलन तथा चौथी ओरियंटल कांफ्रेंस के हिन्दी - विभाग के सभापति बनाये गये । हरिद्वार में २१ जून , सन् १९३२ को इनका देहान्त हो गया ।

कृतित्व एवं व्यक्तित्व

आपकी प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं -
उद्धव - शतक , गंगावतरण , वीराष्टक , शृंगारलहरी . गंगालहरी तथा विष्णुलहरी । सम्पादित रचनाओं में बिहारी - रत्नाकर , हिततरंगिणी तथा सूरसागर आदि हैं ।
                 By आलोक वर्मा