भारतीय संसद के अंग (पर्यावरण) uptet by आलोक वर्मा

                 "भारतीय संसद के अंग"            
                     राष्ट्रपति 
        भारतीय संसद के तीन अंग है । 
1 राष्ट्रपति 
2 लोकसभा 
3 राज्यसभा 


                       1 ' राष्ट्रपति ' 

राष्ट्रपति से सम्बन्धित मुख्य अनुच्छेद 52 - 62 , 71 , 72 , 73 , 74 , 77 , 80 ( 3 ) , 85 , 86 , 87 , 108 , 123 , 361 
अनुच्छेद - 52 में भारत का एक राष्ट्रपति होगा । 
अनुच्छेद - 53 में संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है । 
अनुच्छेद - 54 में राष्ट्रपति का निर्वाचन 
अनुच्छेद - 55 में राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति है । 
अनुच्छेद - 56 ' राष्ट्रपति की पदावधि ' 5 वर्ष की होती है । 
अनुच्छेद - 57 ' पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता ' । भारतीय संविधन में पुनः निर्वाचन के बारे में कोई सीमा का उपबंध नहीं है । 
अनुच्छेद - 58 ' राष्ट्रपति के निर्वाचन की योग्यता ' । अनुच्छेद - 59 ' राष्ट्रपतिके पद के लिए शर्ते ' । 
अनुच्छेद - 60 ' राष्ट्रपति का शपथ ' । 
अनुच्छेद - 61 " राष्ट्रपति पर महाभियोग । " 
अनुच्छेद - 62 ' राष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि । _ _ _ 
संसदीय सरकार में राष्ट्रपति सांविधानिक अध्यक्ष होता है लेकिन वास्तविक शक्ति मन्त्रि - परिषद में निहित होती है । जिसका प्रधान प्रधानमन्त्री होता है । मन्त्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है । 75 ( 3 ) । 
अनुच्छेद - 53 में बताया गया है कि संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है । लेकिन अनुच्छेद 74 में स्पष्ट कर दिया गया है कि वह उसका प्रयोग मन्त्रि - परिषद की सहायता और मंत्रणा से ही करेगा । 
राष्ट्रपति की योग्यता - ( 58 ) कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र तभी होगा जब वह 
( 1 ) भारत का नागरिक हो । 
( 2 ) 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो ।
( 3 ) लोक सभा का सदस्य निवाचित होने की ' हो तथा किसी संसदीय निर्वाचन मण्डल में मतदा पंजीकृत होना चाहिए । 
(4) कोई लाभ का पद धारण न किया हो । ( केन्द्र या 
राष्ट्रपति का निर्वाचन 
रीति अनुच्छेद 55 
आनपातिक प्रतिनिधित्व पद्धित के अनुसार एकल संक्रया मत द्वारा - 
भारत का राष्ट्रपति ( अप्रत्यक्ष निर्वाचन ) द्वारा चुना जाता राष्ट्रपति के निर्वाचन में 
( 1 ) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य 
( 2 ) राज्य की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य 
70वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1992 के तहत 
( 1 ) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली । 
( 2 ) संघ क्षेत्र पाण्डिचेरी । 
के विधानमण्डल के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में सम्मिलित होते हैं । 
राष्ट्रपति - राष्ट्रपति के उम्मीदवार का नाम 50 मतदाताओं द्वारा प्रस्तावित और 50 मतदाताओं द्वारा समर्थित होना चाहिए । ए ( चुनाव ) 
अनुच्छेद - 71 
अनुच्छेद 71 यह उपबंधित करता है कि राष्ट्रपति और है उपराष्ट्रपति के निर्वाचन सम्बन्धी विवादों का फैसला सर्वोच्च न्यायालय करता है । 
राष्ट्रपति शपथ 
राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या ज्येष्ठतम न्यायाधीश के सामने शपथ लेगा । 
राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति को त्यागपत्र देगा और इसकी सूचना लोकसभा के अध्यक्ष को देगा । 
राष्ट्रपति पर महाभियोग 
अनुच्छेद 61 के अनुसार राष्ट्रपति पर महाभियोग का संसद किसी सदन द्वारा लगाया जा सकता है । 
( 1 ) प्रस्ताव आरोप एक संकल्प के रूप में हो । 
( 2 ) जो कि कम से कम 14 दिन की लिखित सूचना देना आवश्यक है । 
( 3 ) जिस पर सदन के कुल सदस्य संख्या के कम से कम 1 / 4 सदस्यों का हस्ताक्षर हो । 
( 4 ) उस सदन के कुल सदस्य संख्या के कम से कम 2 / 3 बहमत के द्वारा संकल्प को पारित किया गया हो । 
( 5 ) तब दूसरा सदन उस आरोप की जाँच करेगा । या किसी न्यायालय या न्यायाधिकरण के द्वारा करायेगा और वह सदन अपने सदस्य संख्या के 2 / 3 बहुमत द्वारा एक संकल्प पारित कर दें , तो आरोप सिद्ध माना जायेगा । ऐसे संकल्प का प्रभाव उसके पारित किये जाने वाले दिनांक से प्रभावी माना जायेगा । अर्थात् राष्ट्रपति को अपने पद से हटना होगा । 
( 6 ) राष्ट्रपति इस जाँच में स्वयं उपस्थिति होकर या वकील द्वारा बचाव प्रस्तुत कर सकता है । 
   भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग " संविधान के अतिक्रमण " के लिए लगाया जाता है । 
राष्ट्रपति की शक्तियाँ 
संविधान द्वारा प्रदत्त राष्ट्रपति की  शकितयों को निम्न भागों में बाँट सकते है 
राष्ट्रपति शक्तियाँ 
( 1 ) कार्यपालिका शक्ति 
( 2 ) न्यायापालिका शक्ति 
( 3 ) विधायिका शक्ति 
( 4 ) सैनिक शक्ति 
( 5 ) कूटनीतिक शक्ति 
( 6 ) आपातकालीन शक्ति
कार्यपालिका शक्ति 
अनुच्छेद 77 भारत सरकार का समस्त कार्यपालिका कायवाहा राष्ट्रपति के नाम से की जाती है ।
अनुच्छेद 73 में संघ की कार्यपालिका शक्ति का उपबन्ध है । राष्टपति देश के समस्त उच्च अधिकारियों की नियुक्त मंत्रिपरिषद के परामर्श से करता है 
जैसे - अनुच्छेद 74 में यह उपबंध है कि 
राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद होगी । वह निम्न की नियुक्ति करता है । जैसे 
शक्ति            अनुच्छेद           विषय 
शक्ति                53           संघ की कार्यपालिका शक्ति 
विस्तार              73          संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार 
नाम से                77         भारत सरकार के कार्य का संचालन राष्ट्रपति के नाम से 
( 1 ) प्रधानमंत्री ( अनु० 75 ( 1 ) ) 
( 2 ) प्रधानमंत्री के सलाह से अन्य मंत्रीगण की । ( अनु० 75 ( 1 ) ) 
( 3 ) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की , मुख्य न्यायाध पीश सहित । ( अनु० 124 ( 2 ) ) 
( 4 ) उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की ( अनु० 217 ) 
( 5 ) राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति ( अनु० 155 ) 
( 6 ) भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक । ( अनु० 76 ) 
( 7 ) भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक । ( अनु० 148 ) 
( 8 ) लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष + सदस्यों की । ( अनु० 316 ) 
( 9 ) अनुसूचित तथा आदिम जातियों के लिए विशेष अधि कारी । 
( 10 ) अनुसूचित और पिछड़े वर्गों के लिए आयोग का गठन । ( अनु०340 ) 
( 11 ) वित्त आयोग का गठन करता है । ( अनु० 280 ) 
( 12 ) मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य सदस्य ( अनु० 324 ( 2 ) ) 
( 13 ) केन्द्रशासित प्रदेश के प्रशासकों की नियुक्ति । 
राष्ट्रपति को इन अधिकारियों को पदच्युत करने का भी अधिकार है । ( मंत्री परिषद के परामर्श से नियुक्ति और हटाने का उपबंध है । 
अनु०79 में राष्ट्रपति संसद का अंग ऐसा उपबंधित है । 
( संसद = राष्ट्रपति + राज्यसभा + लोकसभा ) 
सैनिक शक्ति 
राष्ट्रीपति देश के प्रतिरक्षा बलों का सर्वोच्च सेनापति होता है । कूटनीतिक शक्ति विदेशों से संधिया और अन्तर्राष्ट्रीय समझौते राष्ट्रपति के नाम से किये जाते है और राष्ट्रध्यक्ष होने के कारण राष्ट्रपति विदेशों में भारतीय राजदूतों व अन्य उच्च आयुक्तों की नियुक्ति करता है और ' विदेशी राजदूतों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत करता है । 
विधायी शक्ति
राष्ट्रपति संसद के सत्र को आहूत करता है और सत्रावसान करता है । 
अनुच्छेद - 85 ( 1 ) के अनुसार संसद के एक सत्र की अंतिम बैठक और आगामी सत्र की प्रथम बैठक के लिए नियुक्त तारीख के बीच ' छ : मास ' से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए । 
प्रत्येक सत्र के आरम्भ में राष्ट्रपति दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करता है । 
अनु० - 86 के अनुसार वह संसद के किसी सदन को संदेश भेज सकता है । इसके अतिरिक्त संसद के किसी एक सदन में या एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण कर सकेगा । जबकि अनु० - 87 में राष्ट्रपति के अभिभाषण का उपबंध है । 

42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के तहत यह स्पष्ट कर दिया गया कि राष्ट्रपति मंत्री परिषद का सलाह मानने के लिए बाध्य है । 
44वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1978 के तहत यह उपबंधित किया गया है कि ' वितीय ' विधेयकों को छोड़कर वह किसी भी विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है । ( इस समय केन्द्र में जनता पार्टी की सरकार थी )

 शक्तियों संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद वह अधिनियम बन जाता है । 
यदि कोई विधेयक ' धन - विधेयक ' नहीं है तो उसे राष्ट्रपति पुनर्विचारार्थ भेज सकता है । यदि विधेयक संसद में संशोधन सहित या संशोधन रहित पुन : पारित हो जाता है तो राष्ट्रपति उस पर अनमति देने के लिए बाध्य है । ( अनुच्छेद - 111 ) 44 संविधान संशोधन अधिनियम 1978 के तहत । 

                            एक दृष्टि 
अन080 ( 3 ) राष्ट्रपति राज्य सभा में 12 सदस्यों का नाम मनोनीत करता है । 
जिनको 4 क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि प्राप्त हो । क्षेत्र निम्नवत् है 
( 1 ) साहित्य जगत में विशेष उपलब्धि । 
( 2 ) कला जगत में विशेष उपलब्धि । 
( 3 ) विज्ञान जगत में विशेष उपलब्धि । 
( 4 ) सामाजिक जगत में विशेष उपलब्धि । 

यदि किसी ' विधेयक ' पर दोनों सदनों में कोई असहमति है तो उसे सुलझाने के राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बला सकता है । ( अध्यक्षता लोक सभा अध्यक्ष करता है ) - 
यह बैठक ' धन - विधेयक ' और ' वित्त - विधेयक ' पर लागू नहीं है । ( अन० 108 ) अनु० 80 ( 3 ) में यह उपबंधित है । राष्ट्रपति राज्यसभा के कुछ सदस्यों का नाम निर्दिष्ट करेगा । राज्यसभा एक स्थाई सदन है । 
जबकि राज्यपाल 5 क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि वाले व्यक्ति का नाम विधान परिषद् में 1 / 6 सदस्यों का नाम निर्दिष्ट करता है । अनु० 171 ( 3 ) ड ( 1 ) साहित्य , ( 2 ) कला , ( 3 ) विज्ञान , ( 4 ) समाज , ( 5 ) सहकारी आन्दोलन । 
अनुच्छेद - 331 के तहत राष्ट्रपति को लोकसभा में दो एंग्लो - इंडियन नामों को निर्दिष्ट करने का अधिकार है । 
  राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा नाम निर्दिष्ट व्यक्ति राष्ट्रपति के निर्वाचन मण्डल में सम्मिलित नहीं होता है जबकि उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में सम्मिलित होते है । उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में संसद के दोनों सदनों के सदस्य सम्मिलित होते है । 
अनु० - 123 में राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने को शक्ति प्राप्त है । जबकि राष्टपति से पहले 1935 के अधिनियम तहत गवर्नर जनरल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त थीं । । - 
अनु० - 123 में यह उपबंधित है जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हो और राष्टपति को इस बात का समाधान हो जाय । ऐसी परिस्थितियाँ वर्तमान में है तो वह अध्यादेश प्रख्यापित ( जारा ) । कर सकता है । जब एक सदन सत्र में न हो तब भी इस शक्ति । का प्रयोग किया जा सकता है । क्योंकि एक सदन विध बनाने के लिए सक्षम नहीं है । 
राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित किये गये अध्यादेश का वही बल या प्रभाव होता है जो संसद द्वारा विधिमान्य है । 
प्रत्येक ऐसा अध्यादेश संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा । जायेगा और संसद के पुनः समवेत होने की तारीख से 6 सप्ताह या 42 दिन की समाप्ति पर समाप्त हो जायेगा । यदि 6 सप्ताह के दोनों सदन उसके अनुमोदन के संकल्प को पारित न कर दे । - 
अनुच्छेद - 123 राष्ट्रपति को उन सभी विषयों पर अध्यादेश प्रख्यापित करने का अधिकार प्रदान करता है । जो संघ की विधायी शक्ति में त है । अध्यादेश मूल अधिकार का न तो अतिक्रमण कर सकता और न छीन सकता है । 
अध्यादेश की न्यायिक जाँच नहीं हो सकती है । 
राष्ट्रपति को क्षमादान की शक्ति - 72 
अनच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति किसी अपराध के सिद्ध दोष , करा दिये गये किसी व्यक्ति के दण्ड को क्षमा कर सकता है । निम्न रूपों में । जैसे
                               एक दृष्टि 
                         भारत के राष्ट्रपति 
( 1 ) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद ( दो बार )
   ( 1 ) 1917 में चम्पार सत्याग्रह में गाँधी जी के सायोगी थे । 
   ( 2 ) 11 - 12 - 1946 संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष थे । 
( 2 ) सर्वपल्ली राधाकृष्णन ( दार्शनिक ) 
( 3 ) डॉ० जाकिर हुसैन 
( 4 ) वी0 वी0 गिरी ( दो बार ) 
( 5 ) न्यायमूर्ति - एम0 हिदायतुल्ला 
( 6 ) फखरूद्दीन अली अहमद 
( 7 ) वी0 डी0 जत्ती 
( 8 ) नीलम संजी रेड्डी ( निर्विरोध ) 
( 9 ) ज्ञानी जैल सिंह 
( 10 ) आर वेंकट रमन 
( 11 ) डॉ० शंकर दयाल शर्मा 
( 12 ) डॉ0 के आर नारयण ( अनुसूचित जाति के प्रथम ) 
( 13 ) डॉ० ए . पी . जे . अब्दुल कलाम ( परमाणु वैज्ञानिक ) 
( 14 ) प्रतिभा पाटिल - ( प्रथम महिला ) 
( 15 ) प्रणव मुखर्जी 
राष्ट्रपति ( अनु - 72 ) 
( 1 ) राष्ट्रपति को सभी प्रकार के मृत्यु दण्डादेश के मामले मैं क्षमा दान की शक्ति प्राप्त है । _ _ _ 
( 2 ) राष्ट्रपति को सेना न्यायालय ( कोर्ट - मार्शल ) के दण्डादेश के मामले में क्षमादान करने की शक्ति प्राप्त है । 
राज्यपाल ( अनु - 161 ) 
( 1 ) राज्यपाल को मत्य - दण्डादेश के के मामले में क्षमा दान की शक्ति प्राप्त नहीं है ।
( 2 ) राज्यपाल को ऐसी शक्ति प्राप्त नहीं है । 

आपात उद्घोषणा 
अनु० - 352 , एक मास ' तक अस्तिस्व में बिना अनुमोदन के रहेगा । 
राष्ट्रपति को युद्ध तथा बाह्य आक्रमण या शस्त्र विद्रोह से भारत की सुरक्षा पर संकट आने पर आपात की उद्घोषणा की शक्ति है । _ _ _ 
यदि संसद के दोनों सदनों का अनुमोदन नहीं मिलता है तो वह ' एक मास ' के बाद समाप्त हो जायेगा । 
अनु० - 356 , ' दो मास ' तक अस्तिस्व में बिना अनुमोदन के रहेगा । 
राज्य में संवैधानिक तंत्र असफल हो जाने पर राष्ट्रपति आपात उद्घोषणा जारी कर सकता है । यदि संसद का अनुमोदन नहीं प्राप्त होता है तो वह ' दो माह ' के बाद समाप्त हो जायेगा । 
( 1 ) आपात के समय अनु० - 19 स्वतः निलम्बित हो जाता 
( 2 ) संसद को राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने की शक्तिा प्राप्त हो जाती है । 
                       एक दृष्टि 
1- वी0 वी0 गिरी दसरे चक्र के मतगणना से राष्ट्रपति चयनित हुए । 
2- नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चयनित हुए । 
3- डॉ० राजेन्द्र प्रसाद दो बार राष्ट्रपति रहे । 
( 1 ) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद , ( 2 ) नीलम संजीव रेड्डी , ( 3 ) फखरूददीन अली , ( 4 ) ज्ञानी जैल सिंह , ( 5 ) डॉ० ए0 पी0 जे0 अब्दुल कलाम - ये लोग उपराष्ट्रपति नहीं रहे हैं । 
4- 1986 में डाकघर ( संशोधन ) विधेयक पारित हुआ । जिसको राष्ट्रपति श्री ज्ञानी जैल सिंह वीटो के प्रयोग के आधार पर अनुमति प्रदान नहीं की । 
5- एक जनवरी 2006 से राष्ट्रपति का वेतन ₹150000 निर्धारित है । 
अन० - 360 ' दो मास ' तक अस्तिस्व में बिना अनुमोदन के रहेगा । 
राष्ट्रपति इस अनुच्छेद के तहत भारत की साख या वित्तीय आपात की घोषणा कर सकता है । यदि संसद का अनुमोदन न हो तो ' दो माह ' बाद स्वतः समाप्त हो जायेगा ।
                                     By आलोक वर्मा