क्रिया
जिस शब्द से किसी कार्य का करना या होना पाया जाये , उसे क्रिया कहते हैं ।
जैसे - खेलना , पढ़ना , लिखना इत्यादि । ।
क्रिया के मूलरूप को धातु कहते हैं । धातु में ना जोड़ने पर क्रिया हा पढ़ना क्रिया में पढ़ धातु है , इस प्रकार पढ़ धातु म ' ना ' जोड़ने पर क्रिया बनी है ।
रचना की दृष्टि से क्रिया के भेद
1 . अकर्मक क्रिया - जिस क्रिया के साथ कर्म की आवश्यकता नहा । पड़ती है , उसे अकर्मक क्रिया कहते है । जैसे - मोहन खाता है ।
2 . सकर्मक क्रिया - जिस क्रिया के साथ कर्म की आवश्यकता पड़ता है , उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं ।
जैसे - मोहन फल खाता है ।
सकर्मक और अकर्मक क्रिया की पहचान दोनो क्रियाओं में क्या किसे किसको लगाकर यदि उत्तर प्राप्त होता है तो सकर्मक क्रिया यदि उत्तर प्राप्त नहीं होता है तो अकर्मक क्रिया होगा ।
जैसे - मोहन फल खाता है । ( मोहन क्या खाता है ? ) उत्तर मिला ' फल ' यह सकर्मक क्रिया है ।
जैसे - मोहन खाता है । ( मोहन क्या खाता है ? ) कोई उत्तर न मिले तो अकर्मक क्रिया है ।
क्रिया के भेद
1 . संयुक्त क्रिया - दो या दो से अधिक क्रियाओं के योग से जो क्रिया बनती है , उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं ।
जैसे - सीमा खाना खा चुकी है ।
2 . नाम धातु क्रिया - जो क्रियाएँ संज्ञा या विशेषण से बनती हैं , नाम धातु क्रियाएँ कहलाती हैं । संज्ञा से - हाथ हथियाना विशेषण से - गर्म से गरमाना
3 . प्रेरणार्थक क्रिया - इसमें कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है जैसे - लिखना से लिखवाना
4 . पूर्वकालिक क्रिया - जब कर्ता एक क्रिया को समाप्त करके दूसरी क्रिया आरम्भ कर दे , उसमें पहली क्रिया पूर्वकालिक क्रिया कहलाती जैसे - राम पढ़ाई करके सो गया । ( पढ़ाई करके पूर्वकालिक क्रिया है )
By आलोक वर्मा