बाल विकास की आवश्यकता. UPTET. by आलोक वर्मा

बाल विकास की आवश्यकता

( Need of Child Development )

यह सदैव जिज्ञासा का विषय रहा कि अध्यापन विज्ञान में पढ़ने - पढ़ाने की तकनीक के अलावा बाल मनोविज्ञान का अध्ययन क्यों किया जाता रहा है । बाल मनोविज्ञान का अध्ययन शिक्षक करता है । शिक्षक बाल मनोविज्ञान का अध्ययन इसलिए करता है कि उसे यह पता चल सके कि जिसके लिये | वह सम्पूर्ण अध्ययन अध्यवसाय कर रहा है , वह कितना ग्रहण कर रहा है और कितना ग्रहण करने की क्षमता रखता है , ताकि उसकी क्षमतव ज्ञान । उपयोग की दक्षता के अनुसार अध्ययन कर सके ।

बाल विकास अध्यापकों के लिये निम्न प्रकार आवश्यक है ।

1 . बालकों की मनोरचना की जानकारी प्राप्त करने हेत - सार्वभौम का कोई भी प्राणी पूर्णतः एक समान नहीं होता है । ठीक उसी प्रकार कोई भी दो बालक एक प्रकार नहीं होते सभी की मनोरचना , मस्तिष्क रचना भिन्न - भिन्न प्रकार की होती है । लेकिन अध्यापक को यह सुविधा नहीं प्राप्त है कि प्रत्येक बालक को अलग - अलग उसकी मनोरचना के अनुसार शिक्षा प्रदान करें । अधिकांश सामूहिक रूप में कक्षाओं में अध्यापन करना पड़ता है , यद्यपि कि सामूहिक कक्षाओं में भी बालक की वैयक्तिक भिन्नता को समाप्त नहीं किया जा सकता है । ऐसी दशा में शिक्षक मनोविज्ञान का अध्ययन करके अध्यापन की एक सर्व उपयोगी पद्धति की जानकारी प्राप्त करके शिक्षण करता है ताकि सभी छात्रों को उसका लाभ मिल सके । बच्चों के मस्तिष्क रचना की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करता है ।

2 . बाल विकास प्रक्रिया को समझाने में सहायक प्रत्येक बालक का विकास अपने अनुसार विभिन्न नियमों व सिद्धान्तों के अनुसार होता है । प्रत्येक बालक का विकास व्यक्तिगत रूप से होता है तथा विशिष्ट व्यवहार करता है तथा क्षमताओं को ग्रहण करता है । बाल विकास के अध्ययन से अपना शिक्षण विकास प्रक्रिया क्षमताओं का प्रयोग बालक के अधिगम व क्षमता समर्थन के अनुरूप करेगा ।

3 . बाल निर्देशन व परामर्श में सहायक - बाल मनोविज्ञान के अध्ययन से शिक्षक छात्र की क्षमताओं व रुचियों का ज्ञान प्राप्त करके तदनुसार आगे की पढ़ाई करने तथा व्यवसाय मार्ग व अध्ययन तथा अभिभावक को देता है । इससे छात्र के भकटने तथा समय व श्रम के अपव्यय होने की सम्भावना नहीं रहती है ।

4 . बालकों के प्रति भविष्यवाणी करने में सहायक - बाल मनोविज्ञान के जानकार शिक्षक बाल मनोविज्ञान का अध्ययन करके उसके भविष्य के प्रति अनुमान लगाकर कथन कर सकता है , जिससे छात्रों के व्यवसाय चयन में आसानी होती है ।

5 . बाल व्यवहार का मार्गान्तरीकरण व नियन्त्रण में सहायक - कभी - कभी छात्र ऐसा व्यवहार करता है जो बालक व समाज के प्रति अच्छा नहीं होता , वह व्यवहार इतना प्रगाढ़ हो जाता है जिसे पूर्णतयः समाप्त करना सम्भव नहीं होता , ऐसी दशा में बालक के व्यवहार व्यवहरण की दिशा । बदल कर उसको रचनात्मक बनाया जा सकता है । बाल मनोविज्ञान के अध्ययन से शिक्षक के अन्दर ऐसा कौशल आ जाता है और वह बाल व्यवहार पर नियन्त्रण कर सकता है ।

6 . व्यक्तिगत भिन्नता का ज्ञान - विश्व के कोई भी दो प्राणी पूर्णतया ( सर्वांग ) एक समान नहीं होते हैं । कुछ न कुछ भिन्नता अवश्य रहता ह ऐसी दशा में उन भिन्नताओं की शैक्षिक योजना करना सामान्य शिक्षक रा काठन होता है । बाल मनोविज्ञान का ज्ञाता शिक्षक वैयक्तिक भिन्नताओं को जानकर तदनसार अपने शिक्षण कौशल की योजना बनाकर सभी छात्रों को लाभ पहुंचाता है ।

7 . कक्षा में शिक्षण व अधिगम का वातावरण बनाने में सहायक - बाल मनोविज्ञान के ज्ञान से शिक्षक यह जान पाने में समर्थ होता है कि कक्षा । में कब तथा क्या पढ़ाया जाये , जिसे सभी छात्र रुचिपूर्वक सीख सके । इससे अध्यापक कक्षा में अधिगम व शिक्षण का वातावरण सृजित कर अपने शिक्षण के माध्यम से पाठ्यवस्तु को छात्रों तक पहुँचाने में सफल होता है । कब , क्या और कैसे पढ़ाया जाये इसका ज्ञान बाल मनोविज्ञान द्वारा ही सम्भव होता है ।

8 . अनुशासन स्थापन में सहायक - कक्षा में अनुशासन स्थापन भी शिक्षण कौशल की एक कला है । अब अनुशासन स्थापना हेतु डाँट - फटकार , शारीरिक दण्ड व मानसिक प्रताड़ना की अवधारणा को नकार दिया गया है , क्योंकि कक्षा के सभी छात्रों को दण्ड देकर अनुशासित करना सम्भव भी नहीं है । ऐसी दशा में मनोविज्ञान के प्रभाव से कक्षा में अनुशासन स्थापित किया जा सकता है , जो शिक्षक द्वारा मनोविज्ञान के ज्ञान से ही सम्भव है ।

9 . विशिष्ट बालकों के शिक्षण में सहायक - कक्षा में शारीरिक व मानसिक रूप से सभी बालक एक स्तर के नहीं होते हैं । इनमें कुछ शारीरिक व मानसिक रूप से ( बुद्धिलब्धि की दृष्टि से ) कम या ज्यादा होते हैं , कभी - कभी तो इतना अन्तर हो जाता है कि सभी को एक साथ एक कक्षा में बैठाकर शिक्षण करना सम्भव नहीं होता । ऐसी दशा में बाल मनोविज्ञान का ज्ञाता शिक्षक शिक्षण में समायोजन करके विशिष्ट बालकों की आवश्यकतानुसार शिक्षण उद्यम करता है ।

10 . बाल मनोविज्ञान का ज्ञाता शिक्षक ही एक सफल शिक्षक बन सकता है । क्योंकि शिक्षण के दौरान अनेक अवसर आते हैं जब भौतिक व्यवस्था असफल हो जाती है , तब मनोविज्ञान ही एक ऐसा विषय अध्ययन है जो शिक्षक को नियन्त्रण करने की क्षमता प्रदान करती है ।
                           By Alok Verma