बाघ परियोजना, प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व,

बाघ परियोजना

  प्रस्तावना ( Introduction ) 

जंगल में वन एवं वन्य जीव प्रकृति का सन्तुलन बनाये रखते हैं । वन जहाँ वन्य जीवों के आवास होते है . वहीं ये वन्य जीव अपना भाजन एक निश्चित भोजन श्रृंखला के तहत उसी वन क्षेत्र रहते हैं । छोटे - छोटे शाकाहारी जीव ( Hervivores ) घास ( वनस्पति ) पर आधारित होते हैं , जो माकत बड़े जीवों ( Carnivores ) का भोजन होते हैं । एक निश्चित भोजन श्रृंखला के अन्तर्गत यह माँसाहारी जीवों की खुराक बनते हा यह एक क्रम है जो निरन्तर चलता रहता है , जब तक कोर्ट अप्राकृतिक घटना या विशेष रूप से अपनाई योजना से इसे छेड़ा न जाये । इस श्रृंखला में बाघ ( Tiger ) शीर्ष पर होता है और उसे ही इस चक्र का नियंत्रक माना जाता है । अतः निःसन्देह बाधा पर्यावरण के क्षेत्र में प्रकृति सन्तुलन के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण घटक होता है । 

भारत में वन एवं वन्य जीव सम्पदा सदैव से ही बहुतायत में और प्रकृति अनुकूल रही है जिससे निःसन्देह प्रकृति का सन्तुलन निर्वाध रूप से चलता रहा है । भारत के जंगलों में बाघों की संख्या की बहुतायत का केवल इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि इस सदी के प्रारम्भ में इनकी संख्या लगभग 40 , 000 बताई जाती है , लेकिन केवल मनोरंजन और प्रतिष्ठा के लिए इनका शिकार , बड़े - बड़े भवन और आलीशन इमारतों में इनकी खालों का प्रदर्शन और सजावट के लिए इनकी उपलब्धि ने इनकी संख्या को कम कर दिया । इधर इनके आवास - स्थल घने जंगलों का भी देश के विकास के नाम पर भारी विनाश हुआ । बाँधों के लिए जमीन ली गई , घने जंगल काट दिये गये । मकानों के निर्माण और बड़े - बड़े उद्योगों के लिए भी वन क्षेत्र काम में आये । इस सबका असर यह हुआ कि प्रकृति सन्तुलन तन्त्र के महत्त्वपूर्ण घटक बाघ की संख्या में निरन्तर कमी आती गई । सन 1972 में जब पहली बार देश में आधिकारिक रूप से बाघ - गणना हई तो इनकी कुल संख्या 1 , 827 बताई गई ।

देश की बढ़ती जनसंख्या भी इस विनाश का एक प्रमुख कारण रही है । गाँव के लोगों ने अपने ' पट भरने के लिए अधिक अन्न उपजाने हेत शनैः - शनैः आस - पास के जंगलों की ओर बढ़ना शुरू कर या । मवेशियों को चराने के लिए जंगल की वनस्पति का उपयोग हुआ । छोटे - मोटे जंगली जानवरों सकार भी चोरी छिपे हआ । इससे सारी स्थिति पर असर पड़ा । बाघों को निर्भय आवास और भाजन के अभाव में एक जगह से दूसरी जगह पलायन करना पड़ा । कुछ अपनी स्वयं की क ग्रास बने और अनेक शिकारियों के हाथों समाप्त हो गये ।

1970 का वर्ष इस सन्दर्भ में अत्यन्त महत्त्वपर्ण रहेगा जबकि बाघों की निरन्तर घटती संख्या सक शिकार पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया । इसी क्रम में भारतीय वन्यजीव मण्डल ' की । 1972 में वन्यजीव ( सरक्षा ) अधिनियम भी संसद से पारित हुआ जिसमें बाघों की का आर उनकी देखभाल शामिल थी ।

लेकिन केवल शिकार के प्रतिबन्ध तथा वन्यजीव ( सुरक्षा ) अधिनियम से बाघों की सुरक्षा सम्भव प्रस्तावित किया गया कि देश में बाघ बहुतायत क्षेत्रों को ' आरक्षित क्षेत्र ( Reserved कर दिया जाय जिसमें कुछ क्षेत्र को कोर क्षेत्र ' ( Core Area ) रखा जाय जहाँ कोई बाहरी व्यवधान न हो . और उसके बाहर के कुछ क्षेत्र को ' बफर क्षेत्र ( Budget Zone ) के नाम से रखा जाय जिसकी प्राकतिक सम्पदा का सुरक्षानुकूल उपयाग भी किया जा सकता है ।

इस तरह ' बाघ परियोजना ' ( प्रोजेक्ट टाइगर ) नामक केन्द्रीय प्रायो अप्रैल , 1973 से प्रारम्भ की गई जिसके दो निम्न मुख्य उद्देश्य रखे गए ।

 1 . भारत में वैज्ञानिक , आर्थिक , सौन्दर्यपरक , सास्कृतिक और पारित बाघों की उपयोगी संख्या का अनुरक्षण सुनिश्चित करना । 
2 . ऐसे जैविक महत्व के क्षेत्र का लोगों के हित , शिक्षा और मनोरंजन के रूप में हमेशा परिरक्षण करना ।

 इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अब तक 14 राज्यों में 27 बाघ रिजर्व किये गये हैं जिनका कल क्षेत्रफल 37 . 761 वर्ग किमी है । अब हम इन प्रोजेक काष्ठ अधिक जानना भी चाहेंगे । इनका संक्षिप्त विवरण यहा दिया जा रहा है । के लिए इन्हें हमने अंग्रेजी वर्ण के क्रमानुसार ही लिया है ) ।

 • प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्क्स ( Project Tiger Reserves )
1 . बान्दीपुर ( कर्नाटक ) [ Bandipur ( Karnataka )

        पश्चिमी घाट ( Western Ghats ) के अंचल में एक अत्यन्त सुव्यवस्थित और संरक्षित रिजर्व बान्दीपुर ' वन्य जीवों का एक विशाल आश्रय स्थल है जिसे इसकी भौगोलिक स्थित व अन्य प्राकृतिक सुविधाओं के कारण ही राष्ट्रीय उद्यान का स्तर मिला है तथा इसे प्रोजेक्ट टाइगर के उपयुक्त स्वीकार किया गया है । 1930 के दशक में केवल 60 किमी क्षेत्र में बना यह क्षेत्र नि ही वेनुगोपाल बन अभ्यारण्य के 1941 में मिलने से वृहद रूप में आ गया जो निरन्तर विस्तार आज 866 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है । उत्तर में नागर - होल राष्ट्रीय पार्क - कर्नाटक ( Naushala National Park - Karnataka ) , दक्षिण में मुदुमलाई अभ्यारण्य तमिलनाडु ( Mudumalai Sanctuary Tamilnadu ) और पश्चिम में वाईनेड अभ्यारण्य - केरल ( Wynad Sanctuary - Kerala ) से घिरा हजा यह स्थान अपनी गुणवत्ता के कारण दक्षिणी भारत का सबसे बड़ा हाथियों का आवास स्थल भी माना जाता है ।

        अधिकतर यह पहाड़ी स्थान घाटियों के प्रकार का है जिसमें वन्य जीव सामान्यतया अपने आपको सुरक्षित समझते हैं । नूगू ( Nugu ) नदी इस क्षेत्र के मध्य से तथा काबिनी ( Kabbini ) नदी इसके उत्तर तथा पश्चिमी सीमा से लगकर बहती है तथा पानी की अथाह पूर्ति करती है । 625 मिमी से 125 ) मिमी तक वार्षिक वर्षा से सघन वन संरक्षित हैं जिससे बाघों के लिए आदर्श स्थान बन गया है । इसक अतिरिक्त इस राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न प्रकार के अन्य वन्य जीव भी बहुतायत से है , जिनम पाताल ( Chital ) , साँभर ( Sambar ) , चौसिंगा ( Chausinga ) , गौर ( Gaurs , जंगली रीछ ( Wild Bear ) , माद ( Sloth Bear ) , लंगूर ( Langur ) , तेंदुआ ( Leopard ) , नेवला ( Common Mongoose & Stripper Mongoose ) , जगली कुत्ता ( Wild Dog ) , गिलहरी ( Giant & Flying Squirrel ) , कस्तूरा 2 Deer ) , बिलाव ( Civet ) आदि मुख्य हैं ।

        रेगने वाले ( Reptiles ) जीवों में मगर ( Crocodiles ) , साँप ( Snakes ) और गिरा Lizard ) तथा पक्षियों में कठफोड़वा ( Wood Pecker ) , बटेर ( Quails ) , धनेश ( Pneu तोते ( Green Pigeon ) , क्रोच ( Stork ) , छोटा बत्तख ( Teal ) , सारस ( Pond Herons ) , MS Fowl ) और जल मुर्गी ( Moorhen ) आदि प्राप्य हैं । दक्षिण भारत में एक अच्छा दर्शनीय और विविध प्रकार की वन्य जानकारी उप यह आकर्षक राष्ट्रीय उद्यान है ।

2 . बक्सा ( पश्चिमी बंगाल ) Buxa ( West Bengal ) 
   
        यह वन अभ्यारण्य ( Wildlife Sanctuary ) पश्चिमी बंगाल के शीर्ष उ हिमालय पर्वत श्रेणी से आने वाली अनेक नदियाँ पहाड़ों से मैदानी भाग में प्रवेश ( Sankos ) नदी इसकी पूर्वी सीमा पर बहती है तथा अन्य नदियों में राईडक ( Rydak ) , कठफोड़वा तोते ( Green P म ( Crocodiles ) , सॉस ( Snakes ) और गिरगिट ( Garden alls ) , धनेश ( Pied Hornbill ) Fl dHerons ) , जल पक्षी ( Water जानकारी उपलब्ध कराने वाला यहा स्थित है म . प्रवेश लेती है । सका । ( Rydak , जयन्ती ( Jayanti ), बाला ( Bala ) , डीमा जीवों के आश्रय के भन्सा टाइगर रिजर्व टाइगर रिजर्व अने कारण असम और मटा माडीमा ( Dima ) और पना ( Pana ) प्रमुख हैं , जिनसे यह क्षेत्र सदैव हरा - भरा आश्रय के उपयुक्त रहता है । एक तरफ बंगाल के सघन जंगल तथा दूसरी आर असम दगर रिजर्व और तीसरी तरफ भूटान के वन क्षेत्र से प्राकृतिक रूप से घिरा हुआ बकर रिजर्व अनेक प्रकार के वन्यजीवों को संरक्षण दिये हुए हैं । हाथियों के लिए अनुकूलता का मम और भूटान से पलायन होने वाले हाथी यहाँ अपना आश्रय बनाते हैं ।

     वन्य पशुओं में हाथी ( Elephant ) , सांभर ( Sambar ) , मन्तजैक ( Muntjac ) , चीतल ( Chital ) , सअर ( Wild Rig ) , गौर ( Gaur ) , लघुपुच्छ बन्दर ( Rhesus Monkey ) , लंगूर ( Langur ) , बाध तेंदुआ ( Leopard ) , बिलाव ( Civet ) , भालू ( Sloth Bear ) , सेही ( Porcupine ) , हाने बिल MID और जंगली बिल्ली ( Leopard Cat ) आदि हैं । राइडक में महसीर ( Mahseer ) जलजीव बहुतायत में है ।

        काफी सख्त देखरेख के बावजूद इस क्षेत्र पर पडौसी आबादी का अधिक दबाव है । मवेशियों के कार के रूप में काम में आने के कारण बफर जोन लगभग बंजर बनता जाता है , पर फिर भी प्रयास कर इसको व्यवस्थित रखने के लिए सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएँ निरन्तर प्रयत्नशील हैं ।

3. कोरबेट ( उत्तर प्रदेश ) Corbett ( Uttar Pradesh ) 

      उत्तर प्रदेश में कोरबेट ' राष्ट्रीय उद्यान एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि लिए सदियों से विश्व में जाना पहचाना वन्य जीव संरक्षण स्थल है । असीम वन सम्पदा युक्त हिमालय पर्वत श्रृंखलाएँ , लहराती शिवालिक पहाड़ियों और विस्तृत हरे - भरे मैदानी क्षेत्र में स्थित इस टाइगर रिजर्व को प्रकृति ने सभी सविधाएँ विरासत में ही उपलब्ध कराई हैं जिससे यह स्वतः ही बाघों के लिए आकर्षण बना है और । इसी कारण जहाँ देश के अधिकतम बाघों को सुरक्षा देने का कार्य यह उद्यान अपने आप में संभाले हए है , वहीं इसकी महत्ता के कारण प्रथम प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व के रूप में भी इसका ही चयन हुआ है । सच तो यह है कि इस स्थान की उपयुक्तता ने ही ' बाघ परियोजना ' को प्रारम्भ करने की प्रेरणा दी जिसके आधार पर फिर अनेक स्थानों का इसी योजना के तहत चयन हुआ है ।

      विविधता लिए अन्य वन्य पशुओं में हाथी ( Elephant ) , लंगूर ( Langur ) , बन्दर ( Rhesus Monkey ) , चीतल ( Chital ) , सांभर ( Sambar ) , जंगली सूअर ( Wild Pig ) , विभिन्न प्रकार के हिरन ( Hog & Barking Deer ) , सियार ( Jackal ) , गोरल ( Goral ) की प्रमुखता है । जल जीवों में घड़ियाल ( Gharial ) , मगर ( Crocodile ) तथा महसीर ( Mahseer ) और कलबसु ( Kalbasu ) जैसी मछलियों हैं । अनेक प्रकार के सपा - अजगर ( Python ) , गेहुवन साँप ( Cobra ) तथा क्रेट ( Krait ) और वाईपर ( Viper ) की अनगिनत संख्या है ।

       राष्ट्रीय सर्वे के आधार पर लगभग 585 प्रकार की पक्षी प्रजातियाँ यहाँ मिलती हैं , जिनमें मोर ( Peacock ) , कौवे ( Crow ) , गिद्ध ( Vulture ) , कठफोड़वा ( Woodpeacker ) , पीलक ( Oriole ) , बत्तख ( Ducks & Teals ) , जल कौवा ( Cormorant ) , सुग्गा ( Parakeet ) , जंगल मुर्ग ( Jungle Fowls ) , सारिका ( Laughing Thrush ) , तीतर ( Partridge ) , डोंगो ( Drongo ) , कलीज ( Kaleej ) मुख्य रूप से मिल जाती हा प्रशिक्षित स्टाफ , आवश्यक प्रबन्ध व्यवस्था बफर क्षेत्र में वृद्धि , नियंत्रित मानव प्रवेश , संतुलित परितन्त्र फलस्वरूप निश्चय ही बाघों की संख्या वद्धि उत्साहवर्द्धक रही है जिससे इनकी उपादेयता की औचित्यता सिद्ध हुई है ।

4 . दुदुवा ( उत्तर प्रदेश ) Duduwa ( Uttar Pradesh ) 

   उत्तर उष्णकटिबन्धीय क्षेत्र में स्थित यह टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश में हिमालय की तराई तथा मदानी के बीच में स्थित है । घने घास के मैदान में सघन वृक्षों की विविधता है जिनमें साल खर , जामुन , कुसुम , गूलर , सेंमल आदि मुख्य है । खुले जंगल और अनेक प्राकृतिक जलाशयों से मार युक्त इस क्षेत्र में बाघ तथा उसकी प्रजाति तेंदुआ , चीता आदि को उपयुक्त वातावरण उपलब्ध है जिससे बाघ - परियोजना का मन्तव्य पूरा हुआ है ।

वन्य पशुओं में ( शाकाहारी तथा माँसाहारी ) हिरन ( Spotted , Hog & Barking Deer ) , सांभर , जगली रीछ Wild Rour भालू ( Sloth Bear ) मुख्य है । स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों की लगभग 375 प्रजातियां बताई जाती है, जिनमें धनेश ( Hornbill ) , लाल मुर्ग ( Red Jungle Fowl ) , कठफोडवा ( Wood Pecker ) , पीलक ( Orioles ) , विभिन्न प्रकार की बत्तखें ( Ducks ) का जल कौवा ( Cormorants ) , क्रोच ( Storks ) आदि सम्मिलित है । यहाँ का पारिस्थितिकी ( Rhinoes ) के लिए उपयुक्त होने के कारण इस जाति को पुनः बसाने का कार्य यहाँ । किया था . जिसके फलदायक परिणाम मिले है । एक निश्चित योजना के तहत संरक्षण गति पर हैं ।

5 . इन्द्रावती ( मध्य प्रदेश ) [ Indrawati ( Madhya Pradesh ) ]
   
        इन्द्रावती नदी के किनारे पर स्थित यह रिजर्व मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र , आन्ध्र प्रदेश के घने जंगलों की श्रृंखला समूह में जुड़ा है । घने जंगल और स्वच्छ पानी के अनेक प्रपाती । प्राकृतिक सौन्दर्य ही नहीं निखरा है बल्कि इसे वन्य जीवों के स्वच्छन्द विचरण हेत सहित हुई हैं । जंगली भैसों ( Wild Buffaloes ) के लिए देश का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा आ है । लुप्त हो रही बारासिंगा ( Branderi Barasinga ) जाति के लिए भी सरक्षण हेतु इस रिजर्व को माना है । जो अभी तक केवल ' कान्हा ' टाइगर रिजर्व तक सीमित था । प्राकृतिक सम्पदा में सा अमलतास , आँवला , ऑजन , अर्जुन , बहेडा , तेंदु , पलास और टिन्सा तथा बॉस के बड़े - बड़े पेड है । शाकाहारी जीवों को पर्याप्त आहार सुविधा उपलब्ध है ।

         अन्य - वन्य पशुओं में चीतल ( Chital ) , साँभर ( Sambar ) , नाल गाय ( Blue Bull ) , काला साह ( Black Bull ) . चौसिंगा ( Chousinga ) , चिंकारा ( Chinkara ) , जगली सूअर ( Wild Pig ) , भाल ( Soni Bear ) , गौर ( Gaur ) तथा विभिन्न प्रजातियों के हिरन सम्मिलित हैं ।

        मनुष्य के उपयोग को नियंत्रित कर इसे और सुविधाओं से युक्त बनाया जा रहा है , जिससे इसके । मुख्य लक्ष्य बाघ ( Tiger ) , जंगली भैसा ( Wild Buffalo ) तथा बारासिंगा ( Barasinga ) को संरक्षण मिल सके ।

 6 . कलाकड - मुण्डनथरई ( तमिलनाडु ) Kalakad - Mundanthurai ( Tamilnadu ) 

     देश के दक्षिण में यह आखिरी छोर का टाइगर रिजर्व है जो तमिलनाडु प्रदेश की दो कलाकडा तथा मुण्डनथुरई सेन्चुरीज ' के मध्य स्थित है । देश के पश्चिमी समुद्र तट तथा दक्षिण भारत की मिश्रित । आर्द्रता तथा शुष्क जलवायु पर आधारित सदाबहार तथा घने दृक्षों वाला यह वन्य अभ्यारण्य कई । विविधता लिए हुए है जिसमें वन्य जीवों की ही विविधता प्रमुख है ।

       माँसाहारी वन्य पशुओं में बाध ( Tiger ) , तेंदुआ ( Leopard ) , जंगली बिलाव ( Civet ) , लकड़बग्या । ( Hyena ) , गीदड ( Jackal ) आदि तथा शाकाहारी जन्तुओं में हाथी ( Elephant ) , कई प्रकार के वानर । ( Different types of Macaques ) , गौर ( Gaur ) , सांभर ( Sambar ) , नीलगिरी ताहर ( Nilgiri Tahr ) | जलमुर्गी ( Water Birds ) , तीतर ( Partridges ) , बटेर ( Quail ) , फुदकी ( Warbeer ) , सहेली ( Miniver छपका ( Nightjar ) आदि मिलते हैं ।

      सुरक्षा व्यवस्था और व्यवस्थित करने , मवेशी चराई रोकने , लोगों की व्यक्तिगत सम्पत्तियों के झगडे समाप्त करने आदि पर प्रशासन का प्रयास है । भविष्य की योजनाओं में इस टाइगर रिजया के स्तर को ' राष्ट्रीय उद्यान में परिवर्तित कराना मुख्य लक्ष्य है ।

7 . कान्हा ( मध्य प्रदेश ) Kanha ( Madhya Pradesh ) 

      देश का सर्वाधिक चर्चित ' कान्हा राष्ट्रीय पार्क का विगत लगभग 70 वर्षों का इतिहास का उतार - चढ़ाव लिए है । 1933 में निर्मित वन अभ्यारण्य का स्तर जब 1955 में राष्ट्रीय पार्क के रूप में परिवर्तित हुआ तब इसके कोर क्षेत्र का क्षेत्रफल केवल 318 वर्ग किमी था । उस पर भी पड़ा । गाँवों के लोगों का अतिक्रमण , बलपूर्वक मवेशी चराई , ईंधन के रूप में वन क्षेत्रों का हास सभा का क्षेत्र की प्रगति के बाधक बने , लेकिन शनैः - शनैः स्थितियों को सँभाल कर इसे प्रोजेक्ट टाइगर में ले लिया । विरासत में मिली प्राकृतिक सम्पदाओं ने इसे पुनः ऐसे घने आकर्षक और दर्शनीय स्थान के रूप में ला दिया जिससे इसे देश के श्रेष्ठ उद्यानों में गिना जा सकता है ।

     अब चीतल ( Chital ) , बारासिंगा ( Barasinga ) , सौभर ( Sambar ) , गौर ( Gaur ) और जंगला सूखा ( Wild Pig ) की बहुतायत है । 1975 में बारासिंगा की 66 की संख्या का वर्तमान में 500 को लगभग हो जाना तथा 1972 की बाघों की संख्या 43 से 1994 के प्रारम्भ में लगभग 150 तक हो जाना निश्चित प्रदर्शित करता है । अब यह टाइगर रिजर्व 1 , 945 वर्ग किमी . क्षेत्र में है ।

8. मानस ( असम ) Manas ( Assam )

    देश के उत्तर - पश्चिम में स्थित यह टाइगर रिजर्व असम का एक ऐसा वन्य जीव क्षेत्र है , जिसका क्षेत्रफल ( कोर क्षेत्र ) बहुत कम है, पर बाघ ( Tiger ) , गेंडा ( Rhino ) और हाथी ( Elephant ) जैसे महत्त्वपूर्ण पशुओ का आश्रय स्थल बन पूरे देश के लिए स्पर्धा का क्षेत्र बना हुआ है । इसका श्रेय वस्तुतः प्रकृति वर्षा , नदियों के साथ लाई मिट्टी , कंकड़ - पत्थर से बने मैदानी क्षेत्र और पहाड़ी ढालू मिलकर एक ऐसे परितन्त्र को जन्म दिया है , जो वन्य जीवों के लिए अद्वितीय है । जनसम्पदा को जहाँ समृद्ध बनाया है वहीं जलाशयों की सदैव पूर्ति कर प्राथमिक आवश्यकता को पूरा किया था ।

हाथी ( Elephant ), गेंडे ( Rhinoes ), जंगली भैंसे ( Wild Buffaloes ) , गौर ( Gaur ) , सौंभर जंगली सूअर ( Wild Rig ) , हिरन ( Swamp & Hog Deer ) , लंगर ( Capped & Golden Sambar ) . बाघ ( Tiger ) , तेदुआ ( Leopard ) , भालू ( Sloth Bear ) , घडियाल ( Ghariyal ) , अजगर आदि अनेक पशु - पक्षी और जल - जीव इस क्षेत्र में अच्छी संख्या में हैं ।

     अबैध शिकारों की बदस्थिति तथा उपजाऊ भूमि का ग्रामीणों द्वारा निरन्तर अतिक्रमण यहाँ की । समस्याएँ हैं जिन्हें धीमे - धीमे नियन्त्रित किया जा रहा है ।

9. मेलघाट ( महाराष्ट्र ) [ Melghat ( Maharashtra ) ] 

      मेलघाट अभ्यारण्य पश्चिमी घाट ( Western Ghats ) की तलहटी में है और मिश्रित प्रकार का पहाडी और कुछ मैदानी है । पश्चिम में सघन सागवान के जंगल हैं । मानसून , शीत तथा काल में ऋतुओं के साथ - साथ वनस्पति में परिवर्तन आ जाता है जिससे प्राकतिक स्थितियों में परिवर्तन निश्चित होता है । इसका प्रभाव वन्य जीवों पर भी पड़ता है । ताप्ती और पूर्णा नदियाँ यथेष्ट जल पूर्ति के साधन हैं ।

      गौर ( Gaur ) , साँभर ( Sambar ) , चिन्कारा ( Chinkara ) , जंगली सूअर ( Wild Pig ) और हिरन ( Barking Deer ) की बहुतायत है । चीतल ( Chital ) और नीलगाय ( Blue Bull ) अल्प संख्या में हैं । बाघ Tiger ) , तेंदुआ ( Leopard ) और वन बिलाव ( Wild Dog ) प्रमुख माँसाहारी वन्य पशु हैं ।

    भारी मवेशी चराई और वन अग्नि ( ForestFire ) मुख्य समस्याएँ हैं , जिनके लिए सभी प्रबन्ध किये गये हैं । बाघ परियोजना क्षेत्र मेलघाट की सफलता की पुष्टि इससे होती है कि पिछले वर्षों में न केवल बाधों की संख्या में वृद्धि ही हुई है बल्कि उनके अवैध शिकार पर भी कड़ाई सेराक लगी है ।

 10 . नागार्जुनसागर ( आन्ध्र प्रदेश ) Nagarjunsagar ( Andhra Pradesh ) 

      देश के दक्षिण मध्य में स्थित यह टाइगर रिजर्व कृष्णा नदी के आवाह क्षेत्र ( catchment area ) में आता है । मध्य और पश्चिमी भाग पठारी है , शेष भाग घुमावदार घाटियों तथा नदी के साथ लाये कंकड़ - पत्थर आदि के संग्रह से ऊबड़ - खाबड़ है , लेकिन जल की प्रचुरता और परितन्त्र की अनुकूलता सवन्य जीवों को सुरक्षा है । कृष्णा नदी पर बने बाँध ' नागार्जुनसागर ' के नाम पर ही इस रिजर्व का नाम पड़ा है ।

     वन्य पशुओं में बाघ ( Tiger ) , तेंदुआ ( Leopard ) , लकड़बग्घा ( Stripped Hyena ) , भालू ( Sloth E ) , जगली बिलाव ( Civet ) , ऊदविलाव ( Indian Otter ) , नील गाय ( Blue Bull ) , चिन्कारा Ta ) , चासिगा ( Chausinga ) , साँभर ( Sambar ) , चीतल ( Chital ) , जंगली सूअर ( Wild Pig ) कई किस्म के लंगर ( Langur & Bonnet Macaque ) है । इण्डियन पेन्गोलिन Tangolin ) अब लुप्त प्रायः स्थिति में हैं । सर्वे के आधार पर लगभग 125 प्रकार की स्थानीय
तथा प्रवासी पक्षी प्रजातियाँ यहाँ उपलव्ध है ।


    समान रूप से बाहरी ग्रामीण निवासियों के भूमि अतिक्रमण हस्तक्षेप से तथा वन उत्पाद विक्रय से इस रिजर्व की प्रगति में बाधाएं आई है, जिन्हें सुलझाया जा रहा है। कोर क्षेत्र में और प्रतिवन्ध लगाये जा रहे है तथा आधुनिकतम संचार वतवस्था से वन्य जीवों की देख रेख व नियंत्रण किया जा रहा है ।


11 . नामदफा ( अरुणाचल प्रदेश ) Namdapha ( Arunachal Pradesh ) 

 ' नामदफा ' राष्ट्रीय पार्क में वन्य पशुओं की विविधता है , जो यहाँ के विविधतापर्ण सीधे सम्बन्धित हैं । हिमालय की समुद्र तल से 200 मीटर से 4500 मीटर तक की ऊँचाई पठारी और मैदानी क्षेत्र में बना यह रिजर्व अनेक प्रकार की वनस्पति तथा अन्य वन है । पानी के अनगिनत संग्रह स्थल है और नदियों का अनवरत पानी इस क्षेत्र में दो जा मिलता है ।

       सम्भवतः देश का यही एक ऐसा राष्ट्रीय पार्क है जहाँ बाघ ( Tiger ) , तेंदुआ ( Leone ( Snow Leopard ) और बादली चीता ( Clouded Leopard ) की प्रजातियाँ एक साथ मिलती वन्य पशुओं में हाथी ( Elephant ) , जंगली सूअर ( Wild Pig ) , सेही ( Foreupine ) , गौर ( Gaur ), जंगली भैंसा ( Wild Buffaloes ) , हिरन ( Barking , Hog Deer & Musk Deer ) , जंगली बकरी तथा पक्षियों की प्रजातियों मिलती हैं ।

     यद्यपि इस रिजर्व की पहुँच बहुत आसान नहीं है , अतः कई मायने में यह क्षेत्र काफी है । पर तब भी भमि अतिक्रमण की स्थिति से निपटना यहाँ की प्रमुख समस्या है , जिस पर का योजना से प्रयास किया जा रहा है ।

12 . पलामू ( बिहार ) Palamau ( Bihar ) 

फ्लूम ' टाइगर रिजर्व बिहार प्रान्त में स्थित है जहाँ की अपेक्षाकृत शुष्क जलवाय से क्षेत्र में उतनी सघनता वृक्षों की नहीं है जितनी एक राष्ट्रीय पार्क के नाम से आशा की जाती है । अधिकतर जंगल में साल व बॉस लगे हैं । अधिकतर उत्पाद संरक्षित होने के बजाय मानव की लालच का शिकार बन कर नष्ट हो जाते हैं और इसी से इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी न तो सन्तुलित ही है और न ही इसकी प्रगति दृष्टिगत है । कोल ( Koel ) नदी तथा उसकी सहायक नदियों केवल पानी का स्रोत हैं । जो पर्याप्त नहीं हैं और गर्मियों में जल अभाव हो जाता है । जल की तलाश में वन्य जीव रिजर्व में ही स्थान बदलते रहते हैं । 1300 मिमी की वर्षा ऐसे अधिक ताप वाले क्षेत्र के लिए पर्याप्त नहीं है ।

     इसके बावजूद विगत अनेक वर्षों से चले आ रहे विविधतापूर्ण परितन्त्र में अनेक प्रकार के वन्य पशु यहाँ बसते हैं । हाथी ( Elephant ) , चीतल ( Chital ) , सॉभर ( Sambar ) , लघु पुछ बन्दर ( Rhesus Monkey ) , लंगूर ( Common Langur ) , खरगोश ( Hare ) , सेही ( Porcupine ) , गौर ( Gaur ) , नील गाय । ( Blue Bull ) , हिरन ( Barking Deer ) , ढोल ( Wild Dog ) , जंगली सुअर ( Wild Pig ) , बाघ ( Tiger ) , तेंदुआ ( Leopard ) , भेड़िया ( Wol ) , गीदड़ ( Jackal ) , लकड़बग्घा ( Hyena ) इसमें सम्मिलित है । लगभग 1 , 000 पक्षी प्रजातियों मिलती हातीतर , अनेक प्रकार के मर्ग ( Peafowl . Red Jungle Fowl ) , बहुतायता । से हैं ।

     अनेक व्यवस्थाओं के साथ पानी की नियमित व्यवस्था तथा वन क्षेत्र का सघन वनीकरण पर । अधिक ध्यान केन्द्रित है ।

  13 . पेरियार ( केरल ) Periyar ( Kerala )

  पश्चिमी घाट में पेरियार नदी के नाम पर नामकरण हए ' पेरियार ' टाइगर रिजर्व का पूरा परित विशेषत : जल पर आधारित है । वर्षों से छोटे - छोटे प्राकतिक रूप से बने दीप कत्रिम झील के अन्य एक ऐसा स्थलीय , जलीय और भूगीय पारिस्थितिकी तन्त्र का निर्माण करते हैं जिससे क्षेत्र में दर का तो आकर्षण होता ही है बल्कि साथ ही वन्य एवं अन्य जीवों को भी समचित आश्रय प्रदान या हैं । वन सम्पदा की दृष्टि से कुछ भाग बहुत सघन तथा सदा हरियाली वाले हैं . कछ भागों में आन हरियाली है तथा कुछ सूखे ( baren ) भी हैं ।

      वन्य पशु में हाथी ( Elephant ) , गीर ( Gaur ) तथा हिरन ( Deer ) उल्लेखनीय है । जल 4 पास लंगर ( Langur & Macaque ) , सांभर ( Sambar ) , हिरन ( Mouse Deer RRATKint Deer ) , सअर ( Wild Pig ) , सेही ( Poreupine ) , बाघ ( Tiger ) , तेदुआ ( Lepoard ) और ढोल ( Wild Dog , जाते हैं । जलीय जीवों में इंडियन डाटर ( Indian Darter ) , जल कौवा ( Cormorant . क्राच काम आदि प्रमुख हैं ।टाइगर रिजर्व की स्थितियाँ सामान्यतया सन्तोषप्रद हैं तथापि चराई रोकने टुरिस्ट के दबाव करने तथा अवैध शिकार रोकना प्रगति के लिए आवश्यक एवं उचित प्रतीत होते हैं ।


14. रणथम्भोर ( राजस्थान ) ( Ranthambore ( Rajasthan ) 

राजस्थान के विशाल रेगिस्तानी एव वीरान क्षेत्र में रणथम्भोर राष्ट्रीय पार्क सचमुच प्रकृति का रिशमा है और इसे रेगिस्तान में मरुस्थल की संज्ञा दी जा सकती है । अरावली और विन्ध्याचल ती के मिलन स्थल पर निर्मित रिजर्व का परितन्त्र इतना सन्तुलित एवं व्यवस्थित है कि पूरे अन्त न तो जीवों को कोई भोजन का अभाव रहता है और न ही पानी का । पानी की पूर्ति प्रकृति कत्रिम रूप से बनाये गये जलाशयों को कुओं से भरकर कर ली जाती है । यह एक सघन जंगलों तथा उसके चारों ओर विशाल वीराने क्षेत्र के बीच व्यवस्थित परितन्त्र की अद्वितीय साल है जिसमें वन्य जीवों ने भी विकृत पर्यावरण के साथ अपने आपको समाहित तथा समायोजित कर लिया है ।

     दोनों ही श्रेणी शाकाहारी और माँसाहारी पशुओं में साँभर ( Sambar ) , चीतल ( Chital ) , नील गाय IR Bulv , जंगली सूअर ( Wild Pig ) और चिंकारा ( Chinkara ) तथा बाघ ( Tiger ) और तेंदुआ leonard ) है । भालू ( Sloth Bear ) , अजगर ( Python ) , गेहॅवन साँप ( Cobra ) और मगर ( Crocodile ) भी पाये जाते हैं । अनेक प्रकार के पक्षी भी मिलते हैं जिनमें तीतर ( Partridge ) , बटेर ( Quail ) , जल मर्गे ( Water Fowls ) , बत्तख ( Teal ) , सुग्गा ( Parakeet ) और बगुला ( Egret ) आदि उल्लेखनीय है । गर्मियों में पानी का अभाव तथा निकटस्थ ग्रामीणों का उद्यान क्षेत्र में अतिक्रमण नियमित एवं सामान्य बात है । पानी का समुचित प्रबन्ध हुआ है । अतिक्रमण रोकने हेतु प्रशासन सजग है ।


   15 . सरिस्का ( राजस्थान ) Sariska ( Rajasthan ) 

 राजस्थान प्रदेश में ही सरिस्का टाइगर रिजर्व पनः रेगिस्तानी क्षेत्र में अपनी स्वतन्त्र एकल अद्वितीय पारिस्थितिकी पर टिका है । पूरा क्षेत्र पहाड़ी है तथा मध्य में दो छोटे भाग पठारी हैं , जिन्हें " ककवारी ' और ' किरास्का ' के नाम से पुकारते हैं । परे क्षेत्र के वन क्षेत्र बहुत घने नहीं है , पर शाकाहारी जीवों के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध करा देते हैं , जिन पर माँसाहारी वन्य जीव अविलम्बित रहते . है । पानी का अभाव कृत्रिम रूप से जलाशयों को कुएँ से भर कर दूर किया जाता है । वर्षा 650 मिमी वार्षिक औसत भी पर्याप्त नहीं है ।

      यहाँ पर वन्य पशुओं में साँभर ( Sambar ) , चीतल ( Chital ) , नील गाय ( Blue Bull ) , चौसिंगा ( Chausinga ) , चिंकारा ( Chinkara ) , स्याह गोश ( Caracal ) , लकड़बग्घा ( Hyena ) , गीदड़ ( Jackal ) , लगूर ( Langur ) तथा बिज्जू ( Ratcl ) मुख्य हैं । अन्य जीवों में लहटोरा ( Shirkes ) , सुग्गा ( Parakeets ) , तीतर ( Patridges ) और मोर ( Pea Fowl ) आदि सम्मिलित हैं । राष्ट्रीय उद्यान को संरक्षित रखने के लिए अनेक प्रकार के नियमों / उपनियमों का कठोरता से पालन किया जाता है , क्योंकि यह एक ऐसा क्षेत्र है कि जहाँ के वन्य जीवों का अपना जीवन भी उद्यान के तन्त्र पर आश्चर्यजनक रूप से आधारित है ।


16 . सिमलीपाल ( उड़ीसा ) Simlipal ( Orrisa )

      सिमलीपाल उड़ीसा प्रान्त में प्रकृति का एक अद्भुत स्थान है जहाँ ढालू पहाड़ियाँ , सघन वनस्पति क्षेत्रों से आधारित घाटियाँ , उपजाऊ भूमि , पहाड़ियों से निकलते झरने , बारहमासी नदियाँ और आकर्षक नयनाभिराम नीला आकाश सभी कछ अद्वितीय हैं । 2500 मिमी वार्षिक वर्षा से पूरा वातावरण नम व आर्द्रता लिए है । अधिकतर क्षेत्र हरा भरा है । ऋतु परिवर्तन के साथ कुछ भागों में शुष्कता आती है , पर पूरा तन्त्र उसे स्वीकार कर लेता है ।

       यह राष्ट्रीय उद्यान बाघों के अतिरिक्त हाथियों ( Elephants ) के लिए प्रसिद्ध है । अन्य वन्य पशुओं और जीवों में बाघ ( Tiger ) , तेंदुआ ( Leopard ) , ढोल ( Wild Dog ) , साँभर ( Sambar ) , मुन्जटक ( Munjtak ) . गौर ( Gaur ) , जंगली सूअर ( Wild Pig ) , चीतल ( Chital ) , चौसिंगा ( Chausinga ) , पेंन्गोलिन ( fangolin ) , लंगूर ( Langur ) , मोर ( Peafowl ) , लकड़बग्घा ( Hyena ) , गीदड़ ( Jackal ) और गिद्ध ( Vulture ) उल्लेखनीय है ।
 अवैध शिकार से रोक , वन - आग ( Forest Fire ) पर नियन्त्रण तथा कोर क्षेत्र से गायी निष्कासन कठिन समस्याएँ हैं , जिन पर ध्यान अपेक्षित है ।

17 . सुन्दरवन ( पश्चिमी बंगाल ) Sunderbans ( West Bengal ) 

   ' सुन्दरबन ' देश का एकमात्र कच्छ वनस्पति के परितंत्र का प्रतिनिधित्व करता है । टाइगर रिजर्व से अधिक संख्या में बाघों का संरक्षण भी इसी क्षेत्र में होता है । यह गंगा और के मिलन स्थल पर स्थित है तथा उन्हीं की स्थिति के अनुसार संचालित है । मछलियों , का यह एक प्रमुख स्थल है और इसकी संकरी खाड़ियों तथा समुद्री तट मछलियों के अ में सहयोग करते है ।

    वन्य पशुओं में बाघ ( Tiger ) , चीतल ( Chital ) , जंगली सूअर ( Wild Pig ) , लघुपुच्छ बन्दर । Monkey ) प्रमुख हैं । जलजीवो में मगरमच्छ यहाँ की थाती है ।


 18 . वाल्मीकि ( बिहार ) Valmiki ( Bihar )  

       गंडक नदी के सहारे प्राकृतिक साल के वनों से परिपूर्ण यह टाइगर रिजर्व नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान के दक्षिण में स्थित है । हरे - भरे क्षेत्र वाले इस रिजर्व में घने बैंतान बत ( Cane ) के वृक्षों की भरमार है जो यहाँ के बाघों के अच्छे आश्रय स्थल बनते हैं ।
     वन्य पशुओं में विविध प्रकार के हिरन ( Hog Deer . Spotted Deer ) , सांभर ( Sambar ) जग सूअर ( Wild Pig ) , भालू ( Sloth Bear ) , चौसिंगा ( Chausinga ) , नील गाय ( Blue Bully गौर . . लकड़बग्घा ( Hyena ) , तेंदुआ ( Leopard ) , जंगली कुत्ता अथवा ढोल ( Wild Dog ) , लंगूर ( Lanela आदि मिलते हैं । पक्षियों में मोर ( Pea Fowl ) , विभिन्न प्रकार के मुर्गे ( Red Jungle Fowl . Spur Fonts तीतर ( Partridges - Grey , Black and Swamp ) , प्रवासी बत्तखें ( Migratory Ducks ) सम्मिलित है । रेंगने वाले जीवों में घडियाल ( Ghariyal ) , अजगर ( Python ) , सोप ( Cobra ) और कछुआ ( Tortoise )  प्रमुख है ।

     इस टाइगर रिजर्व से प्रशासन को बहुत अपेक्षायें हैं , लेकिन वहीं चराई की समस्या , वन - अग्नि तथा लोगों के अनाधिकृत प्रवेश से यह अभी स्वतन्त्र नहीं है । समस्याओं का समाधान राष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है ।

19 . पेंच ( मध्य प्रदेश ) Pench ( Madhya Pradesh ) 
 
      सत्र 1992 - 93 में यह बाघ रिजर्व क्षेत्र पूर्व घोषित राष्ट्रीय उद्यान ' पंच ' में ही बना है । मध्य प्रदेश का यह तीसरा टाइगर रिजर्व क्षेत्र है । इससे पूर्व कान्हा ' तथा ' इन्द्रावती ' क्रमशः 1973 - 74 तथा 1982 83 में बने थे । इसकी सम्पूर्ण भौगोलिक स्थित , कोर क्षेत्र , बफर क्षेत्र तथा वहाँ की वानिकी और वन्य विवरण की पूरी जानकारी अधिकृत रूप से अभी अपेक्षित है ।

 20 . तदोबा - अन्धेरी ( महाराष्ट्र ) [ Tadoba - Andheri ( Maharastra ) ] 1993 - 94 . 

21 . बान्धवगढ़ ( मध्य प्रदेश ) [ Bandhavgarh ( Madhya Pradesh ) ] 1993 - 94

       उपयुक्त दोनों टाइगर रिजर्व वर्ष 1993 - 94 में ही बने हैं । बान्धवगढ़ ' पर्व में ही राष्ट्रीय उद्यान था . जबकि तदोबा ' राष्ट्रीय उद्यान तथा अन्धेरी वन अभ्यारण्य को मिलाकर टाइगर रिजर्व तदाबान । री ' बनाया है । पूरा अधिकृत विवरण शीघ्र अपेक्षित है ।

22 . पन्ना ( मध्य प्रदेश ) [ Panna ( Madhya Pradesh ) ] 1994 - 95 | 

23 . डम्फा ( मिजोरम ) [ Dampha ( Mizoram ) ] 1994 - 95 यह दोनों टाइगर रिजर्व सत्र 1994 - 95 
यह दोनों टाइगर रिजर्व 1994-95 में बने है । जिनका कुल क्षेत्रफल क्रमश : 542 आर वर्ग किमी है । विस्तृत विवरण प्राप्त करने का प्रयास हो रहा है ।

 24 . भादरा ( कर्नाटक ) [ Bhadra ( Karnataka ) ] 1998 - 99 

25 . पेंच ( महाराष्ट्र ) [ Pench ( Maharastra ) ] 1998 - 1999 

26 . पाखुई नामेरी ( Pakhui Nameri ) 1999 - 2000 

27 . बोरी - सतपुड़ा - पचमढ़ी ( Bori - Satpura - Pachmarhi ) 1999 - 2000

      तथा 2 विस्तार ( 1 ) नागरहोल , ( 2 ) कटरनियाघाट ।


. प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्स की सूची ( List of Project Tiger Reserves ) 

यह सभी बाघ रिजर्व साधन सुविधा , नियन्त्रण क्षमता तथा प्रस्तावित योजनानुसार अलग - अलग वर्षों में स्थापित किये गये । उनका वर्षवार स्थापना , विवरण एवं विस्तार आदि की जानकारी निम्नांकित तालिका में समेकित है

* आँकड़े तदर्थ व अराजकीय स्तर पर हैं ।
* प्रधानमन्त्रीजी की अध्यक्षता में एक संचालन समिति बाघ रिजर्वो के प्रबन्ध के बारे में दिशा - निर्देश देती है । संचालन समिति ( बाघ रिजर्व ) के गैर सरकारी सदस्य तथा संचालन समिति ( बाघ रिजर्व ) द्वारा नामित चार वैज्ञानिक संस्थाएँ बाघ परियोजना की अर्द्ध - वार्षिक समीक्षा करती है ।

शिक्षा परियोजना के अनावर्तक व्यय के लिए प्रतिवर्ष कुल लगभग 175 - 200 लाख रु० की राशि भारत सरकार द्वारा विभिन्न बाघ रिजर्वो नव - निर्माण कार्य , पीने के पानी के जलाशय रख - रखाव व मरम्मत कार्यों के लिए उपलब्ध कराती है । इसके अतिरिक्त आवर्तक व्यय हेतु भारत सरकार तथा राज्य सरकार का योगदान 50 - 50 प्रतिशत होता है । यह राशि प्रतिवर्ष भारत सरकार द्वारा लगभग 6 - 7 करोड़ रुपये होती है जो योजना के महत्त्व की प्रतिपादित करती है । इसके अतिरिक्त विशिष्ट समस्याओं के निराकरण , शोध कार्यों तथा बाघ रिजों के उत्थान लिए विशेष धन राशि भी उपलब्ध कराई जाती है ।

प्रतिवर्ष बाघो की गिनती वाघ रिजयों के प्रशिक्षित अधिकारियों , अधीनस्थ फोरेस्ट रेन्जर्स फोरेस्ट गार्डस तथा फोरेस्टर द्वारा की जाती है । सफल क्रियान्वित से यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि इस दुर्लभ वन्य जीव ( बाघ ) को बचाने और इनकी संख्या में वृद्धि करने भारत एवं राज्य सरकारें और यहाँ तक कि स्वयं सेवी संस्थाएँ अत्यन्त चिन्तित एवं सजग है पर्यावरण संरक्षण एवं सन्तुलन के क्षेत्र में यह एक आशातीत उपलब्धि मानी जायेगी ।



Author
आलोक वर्मा ( कृषि परास्नातक ) 
शस्य विज्ञान, बीएड