वन्य जीव सुरक्षा एव सरक्षण, UPTET, CTET, BEd की परीक्षा के लिए ।

वन्य जीव सुरक्षा एव सरक्षण ( Protection and Conservation of Wild Life ) 

भारत में प्रशासनिक तौर पर वन्य पशु ( जीव ) की सुरक्षा और संरक्षण का समस्त उत्तरदायित्व विभिन्न राज्य तथा केन्द्र प्रशासित प्रदेशों की सरकारों को सौंपा हुआ है , लेकिन ऐसे निर्देश जो नीति के अन्तर्गत आते हों और समान रूप से पूरे देश में लागू किये जाने हों , वह भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय से ही अन्तिम रूप में प्रसारित होते हैं । वन्य जीवों की सुरक्षा और सरंक्षण हेतु पिछले लगभग 2 दशकों से केन्द्र स्तर पर ऐसे अनेक प्रयास हुए हैं , जिनका संक्षिप्त विवरण आगे दिया जा रहा है

1 . वन्य प्राणी ( संरक्षण ) अधिनियम , 1972 ( The Wild Life Protection Act 1972 )
वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए वन्य जीव ( सुरक्षा ) अधिनियम , 1972 पानि वन्य जीवों के कल्याण से सम्बन्धित अनेक बिन्दु अत्यन्त प्रभावी रूप से सम्मिलित कर उसमें आवश्यकतानुसार संशोधन प्रथम 1986 में तथा द्वितीय 1991 में किये गये है क्रियान्विति हेत भारत सरकार के वन्य जीव संरक्षण निदेशक की सहायता के लिए कोलकाता और चेन्नई में चार उपनिदेशक हैं । सकटापन्न प्रजातियों के अन्तर्राष्ट्रीय कार्यों के सफल निष्पादन करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है तथा वे वन्य जीवों की सरक्षा वन्य जीवों से सम्बन्धित व्यापार और वाणिज्य नियमों को लागू करने में स्थानीय अधिकारियों की भी करते हैं , जिसमें इन जीवों का आयात और निर्यात भी शामिल है ।
 यह उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित अधिनियम बनाये गये थे । इनका उपयोग वन्य जीव संरक्षण हेतु होता रहा है 
1 . मद्रास वन्य हाथी संरक्षण अधिनियम , 1873 ( The MadrasWild ElephantPreservation TAct , 1873 ) 
2 . अखिल भारतवर्षीय हाथी संरक्षण अधिनियम , 1879 ( All India Elephant Preservation Act , 1879 ) 
3 . वन्य पशु और पक्षी संरक्षण अधिनियम , 1912 CTheWild Birds and Animals Protection Act , 1912 ) 
4 . बंगाल गेंडा संरक्षण अधिनियम , 1932 ( The Bengal Rhinoceros Protection Act , 1932 ) 
5 . असम गेंडा संरक्षण अधिनियम , 1954 ( The Assam Rhinoceros Protection Act , 1954 )

2 . भारतीय वन्य जीव बोर्ड की स्थापना ( Establishment of Indian Board of Wild Line IBWL ) 

इस वन्य जीव बोर्ड की स्थापना सन 1952 में की गई थी तथा वन्य जीवो काला इस बोर्ड द्वारा किये गये जिनमें मुख्यतः राष्ट्रीय उद्यानों तथा वन अभयारण्या के निर्माण का उल्लेखनीय है । इस बोर्ड के मनोनीत अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री हेते है । सन् 1991 में इसका पुनर्गठन किया गया । जिसमें इसके निश्चित कार्यों का पुनः निर्धारण किया गया है , जिनमें - ( 1 ) वन्य जीवों की सुरक्षा और संरक्षण हेतु भारत सरकार तथा राज्य सरकारों को सलाह देना , ( 2 ) राष्ट्रीय उद्यान, वन, अभयारण्य तथा प्राणी - उद्यानों की देख - रेख सम्बन्धी सलाह और सझाव , ( 3 ) वन्य जीवो तथा उनसे निर्मित वस्तुओं के आयात में सरकार को सुझाव देना , ( 4 ) वन्य जीवों के प्रति लोगो की दिलचस्पी जाग्रत करना , ( 5 ) समय - समय पर वन्य जीवों की सुरक्षा और संरक्षण की स्थिति का अध्यन्न आदि शामिल हैं । वस्तुतः भारतीय वन्य जीव बोर्ड वन्य जीव सम्बन्धी नीति बनाने के लि शीर्षस्थ सांविधिक संस्था है । वस्तुत भारतीय वन्य जीव बोर्ड वन्य जीव संबंधी नीति बनाने के लिए देश की शीर्षक सांविधिक है ।




भारतीय जीव - जन्तु कल्याण बोर्ड ( Animal Welfare Board of India ) 

वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय भारत सरकार के अन्तर्गत इस बोर्ड की स्थापना जीव - जन्तुओं के कल्याग का के लिए की गई है । यह एक स्वायत्त सहायता अनुदान संस्थान है जिसके निम्नलिखित प्रमख कार्य हैं 

1 . जीव - जन्तु कल्याण की योजनाओं और उनकी क्रियान्विति को बढ़ावा देना । 
2 . वन्य जीवों पर अत्याचारों को रोकना , तथा 
3 . वन्य जीव - जन्तुओं के लिए कल्याण संगठनों को आश्रय गृहों , पशु - शरण स्थलों और आवारा पशुओं के इलाज के लिए पशु - चिकित्सा अस्पताल चलाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना ।

 4 . राष्ट्रीय उद्यान और वन अभयारण्यों की स्थापना ( Establishment of National Parks and Wildlife Sanctuaries ) 
वन्य जीवों की समुचित सुरक्षा और संरक्षण देने हेतु राष्ट्रीय उद्यान तथा वन अभयारण्य अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर प्रभावी रहे हैं । वर्तमान में इनकी संख्या 592 ( 92 राष्ट्रीय उद्यान और 500 वन अभयारण्य ) है जो लगभग 1 . 53 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं । इनके रख - रखाव के अनेक मद हैं , जिन पर भारत सरकार द्वारा 50 % से 100 % तक वित्तीय सहायता दी जाती है ।

 5 . विशिष्ट प्रजातियों के लिए विशेष संरक्षण योजनाएँ ( Special Conservation Schemes for Particular Species ) 

( 1 ) प्रोजेक्ट टाइगर योजना ( Project Tiger Scheme ) : देश में बाघों की महत्त्वपूर्ण जनसंख्या के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए ' बाघ परियोजना ' 1 अप्रैल , 1973 से प्रारम्भ की गई थी । 
( 2 ) अन्य योजनाएँ ( Other Schemes ) : उपर्युक्त योजना के ही समतुल्य कुछ अन्य जीवों के लिए भी निम्नलिखित योजनाएँ प्रारम्भ की गई हैं -

वन्य प्राणी का नाम                   प्रारम्भ वर्ष 
1 . हंगुल ( Hangul )                 1970 
2 . शेर ( Lion )                        1972 
3 . मगर ( Crocodile )             1974 
4 . हिरन                                   1981 
5 . गेंडा ( Rhinoceros )           1987 
6 . हिम चीता Snow Leopard   1987 
7 . हाथी ( Elephant )               1991

 इनका अधिकृत रूप से विस्तृत विवरण भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय से प्रतीक्षित है।



6 . प्राणी उद्यान ( Zoological Parks ) वन्य जीवों के प्रति जन - साधारण में ( विशेषकर बच्चों में ) रुचि रखने , जानकारी बढ़ाने , सरंक्षण भावना को पनपाने हेतु लगभग प्रत्येक राज्य में जीव - जन्तु गृह ( Zoo ' s ) संचालित हैं जिनको राज्य सरकारें नियंत्रित करती हैं । केन्द्रीय स्तर पर निम्नलिखित प्राणी उद्यान अपनी विशिष्टता रखते हैं ।

( 1 ) राष्टीय प्राणी उद्यान , नई दिल्ली ( National Zoological Park , New Delhi ) : राष्टीय पाणी उद्यान , नई दिल्ली में , जो 214 एकड़ भूमि में फैला हुआ है , वर्तमान में 1198 जीव हैं जो 54 स्तनपायी . 85 पक्षी तथा 16 सरीसृप प्रजातिया से है । प्रति वर्ष इस उद्यान को 16 - 17 लाख लोग देखते हैं । इस उद्यान का मुख्य उद्देश्य दर्शकों में वन्य जीवों पान , और उनके सरंक्षण के प्रति रुचि जाग्रत करना है । 

( 2 ) पद्मजा नायडू हिमालयन प्राणी उद्यान , दार्जिलिंग ( Padma Zoological Park , Darjeeling ) : यह प्राणी उद्यान दार्जिलिंग कों में वन्य जीवों के प्रति जागरूकता नि , दार्जिलिंग ( Padmaja Naidu Himalayan उद्यान दार्जिलिंग में पश्चिमी बंगाल सरकार एक स्वायत्तशासी संस्थान है । इसमें वन्य जीवों की अनेक सकटापन्न और का निवास व प्रजनन होता है । यह उद्यान पूर्वी हिमालय क्षेत्र के जीव - ज तथा प्रजनन ' बायोलोजी पर अनुसंधान आयोजित करता है और आगन्त पर जीव - जन्तुओं और पेड - पौधों के बारे में सीखने का अवसर प्रदान करता है ।

( 3 ) श्री चमराजेन्द्र प्राणी उद्यान , मैसूर ( Sri Chamarajendra Zoology Park , Mve ,

( 4 ) नन्दनकानन जीव विज्ञान उद्यान , भुवनेश्वर ( Nandankanan Biolodi Bhubneshwar )

देश के ऐसे प्राणी उद्यान हैं , जहाँ चिड़ियाघर सम्बन्धी प्रशिक्षण आयोजित किये जाते है ।

7 . केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ( Centre Zoo Authority ) वन्य जीव ( संरक्षण ) अधिनियम 1972 के अन्तर्गत देश के सभी चिड़ियाघरों की उनमें रखे जाने वाले जीवों के संरक्षण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा सन् 1992 में ' केन्द्रीय चिडियाघर प्राधिकरण ' की स्थापना की थी । इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है । इस प्राधिकरण मेंं 10 सदस्य एक पूर्णकालिक सदस्य - सचिव होते हैं जिसके पदेन अध्यक्ष वन एवं पर्यावरण मंत्री भारत  सरकार है। केेेन्द्र सरकार वित्तीय सहायता देकर जानवरों के वास तथा उनकी चिकित्सीय देखभाल 
की व्यवस्था करता है ।

 8 . वन्य जीव प्रशिक्षण संस्थान , भारत ( Wildlife Institute of India ) सर्वप्रथम इस संस्था का संस्थापन कृषि मंत्रालय के अन्तर्गत सन् 1982 में हआ । बाद में पर्यावरण एवं वन विभाग मंत्रालय में ले लिया । इसका मुख्यालय देहरादून ( उत्तरांचल ) में है तथा । यह संस्था एक स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करती है । इस संस्था का मुख्य उद्देश्य राजकीय तथा अराजकीय व्यक्तियों को वन्यजीव सम्बन्धी शोध , शिक्षण , देख - रेख और उनकी बेहतर जीवन के बारे में सिखाना है । इस संस्था से वन्य जीवों के संरक्षण के लिये तकनीकी ज्ञान कराया जाता है ।

 9 . वन्य जीवों की दुर्लभ ( संकटापन्न ) प्रजातियों का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार कन्वेंशन ( The | Conven - tion on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna & Flora - CITES ) वन्य जीवों की संकटापन्न प्रजातियों के अवैध अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को रोकने हेतु वाशिंगटन ( स . राज्य अमेरिका ) कन्वेंशन पर भारत ने भी अन्य देशों के साथ हस्ताक्षर किये हैं , जिसमें वन्य जीवों के आयात और निर्यात पर नियन्त्रण लगा है । भारत से - ( 1 ) हेल मछली , ( 2 ) कस्तूरी मृग , ( 3 ) कछुआ , ( 4 ) मगर , ( 5 ) गोह , ( 6 ) गेंडा , ( 7 ) हाथी दाँत , ( 8 ) साँप की खालें , ( 9 ) जंगली भैंसों के सींग आदि अनेक । वन्य जीव तथा उनके उत्पादों की विदेशों में बहत माँग है । चोरी छिपे इनका अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एक और वन्य जीवों की संख्या में कमी ला रहा है . वहीं इनसे हो सकने वाली आर्थिक आय सन हाथ धोना पड़ रहा है । उपर्युक्त संस्था प्रत्यक्ष रूप से वन्य जीव संरक्षण में सहायक है । 
10 . विश्व वन्य जीव कोष ( World Wild Life Fund - WWF ) विश्व वन्य जीव कोष ' , जिसका अब नया नाम ' प्रकति के लिए विश्वव्यापक कोष ( Woron Fund for Nature ) हो गया है , की 1986 में सिसली में रजत जयन्ती मनाई गई । पेड़ - पौध तथा वन्य जीवा के लिए 130 देशों में , 4 , 000 योजनाएँ बनाकर उनको सचारू रूप से चलाय जान WWE _ N को जाता है । भारत में 1 अप्रैल , 1973 से प्रारम्भ हुए ' बाघ - परियोजना कार्यक्रम Tiger Programme ) इसका एक अनन्य उदाहरण है जिसमें उसने प्रारम्भ में 10 लाख अमेरिक का आर्थिक अनुदान दिया था । तत्कालीन भारत की प्रधानमन्त्री स्व० श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने की गिरती संख्या से चिन्ता व्यक्त करते हुए अपने देश में इस योजना को शुरू करने के समय अपने कोष से 10 लाख अमेरिकी डालर देने की सहमति दी थी । वर्तमान में देश के 14 राज्य में 27 बाघ परियोजना रिजर्यों में अब तक लगभग 35 मिलियन अमेरिकी डालर व्यय हो चुका 


है ।

11 . वन्य जीव संरक्षण  में उल्लेखनीय कार्य हेतु पुरस्कार
  पर्यावरण एवं वन मन्त्रालय भारत सरकार ने सन् 1995 - 96 से वन्यजीव संरक्षण और शोध के सल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारी व क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को एक पुरस्कार ( राजीव गाँधी एवाडी तथा दो फल या दो फैलोशिप ( सालिम अली / कैलाश सांखला ) प्रति वर्ष देने का प्रावधान किया है । इससे व क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों में उत्साह व स्पर्दा बढ़ेगी , जो निःसन्देह प्रशंसनीय है । 

वन्य जीव संरक्षण हेतु व्यावहारिक सुझाव ( Practical Suggestions for Wildlife Conservation ) 
राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वन्य जीव संरक्षण हेतु किये जा रहे प्रयासों का कुछ संक्षिप्त विवरण ऊपर दिया गया है लेकिन दिन - प्रतिदिन के लिए क्या करणीय ( D o ) कार्य अपेक्षित है, उस हेतु कुछ निम्न सुझाव यहाँ समेकित है 
1 . राष्ट्रीय उद्यान और वन्य अभयारण्य की संख्या और निर्धारित क्षेत्रफल में वृद्धि कर वन्य जीयों के संरक्षण में और रुचि ली जानी चाहिए । इन पर होने वाले व्यय के बजट में भी वृद्धि करनी चाहिए जिससे आवासीय स्थल को वन्य जीवों के अनुकूल बनाया जा सके । 
2 . अवैध शिकार , सुरक्षा क्षेत्र में घरेलू जानवरों की चराई पर और अधिक नियन्त्रण और रोक लगानी चाहिए । अवैध व्यापार की रोक आवश्यक है । 
3 . दुर्लभ वन्य जीवों की रक्षा हेतु विशेष प्रायोजनाएं बनाई जानी चाहिए । 
4 . पर्यावरण शिक्षा के कार्यक्रम में ' बन्यजीव ' को भी शामिल करते हुए उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी बच्चों व अन्य जनसाधारण को देने की योजना की क्रियान्विति करनी चाहिए । 

वन्य जीव प्रकृति सन्तुलन में अपना अलग विशिष्ट स्थान व महत्व रखते हैं । इनके संरक्षण में पर्यावरण में सन्तुलन होता है , इस भावना को बने रहने से ही जन कल्याण है । 


Author 
आलोक वर्मा ( कृषि परास्नातक )
शस्य विज्ञान, बीएड