वन्य जीव संपदा का महत्व UPTET, CTET, BEd की परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

वन्य जीव सम्पदा का महत्व
( Importance of Wildlife Commodity )

 वन्य जीवों का महत्त्व निःसन्देह बहुआयामी है और इनका क्षेत्र केवल पर्यावरणीय ही नहीं विशुद्ध वैज्ञानिक , आर्थिक तथा सांस्कृतिक भी है । इन पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ यहाँ दी जा रही 

1 . ये जंगल की सघनता तथा उसकी हरीतिमा बनाये रखते हैं : जिन जंगलों में व हैं वहाँ सामान्यतः न तो कोई घरेलू और पालतू पशु घुस पाते हैं और न ही सामान्य आदमी अपना प्रवेश ले पाते हैं । परिणामस्वरूप वन सम्पदा के हास की सम्भावनाएँ बहुत ही का हो जाती हैं और इसके विपरीत जंगल निर्बाध रूप से पनपते हैं । शाकाहारी जीवों को यो भोजन मिलने से भोजन श्रृंखला की गति बनी रहती है । माँसाहारी शीर्षस्थ वन्य जीव सन्तलन । बनाये रखते हैं । वृक्षों की सघनता बढ़ती है और शुद्ध पर्यावरण बना रहता है ।

 2 . ये पर्यावरण की शुद्धता के सही सूचक हैं : वन्य जीव चाहे स्थलीय हों , जलचर हों अथवा उभयचर हों , इनकी खास उपस्थिति शुद्ध और अशुद्ध पर्यावरण की सूचना अत्यन्त प्रभावी रूप से देती है । उदाहरण के लिए एक घरेलू मक्खी की उपस्थिति जहाँ प्रदूषित वातावरण ( पर्यावरण ) बताती है वहीं एक भँवरा ( Black Bee ) विशुद्ध वातावरण का द्योतक है ; यदि किसी जल स्रोत के इर्द - गिर्द भारी संख्या में टिलुआ ( Blackwinged Stilts ) , जिरिया ( Ring Plover ) तथा टिटहरी ( Sand Pipers ) मिलते हों , तो यह पानी की गुणवत्ता ( Chemical Properties ) में कमी बताते हैं लेकिन यदि वहीं बड़ी कुररी ( River Terns ) , राम चिरैया ( King Fishers ) | अथवा बत्तख ( Teals ) आदि की अधिकता हो तो निश्चय ही वह जल स्वच्छ है और पीने योग्य है । आकाश में पक्षियों का अभाव वायु - प्रदूषण इंगित करता है वहीं हुद - हुद ( Hoopoe ) , खंजन पक्षी ( Wegtails ) और शकरखोरा ( Sunbirds ) हरियाली और शुद्ध पर्यावरण में ही आते हैं और भी ऐसे कई अन्य उदाहरण सम्भव हैं जो उक्त बात की सत्यता को प्रतिपादित करते हैं ।

3. ये प्रदषण कम करके स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करते हैं : कछ वन्य जीव ऐसे भी हैं , जैसे गीदड , जंगली सूअर और बिज्जू जो वन क्षेत्र की गंदगी को समाप्त कर देते हैं । गिद्ध , कौवे नया कोंच पक्षी सड़े - गले जानवरों को चट कर जाते हैं । बलबल , तोता और कई प्रकार के पक्षी पेडों से गिरने वाले फूल - फल - पत्तियों को उठा ले जाते हैं और इस प्रकार वनों की सफाई में योगदान देते हैं । कछुआ , मछली , मगर आदि इसी प्रकार पानी की गंदगी को मिटा देते हैं और पानी को स्वच्छ रखते हैं । 

4. ये जैविक नियन्त्रण बनाये रखते हैं : प्रकृति में अनेक प्रकार के पशु , पक्षी , कीट - पतंग और जलचर हैं । इनकी वृद्धि इनके अपने नियमानुसार होती है , लेकिन प्रकृति में ही कुछ ऐसा प्रावट मान है कि इनमें से प्रत्येक की संख्या का वह अपने शाश्वत नियमों के अनुसार नियन्त्रण में रखती है । वैसे वन्य जीवों की भोजन श्रृंखला के अन्तर्गत भी शाकाहारी और मांसाहारी जीवों में अन्ततः एक सन्तुलन रहता है । इस सन्दर्भ में हम यदि चूहे का उदाहरण लें तो यह जानें कि एक दिन में 6 चूहे एक मनुष्य का भोजन चट कर जाते हैं और इनकी वृद्धि भी इतनी तीव्र है कि एक नर - मादा चूहे का जोड़ा एक वर्ष में 880 बच्चे पैदा कर सकता है और यदि एक जोडा अपनी संतति सहित 7 वर्षों तक की अवधि तक सन्तानोत्पत्ति करता रहे तो यह संख्या 9 खरब से ऊपर हो जायगी ( 9 , 40 , 37 , 00 , 00 , 000 ) , लेकिन साँप , चीलें , उल्लू , बिल्लियाँ , लोमडी , नेवला , तिलोर आदि इन्हें चट कर जाते हैं और इनकी संख्या में वृद्धि नहीं होने देते । इसी प्रकार अनेक कीट - पतंगे भी दूसरे कीड़ों और पक्षियों का भोजन बनते हैं । इसी सन्दर्भ में टिड्डियों का उदाहरण भी कम दिलचस्प नहीं है । जब यह चलती हैं तो अरबों और खरबों की संख्या में होती हैं और जहाँ पर यह बैठती हैं . वहाँ की वनस्पति का सफाया कर देती हैं , लेकिन अनेक पक्षी जिनमें कौए , मैना , गोडावन , गिरगिट आदि शामिल हैं , इन्हें स्रोत पर ही नहीं बढ़ने देते । इस प्रकार वन्य जीव पर्यावरण में जैविक नियन्त्रण रखते हैं । । 

5 . यह आहार के सम्पूरक हैं : वन्य जीव प्रोटीन युक्त माँस देते हैं और इस क्रम में तीतर , चिकोर , हरियल , हिरन , खरगोश , सूअर आदि गिने जा सकते हैं । मछली , केकड़ा , साँप , झींगा आदि भी भोजन के अंग बने हैं । इससे अन्न की कमी की पूर्ति हुई है । 

6 . यह विशेष खाद की पूर्ति कर देते हैं : अपनी स्वाभाविक प्रक्रिया के अनुरूप जब यह चलते हैं , उड़ते हैं तो इनकी बीटें रास्ते में ही गिर जाती हैं । इन बीटों का खाद के रूप में प्रयोग बहुत लाभप्रद हुआ है । 

7 . ये शोध प्रक्रिया के साधन बनते हैं : विश्व में निरन्तर मानव जीवन को और सुखमय बनाने तथा उनके कष्ट दूर करने के लिए शोध होते रहते हैं । उनमें चूहे , बन्दर , खरगोश आदि को प्रयोग हेतु काम में लेते हैं । 

8 . यह आर्थिक समृद्धि के भण्डार हैं : वन्य जीवों को अलग - अलग इतने आर्थिक लाभ के लिए काम में लिया जाता है कि इनकी सूची समेकित करना भी अत्यन्त कठिन है । हाथी दाँत , गैंडा और जंगली भैंसा सींग , मृग - कस्तूरी , शेर - बघेरा - चीता - साँप और मगर की खालें बहुत ऊँची कीमतों पर विदेशों में बिकती हैं । अनेक जीवों से कपड़े की पोशाकें , सौन्दर्य प्रसाध न और औषधि निर्माण होता है । कुल मिलाकर यह आर्थिक सम्पन्नता के आधार हैं । 

9 . ये स्वस्थ मनोरंजन व ज्ञान प्रदान करते हैं : अनेक टूरिस्ट ( विदेशी व स्वदेशी ) वन्य जीव स्थलों को देखने जाते हैं और वन्य जीवों के कार्यकलापों से मनोरंजन भी प्राप्त करते हैं । विविध प्रकार का बहुमूल्य ज्ञान भी अप्रत्यक्ष रूप से अर्जित होता है । वन्य जीवों के संरक्षण हेतु मानस भी लोगों में बनता है जो शुभ लक्षण है । 

10 . ये परातन सांस्कृतिक गरिमा की याद दिलाते हैं : भारत धर्म और संस्कृति का देश रहा है । वन्य जीवों के सरंक्षण हेतु इनको अनेक त्यौहारों और पर्यों से जोड़ने के पीछे एक पाट आधार था , जिससे लोग इन्हें बचाये रखें । नागपचमा ( नाग देवता ) , दशहरा पूजन ( अश्व ) , गोवर्धन पजा ( गोवंश ) , शिवरात्रि ( नन्दी पूजन ) आदि ऐसे ही उदाहरण हैं । इनके अलावा भी मछलियों को आटे की गोली , चींटियों को आटा , गाय को गोग्रास , कुत्ते की रोटी आदि को इसी सन्दर्भ में सम्मिलित किया जा सकता है ।

 अतः यह स्पष्ट है कि वन्य जीव अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं और इनकी अनेक क्षेत्रों में समतुल्य उपादेयता है , जो इस बात पर प्रभाव डालती है कि इनको नष्ट होने से बचाया जाना चाहिए और इनका संरक्षण मानव कल्याण हेतु करना चाहिए ।

Author
आलोक वर्मा ( कृषि परास्नातक ) 
शस्य विज्ञान, बीएड