यथार्थवाद तथा शिक्षा के उद्देश्य ( Realism and Aims of Education )

यथार्थवाद तथा शिक्षा के उद्देश्य ( Realism and Aims of Education )

यथार्थवादी शिक्षा के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है
1.      बालक को यथार्थ जीवन के लिये तैयार करना ( Preparing the child fora real life ) - यथार्थवादी भौतिक संसार तथा भौतिक जीवन को ही यथार्थ मानते हैं । उनके अनुसार , बालकको भौतिक जीवन की वास्तविकता से अवगत कराना ही शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए ।
2.      बालक को मानव समाज तथा प्रकृति का ज्ञान कराना ( To Provide the Knowledge of Human Society and Nature to the child ) - बालक का सम्बन्य समाज तथा प्रकृति से होता है । बालक को इसका ज्ञान होना चाहिए ।
3.      वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास ( Development of Seeintific outlook ) पथार्थवाद इस तथ्य को प्रमुखता देता है कि शिक्षा द्वारा बालों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हो । इसके लिये आवश्यक है कि बालकों को अपने वातावरण का ज्ञान हो , वे भौतिक विज्ञानों का अध्ययन करें तथा उसके सीखने हेत वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाये ।
4.      बालक को एक सुखी जीवन के लिये तैयार करना ( Preparing the child forn child for a Happy Life ) - यथार्थवादी जीवन के किसी अन्तिम उद्देश्य में विश्वास नहीं करते । उनके अनुसार , यह संसार एक पदार्थ है तथा जीवन एक प्रक्रिया है । उनके अनुसार , शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिसे प्राप्त कर मनुष्य अपने प्राकृतिक एवं सामाजिक वातावरण से समायोजन कर सके तथा सुखी जीवन व्यतीत कर सके |
5.       मानसिक शक्तियों का विकास ( Development of Mental Powers ) - मनोविज्ञान में विश्वास करने के कारण यथार्थवादी शिक्षा द्वारा बालकों की मानसिक शक्तियों - स्मरण , विवेक तथा निर्णय आदि का विकास करने पर बल देते हैं । उनके अनुसार मानसिक शक्तियों के विकास के फलस्वरूप ही बालक अपने जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याओं को सुलझाने में समर्थ हो सकता है ।
6.       व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना ( Imparting Vocational Education ) यथार्थवादी विचारधारा बालकों के जीवन को सुखमय बनाने की बात सोचती है और इस हेतु आवश्यकता होती है विभिन्न उपयोगी वस्तुओं के उत्पादन की इसीलिये यथार्थवादी व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष बल देते हैं ।
यथार्थवाद और शिक्षण पद्धति ( Realism and Method of Teaching )
 यथार्थवादियों ने ' शब्द ' की अपेक्षा ' वस्त द्वारा शिक्षा देने की प्रणाली पर बल दिया कॉकि मतानुसार , वस्तु ही अनुभूति का आधार है । उनके अनुसार , बालकों को पहले वस्तु का प्रदर्शन कर उसका जान देना चाहिए , इसके बाद ' शब्द ' का ज्ञान देना चाहिए । यथार्थवादी दर्शन ने एक नवीन शिक्षण - प्रणाली को जन्म दिया जो आगमन प्रणाली ' के नाम से जानी जाती है । इसके अनुसार , बालक को स्वयं अपने निरीक्षण व परीक्षण से सीखने का अवसर प्राप्त मनोवैज्ञानिक है । होता है । इस प्रणाली से पहले वस्तु का और फिर शब्द का ज्ञान होता है । अत : यह अधिक उपयोगी पर्व  प्रसिद्ध यथार्थवादी कवि और दार्शनिक मिल्टन ने सीखने की दृष्टि से भ्रमण तथा यात्रा पर बल दिया और जॉन लॉक ने सीखने की क्रिया में निरीक्षण , देशाटन , प्रयोग तथा अनुभव को महत्त्वपूर्ण बताया । यथार्थवादियों ने कई शिक्षण - सूत्र भी प्रस्तुत किये जिनसे रटने के स्थान पर क्रिया द्वारा तथा स्वानुभव द्वारा सीखने पर बल दिया जाने लगा । ये शिक्षण सूत्र आज भी हमारा शिक्षण - प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं । यथार्थवादियों ने ज्ञान की एक इकाई माना तथा ठन्होने विषयों को परस्पर सम्बन्धित करके पढ़ाने की दृष्टि से सह - सम्बन्ध विधि का समर्थन किया ।