वैज्ञानिक यथार्थवाद ( Scientifie Realism )

वैज्ञानिक यथार्थवाद ( Scientifie Realism )

17वीं शताब्दी के अन्तर्गत तथा इसके पश्चात् लोगों के विचारों में अत्यधिक परिवर्तन हुआ , क्योंकि इस कालखण्ड में विज्ञान ने बहुत उन्नति की । इसी वैचारिक बदलाव का निष्कर्ष वैज्ञानिक यथार्थवाद है । वैज्ञानिक यथार्थवाद के अनुसार ऐसी प्रत्येक परत जो वस्तु रूप में सत्य है उसकी सत्यता के लिए उस वस्तु को विज्ञान के सिद्धान्त से सहमत होना आवश्यक है । वैज्ञानिक यथार्थवाद के प्रभाव स्वरूप सत्यों का निर्माण आगमन एवं निगमन आदि तरीकों की सहायता से किया जाने लगा । शिक्षा के क्षेत्र में वैज्ञानिक यथार्थवाद के परिणामस्वरूप सबसे अधिक मान्यता वैज्ञानिक विषयों को दी जाने लगी । तथा शिक्षा का उददेश्य जीवन को सम्पूर्णता प्रदान करना माना गया । वैज्ञानिक यथार्थवादी शिक्षा की विशेषताएँ .
1.      . वैज्ञानिक यथार्थवाद के अनुसार वही वस्तुएं सत्य है , जो वैज्ञानिक निरीक्षण प्रेक्षण , परीक्षण तथा प्रयोग में प्रामाणिक हो सके ।
2.      इसके अनुसार शिक्षा एक वैज्ञानिक क्रम है ।  
3.      . वैज्ञानिक यथार्थवाद के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में आगमन , निगमन , प्रयोग , निरीक्षण आदि तरीकों का प्रयोग किया जाना चाहिए ।
4.      यथार्थवादी वैज्ञानिकों के अनुसार बालक का जविक नियमों के अनुसार शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए क्योंकि यथार्थवादी वैज्ञानिक जीव विज्ञान के नियमों से बालक को मापन
5.      वैज्ञानिक यथार्थवादियों के अनुसार शैक्षिक पातयक्रम में स बालक को मापते है । अनसार विज्ञान के आलोक मे अन्य सभी विषयों का शिक्षा दना चाहिए । जिस प्रकार जित को केन्द्रीय विषय बनाया और उसके माध्यम से अन्य विषयों की शिक्षा पाइप जिस प्रकार जिलर ने इतिहास यथार्थवादी वैज्ञानिक हरबर्ट स्पेन्सर के अनुसार विज्ञान को केन्द्रीय विषयमा की शिक्षा देनी चाहिए । मार रीक्षिक पाठ्यक्रम में विज्ञान मुख्य होना चाहिये । इनके के माध्यम से अन्य विषयों की शिक्षा प्रदान की उसी प्रकार विज्ञान को केन्द्रीय विषय मानकर अन्य सभी विषयों