पर्यावरण की संस्थायें
पर्यावरण तथा उसके संरक्षण का सम्बन्ध सभी से है । यही कारण है कि पर्यावरण शिक्षा का उत्तरदायित्व किसी एक पर नहीं छोड़ा जा सकता । स्थानीय संस्थायें , राज्य संस्थायें , राष्ट्रीय संस्थायें तथा अन्तर्राष्ट्रीय संस्थायें सभी को एक दिशा में मिल - जुलकर काम करना होगा । नगरपालिका में , नगरनिगम , जिलापरिषद , कल - कारखाने , उद्योग विभाग , स्कूल कॉलेजों व विश्वविद्यालयों , जनसंचार साधनों , समाचार पत्र , पत्रिकायें , रेडियो , दूरदर्शन , फिल्म आदि सभी के योगदान से पर्यावरण शिक्षा का प्रचार व प्रसार सम्भव है । जनसंख्या विस्फोट तथा औद्योगीकर के कारण मानव ने प्राकृतिक संसाधनों का दोहन अंधाधुंध किया है । परिणामत : जल प्रदूषण , वायु प्रदूषण , मृदा प्रदूषण , ध्वनि प्रदूषण आदि समस्यायें उत्पन्न हो गई हैं । प्राकृतिक संतुलन में व्यवधान आने लगा है । अगर प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया तब मानव जाति जीवित नहीं रह सकती । प्राकृतिक संतुलन में हो रहे व्यवधान के फलस्वरूप मानव जीवन एक दोराहे पर आकर खड़ा हो गया है । वस्तुत : प्रकृति का संरक्षण करना हम सभी का न केवल एक पुनीत कर्त्तव्य है वरन् अस्तित्व हेतु एक आवश्यकता है । आज पर्यावरण की समस्या एक ज्वलंत समस्या बन गई है । इस समस्या का निराकरण करने के लिए गम्भीर प्रयास की आवश्यकता है । पर्यावरण की रक्षा तथा उसमें सुधार के लिए आवश्यक माहौल तैयार करने के लिए पर्यावरण शिक्षा पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है । जन समुदाय की पर्यावरण के प्रति सजगता को बढ़ाने के लिए प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस ( World Environment Day ) मनाया जाता है । इस दिन गोष्ठियों का आयोजन करके , रैलियों को निकालकर तथा वृक्षारोपण करके पर्यावरण को बचाने के प्रयासों की आवश्यकता की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया जाता है एवं इस दिशा मे प्रयास करने के संकल्प किये जाते हैं । वस्तुतः पर्यावरण की रक्षा करना सबका एक पुनीत कर्तव्य है ।