क्या होता है इथेनॉल फ्यूल? जानिये इसके फायदे और
नुकसान
अब चावल, गेहूं, जौ, मक्का और ज्वार से बनेगा इथेनॉल, जानें, क्या है इथेनॉल और किस काम आता है?
इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में
मिलाकर गाडिय़ों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इथेनॉल का उत्पादन यूं
तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी
इसे तैयार किया जा सकता है। इससे खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है। इसके
अलावा इसका उपयोग वार्निश, पालिश, दवाओं
के घोल तथा निष्कर्ष, ईथर, क्लोरोफ़ार्म,
कृत्रिम रंग, पारदर्शक साबुन, इत्र तथा फल की सुगंधों का निष्कर्ष और अन्य रासायनिक यौगिक बनाने में
होता है। पीने के लिए विभिन्न मदिराओं के रूप में, घावों को
धोने में जीवाणुनाशक के रूप में तथा प्रयोगशाला में घोलक के रूप में इसका उपयोग
होता है। पीने को औषधियों में यह डाला जाता है और मरे हुए जीवों को संरक्षित रखने
में भी इसका उपयोग होता है।
ऐसे बनता है इथेनॉल
इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में
मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इथेनॉल का उत्पादन
यूं तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से
भी इसे तैयार किया जा सकता है। इससे खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है।
भारतीय परिपेक्ष्य में देखा जाए तो इथेनॉल ऊर्जा का अक्षय स्रोत है क्योंकि भारत
में गन्ने की फसल की कमी कभी नहीं हो सकती |
इथेनॉल दो विधियों से तैयार किया जाता है। इसमें पहली संश्लेषण विधि व दूसरी किण्वीकरण विधि है।
संश्लेषण विधि-
एथिलीन गैस को सांद्र सल्फ्य़ूरिक अम्ल में शोषित कराने से एथिल हाइड्रोजन सल्फ़ेट
बनता है जो जल के साथ उबालने पर उद्धिघटित (हाइड्रोलाइज़) होकर एथिल ऐल्कोहल देता
है। इस विधि का प्रचलन अभी अधिक नहीं है।
किण्वीकरण विधि- इसके द्वारा किसी भी शक्करमय पदार्थ (गन्ने
की शक्कर,
ग्लूकोस, शोरा, महुए का
फूल आदि) या स्टार्चमय पदार्थ (आलू, चावल, जौ, मकई आदि) से ऐल्कोहल व्यापारिक मात्रा में बनाते
हैं।
इथेनॉल की कीमत / इथेनॉल Price
माह अक्टूबर 2020 को
सरकार ने इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। इसके अनुसार सी हैवी शीरे से बने
इथेनॉल की कीमत 43.75 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 45.69
रुपए प्रति लीटर कर दी गई है। जबकि बी हैवी शीरे से बने इथेनॉल की
कीमत 54.27 रुपए प्रति लीटर से बढक़र 57.61 रुपए प्रति लीटर और गन्ना रस से बने इथेनॉल की कीमत 59.48 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 62.65 रुपए प्रति लीटर कर
दी गई है।
क्या हैं इथेनॉल के फायदें
इथेनॉल के इस्तेमाल से 35 फीसदी कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। इतना ही नहीं यह कार्बन
मोनोऑक्साइड उत्सर्जन और सल्फर डाइऑक्साइड को भी कम करता है। इसके अलावा इथेनॉल
हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को भी कम करता है। इथेनॉल में 35 फीसदी
फीसद ऑक्सीजन होता है। इथेनॉल फ्यूल को इस्तेमाल करने से नाइट्रोजन ऑक्साइड
उत्सर्जन में कमी आती है।
हमें क्यों है इथेनॉल फ्यूल की जरूरत
इथेनॉल इको-फ्रैंडली फ्यूल है और पर्यावरण को
जीवाश्म ईंधन से होने वाले खतरों से सुरक्षित रखता है। इस फ्यूल को गन्ने से तैयार
किया जाता है। कम लागत पर अधिक ऑक्टेन नंबर देता है और MTBE
जैसे खतरनाक फ्यूल के लिए ऑप्शन के रूप में काम करता है। यह इंजन की
गर्मी को भी बाहर निकलता है। एल्कोहल बेस्ड फ्यूल
गैसोलीन के साथ मिलकर ई 85 तक तैयार हो गया। कहने का मतलब
इथेनॉल फ्यूल हमारे पर्यावरण और गाड़ियों के लिए सुरक्षित है।
ब्राजील में क्यों होता है सबसे ज्यादा इस्तेमा
ब्राजील में लगभग 40 प्रतिशत गाड़ियां 100 फीसदी इथेनॉल से चलती हैं,
यही नहीं बाकी गाड़ियां भी 24 फीसदी इथेनॉल
मिला ईंधन उपयोग कर रही हैं। ब्राजील जैसे देश के लिए यह करना आसान इसलिए हुआ
क्योंकि उनके पास भारत से तीन गुना जमीन और आबादी उत्तर प्रदेश जितनी है। स्वीडन
और कनाडा में भी इथेनॉल पर गाड़ियां चल रही है। कनाडा में तो इथेनॉल के इस्तेमाल
पर सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जा रही है।
नुकसान
अगर इथेनॉल की डिमांड बढ़ी तो गन्ने की फसल पर
ज्यादा फोकस होगा गन्ने की खेती में पानी काफी लगता है और फिलहाल सिंचाई की
व्यवस्था अभी भी उतनी बेहतर नहीं है। ऐसे में बैलेंस बनाकर चलना होगा।
भारत में इथेनॉल के उत्पादन को लेकर लिए गए फैसले की मुख्य बातें
1. सरकारी
विज्ञप्ति के मुताबिक 2030 तक पेट्रोल में इथेनॉल के 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए और रसायन एवं अन्य
क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 1,400 करोड़ लीटर
एल्कोहल/इथेनॉल की जरूरत होगी।
2. इसमें
से 1,000 करोड़ लीटर की जरूरत 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य
को हासिल करने के लिए और 400 करोड़ लीटर की जरूरत रसायन एवं
अन्य क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए होगी।
3. इस
1,400 करोड़ लीटर की कुल जरूरत में से 700 करोड़ लीटर की
आपूर्ति चीनी उद्योग और 700 करोड़ लीटर की आपूर्ति अनाज
आधारित भट्टियों को करनी होगी। इससे लगभग 175 लाख मीट्रिक टन
अनाज का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
4. चीनी
उद्योग द्वारा 700 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करने के
लिए करीब 60 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल उत्पादन
के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे अतिरिक्त चीनी भंडार की
समस्या का समाधान होगा, अतिरिक्त चीनी के भंडारण की समस्या
से चीनी उद्योग को निजात मिलेगी और चीनी मिलों की राजस्व वसूली बढ़ेगी। इससे वे
गन्ना किसानों को उनके बकाये का समय पर भुगतान कर सकेंगी।
5. गन्ना
और इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से तीन राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में होता है। इन तीन राज्यों से इथेनॉल को दूरदराज
के अन्य राज्यों में ले जाने पर भारी परिवहन खर्च आता है।
6. देशभर
में नई अनाज आधारित भट्टियां स्थापित करने से देश के अलग-अलग भागों में इथेनॉल का
वितरण संभव हो सकेगा और इससे इसके परिवहन पर आने वाला भारी खर्च भी बचाया जा
सकेगा।
7. आर्थिक
मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि निम्न श्रेणियों को
इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की एक संशोधित
योजना लाई जाए।
8. इथेनॉल
उत्पादन के लिए अनाज आधारित भट्टियों की स्थापना करना/मौजूदा अनाज आधारित भट्टियों
का विस्तार करना, लेकिन इस योजना के लाभ केवल
उन्हीं भट्टियों को मिलेंगे, जो अनाजों की सूखी पिसाई की
प्रक्रिया (ड्राई मीलिंग प्रोसेस) का इस्तेमाल करेंगी।
9. इथेनॉल
उत्पादन के लिए गुड़ शीरा आधारित नई भट्टियों की स्थापना/मौजूदा भट्टियों का
विस्तार (चाहे वे चीनी मिलों से संबद्ध हो या उनसे अलग हो) और चाहे केन्द्रीय
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा शून्य तरल डिस्चार्ज (जेडएलडी) को हासिल करने के
लिए स्वीकृत कोई भी अन्य तरीका कायम करना हो।
10.
इथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज
और शीरा दोनों का दोहरा इस्तेमाल करने वाली नयी भट्टियां स्थापित करना और पहले से
संचालित भट्टियों का विस्तार करना।
11.
मौजूदा गुड़ शीरा आधारित
भट्टियों (चाहे चीनी मिलों से संबद्ध हो या पृथक हो) को दोहरे इस्तेमाल (गुड़ शीरा
और अनाज/कोई भी अन्य खाद्यान्न) में बदलना और अनाज आधारित भट्टियों को भी दोहरे
इस्तेमाल वाली भट्टियों में बदलना।
12.
चुकन्दर, ज्वार और अनाज आदि जैसे अन्य खाद्यान्न से इथेनॉल निकालने के लिए नई
भट्टियां स्थापित करना/मौजूदा भट्टियों का विस्तार करना।
13. मौजूदा भट्टियों में संशोधित स्प्रिट को इथेनॉल में बदलने के लिए मॉलिक्यूलर सीव डीहाईड्रेशन (एमएसडीएच) कॉलम स्थापित करना।

