शैक्षिक तकनीकी का संक्षिप्त इतिहास by Alok Verma

शैक्षिक तकनीकी का संक्षिप्त इतिहास


( A BRIEF HISTORY OF EDUCATIONAL TECHNOLOGY )

शैक्षिक तकनीकी का इतिहास बहुत पुराना नहीं है । 19 वीं शताब्दी के प्रारम्भ में औद्योगिक क्रान्ति के फलस्वरूप अनेक मशीनों का आविष्कार हुआ लेकिन शिक्षा की समस्त रूपरेखा सरल तथा सीमित ही रही । किन्तु बाद में धीरे - धीरे शिक्षा के क्षेत्र में भी परिवर्तन और प्रयोग होने लगे । शैक्षिक खिलौनों का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में किया जाने लगा । सर्वप्रथम सन् 1926 ई० में अमेरिका के ओहियो ( Ohio ) के एक विश्वविद्यालय में सिडनी प्रेसी ( Sidney Pressey ) नामक व्यक्ति ने शिक्षण - मशीन ( Teaching Machine ) का प्रयोग शिक्षण के क्षेत्र में किया । लम्सडेन ( Lumsdain ) , ग्लेजर ( Glaser ) आदि व्यक्तियों ने सन् 1930 - 40 के मध्य विशिष्ट प्रकार की पुस्तकों , कार्डों और बोर्डों ( Scrambled Books , Cards & Boards ) का प्रयोग किया । फिर भी सन् 1900 से 1950 तक यह विज्ञान शिक्षा को विशेष प्रभावित नहीं कर सका । सन् 1950 में बी० एफ० स्किनर ( B . E . Skinner ) ने ' प्रोग्राम्ड लर्निंग ' ( Programmed Learning ) पद्धति का विकास किया । इसी वर्ष ब्राइनमोर ( Brynmor ) ने ' शैक्षिक तकनीकी ' शब्द का प्रयोग प्रथम बार किया । स्टेनली एडवर्ड ( Stanley Edward ) तथा स्किनर के प्रयासों के फलस्वरूप ' प्रोग्राम्ड लर्निंग मैटीरियल ' के प्रयोगों में विभिन्न राष्ट्रों में रुचि ली जाने लगी । फलस्वरूप तकनीकी स्वयं ही शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ने लगी और एक समय ऐसा आया कि ' प्रोग्राम्ड लर्निंग ' तथा ' श्रव्य - दृश्य - सामग्री को ही शैक्षिक तकनीकी का पर्याय माना जाने लगा । क्रमशः शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी उपकरणों के माध्यम से व्यवहार तकनीकी , अनुदेशन - तकनीकी तथा शिक्षण - तकनीकी आदि के क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के शिक्षण - प्रतिमानों ( Teaching Models ) आदि का प्रतिपादन होने लगा । इस प्रकार धीरे - धीरे शैक्षिक तकनीकी , शिक्षण प्रक्रिया को अधिक ठोस , व्यावहारिक एवं प्रभावपूर्ण बनाने में स्वयं को अधिक सक्षम रूप में प्रस्तुत करने में समर्थ होती गयी ।

                      By आलोक वर्मा