शैक्षिक तकनीकी का सम्प्रत्यय ( CONCEPT OF EDUCATIONAL TECHNOLOGY )
विषय - प्रवेश
आज के युग में मानव जीवन का प्रत्येक पक्ष वैज्ञानिक खोजों तथा आविष्कारों से प्रभावित है । शिक्षा का क्षेत्र भी इसके प्रभाव से मुक्त नहीं रह सका है । रेडियो , टेपरिकॉर्डर , टेलीविजन , रेडियो - विजन , लिंग्वाफोन , कम्प्यूटर आदि का बढ़ता हुआ उपयोग शिक्षा को तकनीकी ( Technology ) के निकट लाता जा रहा है । शिक्षाशास्त्र का कोई भी अंग , चाहे वह विधियों - प्रविधियों का हो , चाहे उद्देश्यों का हो , चाहे शिक्षण - प्रक्रिया का हो , चाहे शोध का हो , बिना तकनीकी के अपंग , अवश और लुंज महसूस होता है । छात्राध्यापकों की चाहे सैद्धान्तिक ज्ञान से सम्बन्धित समस्या हो , चाहे उनके प्रयोगात्मक शिक्षण ( Practice Teaching ) के क्षेत्र की अड़चन हो , तकनीकी हमें सहायता देती है । सत्य तो यह है कि तकनीकी विज्ञान इतना समृद्ध और शक्तिशाली होता जा रहा है कि बिना इसका अध्ययन किये छात्राध्यापकों का शिक्षण सम्बन्धी ज्ञान या उनके परीक्षण तथा प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और कौशल अधूरे समझे जाते हैं । शैक्षिक तकनीकी ( Educational Technology ) ने शिक्षा के क्षेत्र में पुरानी अवधारणाओं में आधुनिक सन्दर्भ के साथ अभूतपूर्व क्रान्तिकारी परिवर्तन कर उन्हें एक नवीन स्वरूप प्रदान किया है ।
सर्वप्रथम ' एजूकेशनल टेक्नॉलॉजी ' शब्द का प्रयोग इंग्लैण्ड में Brynmor Jones ने सन् 1967 में किया था । इसके पश्चात् इंग्लैण्ड की N . C . E . T . ( National Council of Educational Technolgy ) संस्था द्वारा आयोजित एक कॉफ्रेंस में इसकी व्याख्या की गयी । N . C . E . T . तथा अन्य ऐसी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने इतना और इस स्तर तक का कार्य प्रस्तुत किया कि 1967 में जन्मा यह विषय आज शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा - दर्शन , शिक्षा - मनोविज्ञान या शिक्षा - समाजशास्त्र के समकक्ष पहुँच चुका है । भारत के अनेक विश्वविद्यालयों ( हिमाचल , मेरठ , इन्दौर , गढ़वाल , आगरा , राजस्थान आदि ) ने इसे अपने बी० एड० तथा एम० एड० के पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषय के रूप में रखा है । इस विषय की महत्ता तथा उपयोगिता को देखते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद् ( N . C . E . R . T . ) , नई दिल्ली ने शैक्षिक तकनीकी केन्द्र ( Centre for Educational Technology ) प्रारम्भ कर दिया है , जहाँ पर शोध , प्रशिक्षण तथा निर्देशन की व्यवस्था की गई है ।
By आलोक वर्मा