कारक। (हिंदी) by आलोक वर्मा

                         कारक
संज्ञा या सर्वनाम की क्रिया के साथ भूमिका निश्चित करने वाले शब्द कारक कहलाते हैं । 
दूसरे शब्दों में " क्रिया के साथ जिसका सीधा सम्बन्ध हो . उसे कारक कहते हैं ; जैसे ' पुलिस ने चोर को डंडे से मारा । इस वाक्य में क्रिया है , मारा कर्ता है , पुलिस ने है कारक ।
कारक के प्रकार -
कारकों के मुख्य छ : भेद हैं । 
कारक तथा उनके विभक्ति चिह्न निम्नलिखित हैं 
कारक                                      विभक्तियाँ 
1 . कर्ता ( क्रिया को करने वाला )        ने 
2 . कर्म ( जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़ता है ) को 
3 . करण ( जिस साधन से क्रिया हो )     से , के द्वारा के साथ , के कारण 
4 . सम्प्रदान ( जिसके लिए क्रिया की गई हो ) के लिए , को 
5 . अपादान ( जिससे पृथकता हो ) से ( पृथक् होने के लिए ) 
6 . सम्बन्ध ( क्रिया के संचालन का आधार )  का , की , के , रा , री रे , ना , नी ने 
7 . अधिकरण ( क्रिया करने का स्थान ) में , पर , के ऊपर , के भीतर
8 . सम्बोधन ( जिस संज्ञा को संबोधित किया जाए )    ऐ ! हे ! अरे ! ओ ! 
। कर्ता कारक - कर्ता शब्द का अर्थ है किया को करन ' का अर्थ है , क्रिया को करने वाला । बिना कर्ता के क्रिया संभव नहीं है , जैसे बच्चों ने किताबें ली तथा माताजी ने खाना खाया । 
2 . कर्म कारक - क्रिया का प्रभाव जिस संज्ञा या सर्वनाम पर पड़ता ह । उसे कर्म कारक कहते है । जैसे - ' राम ने रावण को मारा यहाँ कर्ता राम है और उसके मारने का फल रावण पर पड़ता है । अतः रावण कर्म है । यहाँ रावण के साथ कारक चिह्न ' को प्रयोग हुआ है । 
3 . करण कारक - संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप के सहयोग से क्रिया संपन्न होती है , उसे करण कारक कहते हैं जैसे - हम दाल के साथ चावल खाते हैं तथा मैं सजल के साथ किताबें भेज दूंगा । 
4 . सम्प्रदान कारक - जिसके लिए क्रिया की जाती है या जिसे कुछ दिया जाता है , उसे संप्रदान कारक कहते हैं । जैसे - माँ ने बच्चे को खाना दिया तथा प्रखर प्रज्ञा के लिए मिठाई लाया । 
5 . अपाद कारक - जब संज्ञा या सर्वनाम के किसी रूप से अलग होने का भाव प्रकट होता है , उसे अपादान कारक कहते हैं , जैसे - पेड़ से पत्ता गिरता है तथा गगा हिमालय से निकलती है । 
6 . सम्बन्ध कारक - किसी संज्ञा या सर्वनाम का अन्य संज्ञा या सर्वनाम से संबंध बताने वाले शब्द सम्बन्धकारक कहलाते हैं , जैसे - प्रखर का घर बहुत सुन्दर है तथा यह प्रशान्त की साइकिल है । 
7 . अधिकरण कारक - क्रिया होने के स्थान और काल को बताने वाले कारक को अधिकरण कारक कहते हैं , जैसे - मछलियाँ जल में रहती हैं तथा पुस्तक मेज पर रखी है । 
8 . संबोधन कारक - संज्ञा के जिस रूप से किसी को बुलाया या पुकारा जाता है , उसे संबोधन कारक कहते हैं , जैसे - हे प्रभु ! रक्षा करो तथा बच्चों ! खूब मन लगाकर पढ़ो । 
                                        By अलोज वर्मा