इकाई : 1 विकास की ऊँची पहुँच मानव , विज्ञान और प्रौद्योगिकी ( विज्ञान कक्षा 7 )

इकाई : 1 विकास की ऊँची पहुँच

 मानव , विज्ञान और प्रौद्योगिकी 



  1. विज्ञान और प्रौद्योगिकी का दैनिक जीवन में उपयोग । 
  2. विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास से मानव जीवन |
  3. विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में क्रान्ति । 

          आपने अपने दैनिक जीवन में कार्य की सगमता का अनभव अवश्य किया होगा । घर में गैस सिलिंडर हो या बाहर किस पेड़ का कटा हुआ तना , आपने देखा होगा कि उसे उठा कर ले जाने की अपेक्षा कम बल लगाकर लुढ़का कर ले जाना आसान होता है ,हा यहा आप विचार करें तो पायेंगे कि इस प्रकार का कार्य वैज्ञानिक सिद्धान्त पर आधारित है ।
लुढका कर तन या सिलेंडर जैसी वस्तुओं को ले जाने में घर्षण बल कम लगता है अत : लुढ़काकर ले जाना सरल है । इसी प्रकार बैलगाड़ियों में पहिया लगाने पर घर्षण बल कम हो जाता है और बोझ से लदी बैलगाडी को बैलों द्वारा खींचना सरल हो जाता है । बैलगाड़ी द्वारा कम ऊर्जा व्यय करके भारी बोझ एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाया जाता है । यह विज्ञान द्वारा ही सम्भव है । इस प्रकार यहाँ विज्ञान के नियम का उपयोग करके मनष्य ने कार्य को सरल बनाने के लिए बैलगाड़ी जैसा साधन विकसित कर लिया है - यही प्रौद्योगिकी है । मनुष्य का मस्तिष्क अन्य सभी जीवधारियों की अपेक्षा अधिक विकसित है । मनुष्य अपनी विचार शक्ति का उपयोग प्रकृति में होने वाली विभिन्न घटनाओं को जानने में करता रहा है । इस प्रकार एकत्रित ज्ञान का उपयोग मनुष्य ने अपने जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु तथा जीवन को आरामदायक एवं आनन्दमय बनाने के लिए किया है ।


 विज्ञान के नियमों एवं सिद्धान्तों के अनुप्रयोगों से मानव हित में संसाधनों का निर्माण की प्रौद्योगिकी कहलाता हैं । 

इस युग में विभिन्न क्षेत्रों में नये - नये आविष्कार हुए हैं । उदाहरण के लिए भाप के इन्जन से रेलों तथा बड़े जहाजों का निर्माण हुआ । जब पेट्रोल उपलब्ध हो गया
तो ऐसे हल्के इन्जन बनाना सम्भव हो सका जो बहुत शक्तिशाली थे । इन इन्जनों का उपयोग हवाई जहाज उड़ाने के लिए किया गया । आजकल नित्य नये - नये प्रकार के हवाई जहाजों का विकास हो रहा है । भारत ने भी चालक रहित लड़ाकू विमान बना लिये हैं । । लंदन से न्ययार्क तक की यात्रा मात्र तीन घंटे में सुपरसोनिक जेट द्वारा तय की जा सकती है । जम्बो जेट एयरक्राफ्ट एक घंटे में लगभग 900 किमी की दूरी तय कर सकता है । हेलीकाप्टर एक घंटे में 250 किमी दूरी तय कर सकता है । समुद्री मार्ग से माल तथा सवारी ढोने के लिए बड़े - बड़े जहाजों का भी प्रयोग होता है ।

 बीमार होने पर पहले लोग अधिकतर घरेलू उपचार करते थे जिससे पहले लोगों का असमय निधन हो जाया करता था । परन्तु अब लगभग सभी । गाँवों में प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों पर डॉक्टरों द्वारा जाँच कर इलाज किया जाता है । आजकल बड़े - बड़े चिकित्सालयों में विभिन्न प्रकार के रोगों सम्बंधित जाँच की सुविधायें उपलब्ध हैं जैसे खून , पेशाब , मल की जाँच , एक्स - रे , अल्ट्रासाउंड कराकर उचित उपचार किया जा रहा है । स्कैनर द्वारा मस्तिष्क की जाँच की जाती है । शरीर के अन्दर के भागों की जाँच करने की मशीन इन्डोस्कोप का प्रयोग होता है 

 पहले टेलीफोन की सुविधा नहीं थी । लोग संदेश वाहक , पत्र या टेलीग्राम से एक दूसरे का हाल - चाल लेते थे । आज से बहुत समय पहले प्रशिक्षित कबूतरों द्वारा संदेश भेजे जाते थे । आज सन्देशों का आदान प्रदान करने के लिए फैक्स ( छपकर संदेश ) , इंटरनेट द्वारा ई - मेल (
इलेक्ट्रानिक डाक सेवा ) आदि की व्यवस्था है । गाँव - गाँव में पी0सी0ओ0 पर एस0टी0डी0 , आई0एस0डी0 व्यवस्था द्वारा संसार के किसी भी कोने में टेलीफोन द्वारा सम्पर्क करने की सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध हो गयी हैं । 

पहले के समय में गाँव के चौपाल में बैठकर लोक संगीत , आल्हा आदि के माध्यम से लोगों का मनोरंजन हुआ करता था । कभी कभी गांव में नाच , नौटंकी आदि के द्वारा भी मनोरंजन हो जाया करता था । परन्तु आजकल
टेलीविजन , कम्प्यूटर , वीडियो गेम आदि मनोरंजन के साधन हैं । ये सभी आधुनिक विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी की देन है ।

 आज से लगभग 70 वर्ष पहले जब देश परतंत्र था तो देश में उद्योग धन्धे बहुत कम थे , किन्तु आज हमारा देश औद्योगिक क्षेत्र में विकसित देशों की बराबरी कर रहा है । स्टील के उत्पादन हेतु जमशेदपुर , राउरकेला , भिलाई , दुर्गापुर आदि शहरो में बड़े - बड़े कारखाने सरकार के नियंत्रण में खुले है ।

 रिहंद में जलशक्ति से विद्युत बनाने हेतु हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन तथा ओबरा , अनपरा पनकी , ऊंचाहार आदि स्थान पर कोयले से विद्युत बनाने हेतु नेशनल थर्मल पावर कापोरेशन के पावर स्टेशन स्थापित किये गये हैं । इसी प्रकार नाभिकीय ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा के उत्पादन के लिए ट्राम्बे , नरोरा , राणासागर , कल्पक्कम के एटामिक पावर स्टेशन कार्य कर रहे हैं । 

- इसी प्रकार खेती करने के तरीकों में भी परिवर्तन आया
। पहले किसान कृषि के परम्परागत तरीकों से खेती करता था तथा उसके पास सिंचाई के लिए ढेकुली , रहट आदि साधन थे । विडम्बना यह थी कि पर्याप्त उपजाऊ भूमि उपलब्ध होने पर भी खाद्यान्न का उत्पादन बहुत कम था और विदेशों से मंगाना पड़ता था । आज कृषि के क्षेत्र में अनेक यंत्र और तकनीकी का विकास हो गया है और देश अन्न उत्पादन के क्षेत्र में आत्म निर्भर हो गया है । आपने गाँव में ट्रैक्टर चलते तो देखा ही होगा । इसका प्रयोग हल के स्थान पर किया जाता है । आज फसल काटने की मशीन ( चित्र 1 . 6 ) , ट्यूबवेल आदि की भी पर्याप्त व्यवस्था है । उन्नत प्रकार के शोधित बीज , यूरिया , सुपर फॉस्फेट जैसे रासायनिक उर्वरकों के द्वारा कृषि उपज बढ़ाने में पर्याप्त सफलता प्राप्त हुई है । अब हम विदेशों को अन्न का निर्यात भी कर रहे हैं । यह सब कुछ हरित क्रान्ति के द्वारा सम्भव हुआ है । 

आधुनिक कृषि उपकरणों , उन्नतशील बीजों , उर्वरकों और पर्याप्त सिंचाई के साधनों द्वारा कषि उपज में आशातीत वद्धि को हरित क्रान्ति कहते हैं । 

आजकल सब्जी उत्पादन , मत्स्य , कुक्कुट , रेशम , सुअर के पालन की आधुनिक तकनीकों का विकास हो गया है । आधुनिक प्रौद्योगिकी उन्नत प्रकार के मत्स्य बीज एवं संश्लेषित इंजेक्शन के द्वारा 2350 किलोग्राम प्रतिवर्ष प्रति हेक्टेअर मत्स्य उत्पादन किया जा रहा है । 

संतुलित आहार , सामयिक टीकाकरण , अच्छी प्रजाति की मुर्गी जैसे - ब्रायलर से प्रति वर्ष 100 - 150 अंडे , स्वाइट । हार्न से 256 - 285 अंडे प्रति वर्ष प्राप्त किए जा रहे हैं । रेशम उत्पादन में भी हमारा देश आत्म निर्भर है । इसका कारण रेशम के कीटों को शहतूत के वृक्षों पर वैज्ञानिक विधि से पाला जाना है । सुअरों के रख - रखाव की नवीन विधियाँ विकसित हो चुकी हैं जिससे संतुलित आहार और सामयिक टीकाकरण से उन्नत प्रजातियों के स्वस्थ सुअरों का पालन सम्भव हो रहा है । 

वैज्ञानिक तकनीकी विकास के साथ पर्याप्त मात्रा में मछलियाँ , अंडे , मांस आदि का उत्पादन किया जा रहा है जिससे हमारी बढ़ती हुई जनसंख्या को पौष्टिक आहार उपलब्ध हो रहा है तथा विदेशों में इनका निर्यात करके विदेशी मुद्रा भी अर्जित करने में सफलता प्राप्त हो रही है । इसी प्रकार सोलर कुकर जैसे ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग व्यापक रूप में हो रहा है जिसमें गृहणी दाल , चावल आदि रख कर सूर्य के प्रकाश में पकने के लिए रख देती हैं तथा अपना जरूरी कार्य भी करती रहती हैं । सोलर कुकर में लगभग दो घंटे के बाद दाल - चावल पक कर तैयार हो जाता है ।

विज्ञान ने प्रौद्योगिकी तथा   प्रौद्योगिकी ने विज्ञान का विकास किया है । वास्तव में प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान दोनों एक दूसरे पर आश्रित है । प्रौद्योगिकी का विकास विज्ञान के नियम तथा सिद्धान्तों के दैनिक जीवन में उपयोग से होता है, यही कारण है कि प्रौद्योगिकी को व्यावहारिक ज्ञान भी कहते हैं । इसी प्रकार , विज्ञान का  जितना अधिक विकास होता है , उतनी ही उत्तम प्रौद्योगिकी विकसित होती है । वास्तव में विज्ञान के प्रत्येक नये आविष्कार से प्रौद्योगिकी के विकास का मार्ग और प्रशस्त होता है । 

किसी भी नई प्रौद्योगिकी के उपयोग से मनुष्य की जीवनचर्या तथा कार्य कुशलता में सुधार आता है । शिक्षा के क्षेत्र में भी एन0सी0ई0आर0टी0 द्वारा प्रस्तुत विज्ञान शिक्षा से सम्बन्धित ज्ञान दर्शन कार्यक्रम टी0वी0 पर दिखाया जाता है । यह दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम है । देश - विदेश के प्रोफेसर नथा शिक्षकों द्वारा टी0वी0 पर कार्यक्रम दिया जाता है जिसे हम टी0वी0 पर देख कर लाभ उठा सकते हैं । अब हमारे देश में इसके माध्यम से शिक्षा दिये जाने पर जोर दिया जा रहा है ।

 विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास से विभिन्न क्षेत्रों में क्रान्तिकारी परिवर्तन :-

औद्योगिक क्रान्ति : 
                आज हमारे देश में छोटी - छोटी मशीनों से ले कर बड़ी - बड़ी मशीनों का निर्माण हो रहा है । रेल इंजन हो या हवाई जहाज , छोटे - छोटे वाहन हो या बड़े - बड़े जलपोत , उत्पादक मशीने हो या मशीनों को तैयार करने वाली बड़ी - भारी मशीनें सब हमारे देश में बनने लगी हैं । लड़ाकू विमान , युद्धपोत , पनडुब्बी , विविध प्रक्षेपाल , विमान भेदी तोपें , टैंक आदि के निर्माण में हम आत्म निर्भर हैं । रेडियो , टेप - रिकार्डर , टेलीविजन आदि मनोरंजन के साधनों के निर्माण में स्वदेशी प्रौद्योगिकी का प्रयोग हो रहा है । सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत अग्रणी राष्ट्र की भूमिका निभा रहा है । औद्योगिक क्षेत्र में भारत का स्थान विश्व के छ : प्रमुख राष्ट्रों में है । 

जनसंचार क्षेत्र में क्रान्ति :-
                     कम्प्यूटर , इलेक्ट्रॉनिक डाक सेवा ( ई - मेल ) और इंटरनेट का विकास बहुत तेजी से हुआ है । इससे जन संचार क्षेत्र में क्रान्ति आ गई है । कम्प्यूटर , ई - मेल और इन्टरनेट का क्या अर्थ है ? आइये जाने । 

कम्प्यूटर :-
        आप कक्षा 6 में पढ़ चुके हैं कि कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रानिक मशीन है जिससे अनेक उपयोगी एवं जटिल कार्य सरलता से सम्पन्न किये जा सकते हैं । व्यापक स्तर पर कम्प्यूटरों का उपयोग रेल - आरक्षण , आँकड़ों का रख - रखाव , गणना , टाइप आदि अनेक प्रकार के कार्य करने में किया जा रहा है । 

इन्टरनेट :-
         यह कम्प्यूटर की नवीनतम प्रणाली है । विश्व के हजारों छोटे - छोटे कम्प्यूटर नेटवर्क टेलीफोन लाइन से जोड़ दिए जाते हैं । टेलीफोन लाइन की सहायता से जुड़े कम्प्यूटर नेटवर्क को इन्टरनेट कहते हैं । इसकी सहायता से हम कमरे में बैठे विश्व के विभिन्न देशों तथा किसी भी विषय से सम्बन्धित सूचनाएं एवं आंकड़े पलभर में प्राप्त कर सकते हैं और इनका संग्रह भी कर सकते हैं । कई नवीन पुस्तकें भी पढ़ सकते हैं । 

इलेक्ट्रॉनिक डाक सेवा ( ई - मेल ) :-
            यह कम्प्यूटर एवं इन्टरेट आधारित संचार की महत्वपूर्ण युक्ति है । इसके द्वारा कृत्रिम उपग्रहों के माध्यम से अन्य देशों के कम्प्यूटरों को सूचना , संदेश आदि का आदान - प्रदान किया जा सकता है । यह एक देश से दसरे देश को संदेश भेजने का सबसे सस्ता साधन है । जैसे - भारतवर्ष से सिंगापुर को संदेश अत्यन्त कम शुल्क पर पल भर में भेजा जा सकता है । 


कृषि :-
       जनसंख्या विस्फोट से भूमि पर दबाव बढ़ा है जिसके कारण खाद्यान्न की समस्या मानव के लिए एक विशेष प्रकार की चुनाती के रूप में खड़ी हई है । किन्त कषि के क्षेत्र में वैज्ञानिक आविष्कारों जैसे - ट्रेक्टर , अच्छे प्रकार के इलाजवेल कीटनाशक दवाओं , उन्नत कोटि के बीज , रासायनिक उर्वरकों आदि के प्रयोग से कृषि उपज में पर्याप्त वृद्धि हयी है । इसके फलस्वरूप हम अपनी बढ़ी हुई जनसंख्या को पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराने के साथ - साथ विदेशों को भी खाद्यान्न निर्यात करने में सफल हुए हैं । 

ईंधन :-
पेड़ की सुखी पत्तियां , गोबर से तैयार उपले , लकडी , कोयला और मिट्टी का तेल आदि बहुत पहले से ईंधन प्रमुख स्रोत हैं । इनके प्रयोग में बहुत अधिक समय और श्रम लगता है । वर्तमान में पेट्रोल , डीजल , खाना पकाने की गैस ( एल0पी0जी0 ) जैसे ईंधन का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है । एक स्थान से दूसरे स्थान तक इनके आवागमन के उत्तम साधन उपलब्ध हैं । इनके प्रयोग से समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है । फलस्वरूप ईंधन के क्षेत्र में क्रान्ति आ गई है । 

चिकित्सा :-
         चिकित्सा के क्षेत्र में भी बहुत तीव्र गति से विकास हुआ है । हैजा , मियादी बुखार आदि के सफल इलाज हेतु नई औषधियों की खोज हुई है और इनका पर्याप्त उत्पादन भी हो रहा है । चेचक , हैजा , काली खाँसी , पोलियो , टी0बी ) की रोकथाम हेतु उपयुक्त प्रतिरोधी टीकों का विकास हुआ है । अल्ट्रासाउन्ड , एक्स - रे , इण्डोस्कोपी आदि का शरीर के अन्दरूनी भागों की जाँच में प्रयोग हो रहा है । इनसे धातक बीमारियों की रोकथाम में तीव्र गति से सफलता मिली है । फलस्वरूप चिकित्सा के क्षेत्र में क्रान्ति आ गई है । 


राष्ट्रीय सुरक्षा एवं युद्ध :-
                 राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में हमारे देश ने बहुत तेजी से उन्नति की है । इससे एक नई क्रान्ति आ गई है । पृथ्वी , अग्नि त्रिशूल जैसी मिसाइलों का निर्माण हमारे देश में हो चुका है । इनका सफल प्रक्षेपण भी हुआ है । मिसाइलों का प्रयोग दूसरे देशों द्वारा आक्रमण होने पर उनके युद्ध अस्रों को नष्ट करने में होता है । इनसे हमारे देश की प्रभावी ढंग से सुरक्षा होती है । युद्ध की स्थिति रॉकिट द्वारा मिसाइलें छोड़ने की तकनीक में हमारे देश ने सफलता प्राप्त की है । क्या आप जानते हैं कि रॉकेट का निर्माण किस सिद्धान्त के आधार पर किया गया है ? आइये देखें । 


क्रिया कलाप 1 . 1 
        पिचका हुआ गुब्बारा लें । इसमें मुंह द्वारा हवा भरें ताकि गुब्बारा फूल जाय ( चित्र 1 . 7 ) । गुब्बारे के मुंह को धागे की सहायता से ढीला बांधकर छोड़ें । क्या
देखते हैं ? गुब्बारे से हवा तेजी से बाहर निकलती है तथा गुब्बारा निकलने वाली हवा की गति के विपरीत दिशा में आगे बढ़ता है । आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रॉकेट प्रौद्योगिकी इसी सिद्धान्त पर आधारित है । 
      आपने दीपावली में रॉकेट छोड़ा होगा । रॉकेट के अन्दर बारूद के जलने से उच्च दाब पर गैस बनती है जो उसके अन्दर बने छिद्र से तीव्र गति से बाहर आती है और रॉकेट तेज ' सू ' की आवाज करता हुआ ऊपर की ओर उठता जाता है । बारूद की गैस समाप्त होने पर रॉकेट कुछ ऊंचाई पर पहुंचकर नीचे गिरता है । इसी सिद्धान्त का उपयोग कर वैज्ञानिकों ने अन्तरिक्ष में उपग्रहों को स्थापित करने के लिए रॉकेट प्रौद्योगिकी का विकास किया । अन्तरिक्ष में भेजने के लिए इसकी विशेष रचना की गई । 

रॉकेट की रचना :-
              धान के मजबूत खोल के अन्दर एक कक्ष में द्रवीभूत ऑक्सीजन तथा दूसरे कक्ष में द्रव ईंधन रहता है । द्रव ऑक्सीजन तथा ईंधन पाइप की सहायता से दहन कक्ष में एक दूसरे से मिश्रित होते हैं । ऑक्सीजन व ईंधन के इस मिश्रण में जब चिन्गारी प्रदान ( स्पार्किंग ) कराते है तो उच्च ताप व दाब पर गैस रकेट के नोजल सेतीव्र गति से बाहर निकलता हआर स के निकलने की विपरीत दिशा में रॉकेट तेजी से ऊपर उठता है । 

रॉकेट का वग बढ़ाने के लिए एक खण्ड की जगह बहखण्डीय राकट का अपान करतह । इधन समाप्त होने पर रॉकेट का एक - एक खण्ड क्रमानुसार अलग हाता जाता है तथा रॉकेट उच्च वेग से ऊपर की ओर उठता
जाता है । भारत न कृत्रिम उपग्रहों को विकसित करने तथा उन्हें पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने की प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण सफलताये प्राप्त की हैं । कत्रिम उपग्रहों से न केवल दूर संचार व्यवस्था में । अभूतपूर्व विकास सम्भव हो पाया है । वरन् सुदूर संसूचन ( Remote Sensing ) में भी हम विश्व में अग्रणी हो गये हैं ।

         हमने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी अनेक कीर्तिमान स्थापित किये है । परमाण ऊर्जा तथा उससे सम्बन्धित शोध कार्यों के परिणाम स्वरूप अनेक परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र । स्थापित किये जा चुके , जिनसे विद्युत उत्पादन किया जा रहा है । इसके अतिरिक्त परमाणु ऊर्जा का उपयोग चिकित्सा तथा कृषि क्षेत्र में अनेक लाभकारी कार्यों के लिए किया जा रहा है ।

 विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास से मनुष्य को केवल लाभ ही नहीं मिला है वरन् इससे अनेक प्रकार की हानियाँ भी हुई है ।

     बड़े - बड़े उद्योगों की संख्या बहुत बढ़ गई है । इनसे निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ प्रायः बिना उपचार किये नदियों बहा दिए जाते हैं अथवा भूमि में विसर्जित कर दिये जाते हैं , जिसके कारण नदियों का जल तथा भू - क्षेत्र प्रदूषित हो रहे हैं । कृषि उपज बढ़ाने के लिए उर्वरकों तथा कीटनाशक दवाओं का अत्यधिक प्रयोग करने से मृदा प्रदूषण की समस्या भी उत्पन्न हो रही है तथा भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है । मनोरंजन के साधन बढ़ जाने से ध्वनि प्रदूषण हो रहा है । स्वचालित मशीनों के प्रयोग से कारखानों में मजदूरों की आवश्यकता कम पड़ती है जिसके कारण बेरोजगारों की संख्या में वृद्धि हुई हैं । जंगलों की अंधा - धुंध कटाई हो रही है , फलस्वरूप जंगलों का विनाश हो रहा है और वातावरण में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है । इतना ही नहीं इसके कारण अनेक प्रजाति के जन्तुओं जैसे बाघों की संख्या में कमी हो रही है तथा उनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है । 

      विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी से होने वाली हानियों से बचने के लिए हमें प्राकृतिक संसाधनों का समझदारी से दोहन करना होगा तथा नये आविष्कारों का उपयोग समाज की उन्नति के लिए करना होगा ।