पर्यावण 2 bed
"1 . आप कैसे बगीचा या क्यारी लगाएंगे तथा इसकी संरक्षा व देखरेख कैसे करेंगे ?
2. आप अपने विद्यालय में बगीचे / गमले / एक्यूरियम को तैयार करना चाहते हैं ? इसलिए क्या करेंगे ? इसकी सुरक्षा कैसे होगी ? इस पर एक विस्तृत आख्या दीजिए ।"
स्वयं द्वारा बनाये गये बगीचे या क्यारी बनाने की दृष्टि
अपने हाथ से बनाये गये बगीचे का तात्पर्य है मकान के अन्दर अपने हाथों से पेड़ - पौधों का रोपड़ करना । इस तरह के बगीचों का बनाना उन घरों में हो सकता है जहाँ कुछ जमीने खाली रहती है । हम उन्हीं जमीनों में वृक्षों को रोपित कर स्वयं निर्मित बगीचे का आकार दे सकते हैं । बगीचे मानव और प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए पूर्ण होता है । बिगड़े हुए पर्यावरण में सुधार हेतु बगीचे की महत्वपूर्ण उपयोगिता मानी जाती है । बगीचे से वातावरण में वायु प्रदूषण में कमी होती है और वातावरण हरा - भरा बना रहता है । बगीचा आकर्षण का एक नजरिया है । प्रत्येक विद्यार्थी को इसकी महत्ता समझना जरूरी है ।
बगीचा लगाने की पूर्व तैयारी - बगीचा या उद्यान लगाने की पूर्व तैयारी हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान देना पड़ता है
1 . स्थान का चुनाव - घरों में उद्यान लगाने हेतु सबसे पहले हम उपयुक्त स्थान का चुनाव करते हैं । बहुतायत यह देखा जाता है कि यदि खुला अतिरिक्त स्थान प्रवेशद्वार पर है तो बगीचा वहीं लगाया जाता है । यदि मकानों में खाली जगह पीछे की तरफ है तो बगीचा वहीं लगाया जाता है । बगीचा या उद्यान लगाने का सर्वप्रथम स्थान का चुनाव अति आवश्यक होता है ।
2 . स्थान का समतल करना - उबड़ - खाबड़ जगहों पर बगीचे नहीं लगाये जाते । पौधों का रोपण जमीन को समतल करने के बाद ही करना चाहिए । कंकड़ - पत्थर को बगीचे की मिट्टी से निकाल देना चाहिए । उसमें गड्ढे बनाकर उसको अच्छी मिट्टी से पूरित कर देना चाहिए । कभी - कभी यह देखा जाता है कि बगीचे के गड्डों में खाद एवं पत्तियों को डालकर उसके ऊपर मिट्टी भरकर कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है उसके बाद उन गड्ढों को पूरित कर पौधों का रोपण किया जाता है ।
3 . गुड़ाई करना - पौधों को रोपण योग्य बनाने के लिए जमीन की गुड़ाई भी करवायी जाती है जिससे उसमें जमें हुए घास - पात नष्ट हो जाते हैं । घास को नष्ट करने के लिए फावड़ों या खुरपियों का प्रयोग किया जाता है । मिट्टी जितनी उपयुक्त होगी पौधे उतनी जल्दी तैयार हो जायेंगे ।
4 . पौधों के रोपण का समय - बगीचे में पौधों को अनुकूल वातावरण में ही रोपित करना चाहिए । जो वातावरण जिस पौधे के रोपण के लिए उपयुक्त हो उसी वातावरण में पौधों का रोपण करना चाहिए ।
5 . खाद मिलाना - मिट्टी को उपयुक्त प्रकार से तैयार हो जाने के बाद उपयुक्त मात्रा में खाद को मिट्टी में मिला देना चाहिए जिससे रोपित पौधों को ऊर्जा मिल सके ।
6 . सिंचाई करना - रोपित पौधों की मौसम के हिसाब से सिंचाई भी करते रहना चाहिए नहीं तो पौधे सूख जायेंगे ।
बगीचा लगाने के विषय में क्यारियों का बनाना आवश्यक होता है जमीन के समतल पर गैर । समतल के हिसाब से क्यारियाँ बनायी जाती है । जहाँ क्यारियाँ बनायी जाती है वहाँ क्यारी के दोनों ओर एक फुट की दूरी पर मेढ़ बना दिया जाता है । बनी हुई क्यारियों में पौधों का रोपण किया जाता है । बगीचे हेतु समतल जमीन पर मिट्टी के अच्छी तरह से तैयार हो जाने के बाद पौधों को रोपित किया जाता है । क्यारियाँ वहीं बनाना चाहिए जहाँ थोड़ा खला हआ स्थान हो । बगीचे की क्यारियों में फूलों के पौधे लगाये जाते हैं । क्यारियों में फूलों को एक लाइन में लगाया जाता है । मेढ़ों के बीच में गड्डा खोदकर पौधारोपण किया जाता है , फिर कुछ मिट्टी चढ़ाकर पौधों की सिंचाई कर दी जाती है ।
गमले और एक्यूरियम
गमले उसी स्थान पर रखे जाते हैं , जहाँ बगीचे लगाने के लिए जगह नहीं होती हैं । अपने द्वारा बनाये गये बगीचे में भी बाउण्ड्री की तरह गमले रखे जाते हैं । गमले में पौधों के रोपण के लिए , सर्वप्रथम उसमें खाद एवं मिट्टी को मिलाकर गमले को भर देते हैं । इसके बाद उसमें पौधों को रोपित कर देते हैं । एक गमले में एक ही पौधा लगाया जाता है । पौधा रोपण के बाद उसने पानी डाला जाता है । घर का छतों एवं बरामदे में भी गमले रखे जाते हैं । गमलों को एक जगह या पंक्ति बद्ध भी करके रखा जा सकता है । गमलों में फलों और अंगूर , सेम आदि की बेलें भी लगाई जा सकती हैं । गमलों की समय - समय पर निराई गुड़ाई करना भी आवश्यक है ।
एक्यूरियम - एक्यूरियम बाजारों में रेडीमेड खरीदे जा सकते हैं । यह शीशा से बनाये जाते हैं । इसमें रंगीन मछलियों को रखा जाता है और पत्थर आदि भी होते हैं । इसके अन्दर कृत्रिम तालाब तैयार किया जाता है । एक्यूरियम में पानी भरा रहता है । जिसमें मछलियाँ तैरती रहती हैं । इसमें मछलियों के लिए भोजन ऊपर से डाला जाता है । इसमें दो प्रकार के पाइप लगे होते हैं जिससे , समय - समय पर पानी बदला जाता है एक तरफ से साफ पानी डाला जाता है तथा दूसरी तरफ से गन्दा पानी निकाला जाता है ।
स्वयं निर्मित बगीचे / क्यारी / गमले और एक्यूरियम आदि लगाते समय की सुरक्षा के उपाय
स्वयं निर्मित बगीचे / क्यारी / गमले / एक्यूरियम आदि लगाते समय इसकी सुरक्षा हेतु निम्नांकित उपाय ग्रहण किये जा सकते हैं
( i ) बगीचे लगाने के लिए सर्वप्रथम स्थान का चुनाव करना चाहिए । यदि जगह अधिक है तो बड़ा बगीचा लगाना चाहिए और यदि स्थान छोटा होता है तो छोटा बगीचा लगाना चाहिए ।
( ii ) बगीचा समतल स्थान पर लगाना चाहिए ।
( iii ) बगीचा , क्यारी या गमले में पौधों का रोपण करने से पूर्व मिट्टी को अच्छी तरह से गुड़ाई करके तैयार कर लेनी चाहिए ।
( iv ) गुड़ाई के पश्चात् मिट्टी में खाद मिलाना भी अत्यन्त आवश्यक है ।
( v ) बगीचे के समतल स्थान पर घास रोपित करनी चाहिए ।
( vi ) क्यारी सर्वदा मेढ़दार बनानी चाहिए ।
( vii ) पौधों को रोपण करते समय पौधों के मध्य पर्याप्त दूरी रखनी चाहिए ।
( viii ) गमलों की समय - समय पर गुड़ाई करनी चाहिए ।
( ix ) गमले हमेशा लाइन में या झुण्ड में रखना चाहिए ।
( x ) एक्यूरियम में पानी गन्दा होने की दशा में उसे बदल देना चाहिए ।
( xi ) पौधों को पानी देना तथा उनकी कटिंग करना आवश्यक होता है ।
( xii ) मौसमी पौधों को मौसम के हिसाब से बदलते रहना चाहिए ।
( xiii ) पानी , खाद , मिट्टी एवं समयानुसार कीड़े - मकोड़े से बचने के लिए दवा का भी प्रयोग करना चाहिए ।