नव - यथार्थवाद ( New Realism )
नव - यथार्थवाद एक प्रकार का दर्शन है । दूसरे शब्दों में नव यथार्थवाद की विचारधारा दार्शनिक विचारधारा है । इस विचारधारा का दर्शन तथा विज्ञान के क्षेत्र में अधिक महत्व है अपेक्षाकृत रिक्षा के क्षेत्र के रस्क के अनुसार नव - यथार्थवाद का वास्तविक योगदान इन पद्धतियों एवं निष्कर्या को स्वीकार करने में है जो भौतिकवाद के आधुनिक विकास से प्राप्त हुए हैं ।
नव - यथार्थवादियों के अनुसार वैधानिक नियम भी परिवर्तनीय है जैसेकि अन्य नियम परिवर्तनशील होते हैं । इनकी प्रामाणिकता किन्हीं खास परिस्थितियों में साबित होती है तथा स्थिति के बदलने पर ये भी बदल जाते हैं । नव - यथार्थवादियों के अनुसार विज्ञान और कला दोनों की शिक्षा महत्वपूर्ण है ।
नव - यथार्थवादी दार्शनिकों में दो नाम उल्लेखनीय है - ( i ) हाइटहेड ( ii ) बरट्रेड रसेला
हाइटहेड के अनुसार , जब आप सूर्य के विषय में सब कुछ जान जाये और वातावरण तथा पृथ्वी की प्रक्रिया का पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर ले तो भी आप सूर्यास्त की सुन्दरता को नहीं भूल सकते है ।
बरट्रेड रसेल के अनुसार , ज्ञानार्जन में संवेगात्मक आवेग की कमी होनी चाहिए . संवेगात्मक आवेग नुकसानदेह थकावट का प्रमुख कारण है । सेल के मतानुसार शिक्षा प्रदान करने का सर्वोत्तम तरीका इन्द्रियों के माध्यम से शिक्षा प्रदान करना है । इनके अनुसार शिक्षा को विश्लेषणात्मक तरीके से दिया जाना चाहिए जिससे कि शिक्षा बालक के संवेदनात्मक विकास में सहायक हो सके । रसेल उदार शिक्षा के पक्षपाती है परन्तु धर्म को रिक्षा ( पाट्य विषयो ) में शामिल करने को वे अपना मत नहीं देते है । रसेल भौतिकशास्त्र को सर्वोत्तम विषय मानते हैं । प्रश्न 2 वैज्ञानिक यथार्थवाद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए